मॉक ड्रिल : संयुक्त आपदा बचाव अभ्यास ऑपरेशन में 165 लोगों को बचाया, एनडीआरएफ ने सुरक्षा जांचने के लिए की मॉक ड्रिल

अजमेर. भूकम्प के झटके से जहां पूरा शहर थर्राया वहीं पंचशील नगर स्थित सिटी स्क्वायर मॉल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। भूकम्प से क्षतिग्रस्त मॉल और आग में करीब 165 लोग फंस गए। उन्हें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) 6वीं बटालियन के जवानों ने स्थानीय आपदा निवारण बल के साथ चलाए गए रेसक्यू ऑपरेशन में सकुशल निकाला गया। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस रेसक्यू ऑपरेशन को देखने वालों ने तालियां बजाकर जवानों की हौंसला अफजाई की।

एनडीआरएफ ने स्थानीय आपदा निवारण बल एसडीआरएफ, सिविल डिफेन्स, फायर ब्रिगेड, होमगार्ड, सीआरपीएफ, चिकित्सा विभाग, नगर निगम, पुलिस के साथ संयुक्त मंगलवार सुबह आपदा बचाव अभ्यास तरंग-2019 का आयोजन पंचशील नगर स्थित सिटी स्वायर मॉल पर किया गया। डिप्टी कमांडेंट अमरसिंह के नेतृत्व में आयोजित मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के जवानों ने जांबाजी का परिचय दिया। सबसे पहले नगर निगम की दमकल ने मॉल की चौथी मंजिल पर लगी आग पर काबू पाया। इसके बाद सिविल डिफेंस के जवानों ने भूतल पर फंसे व घायल हुए लोगों को राहत व बचाव कार्य पूरा किया। एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के जवानों ने बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए इमारत में फंसे लोगों को निकालने का ऑपरेशन शुरू किया। हालांकि एनडीआरएफ की ओर से एक दिन पूर्व आपदा निवारण बल व विभागों को सूचना देकर मॉक ड्रिल की गई। मॉक ड्रिल में पुलिस उपअधीक्षक डॉ. प्रियंका, सहायक कमांडेंट एसडीआरएफ राजेन्द्रसिंह रावत, सिविल डिफेन्स से डिप्टी चीफ विजय कुमार, फायर ऑफिसर देवेन्द्र कुमार मीणा सहित कई लोग मौजूद थे।

स्लेदरिंग-रेपलिंग से उतारे घायल

छत पर फंसे घायलों को निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के जवानों ने स्लेदरिंग (रस्सी के सहारे) नीचे उतारा। जबकि छत से छत पर जाने के लिए सीट रेपलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। छह मंजिला इमारत पर जवानों को रस्सी के सहारे उतरने का कारनामा देखकर पल स्कूली बच्चे रोमांचित हो उठे। रेसक्यू ऑपरेशन के अंत में तिरंगा झंडे के साथ उतरे जवान के सम्मान में सबने खड़े होकर तालियां बजाई। मॉक ड्रिल देखने के लिए शहर के 400 स्कूली बच्चों को बुलाया गया था।

तकनीक के साथ तालमेल

सर्च ऑपरेशन लाइव डिटेक्टर टाइप-2, वीएलसी (विक्टिम लॉकेटिक कैमरा) जैसी नई मशीनों का इस्तेमाल दिखाया गया। राठौड़ ने बताया कि लाइव डिटेक्टर टाइप-2 मानव हृदय की धड़कन को पकड़ती है। विक्टिम लॉकेटिंग कैमरा मलबे में दबे व्यक्ति को तलाशने में मददगार है। करीब 150 ज्यादा उपकरणों के साथ एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के जवानों ने अभ्यास किया। इसमें आरआरसा, आरपीसा जैसी मशीनें मौजूद थी जो मोटी से मोटी दीवार को काटने में सक्षम है। आपदा दल में डॉग स्वायड ने मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने में मदद की।

 

भूकम्प का केन्द्र पुष्कर

राठौड़ ने बताया कि मॉक ड्रिल में सुबह 10.30 बजे आए 7.2 रिक्टर स्केल के भूकम्प का केन्द्र पुष्कर था। जिला कलक्टर के आदेश पर रेसक्यू एजेंसी एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, सीआरपीएफ, होम गार्ड सहित तमाम एजेंसियां सक्रिय हो गई। फायर ब्रिगेड के बाद चिकित्सा विभाग की एम्बुलेंस और चिकित्सकीय दल भी घटनास्थल पर पहुंचा। घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद 15 गंभीर घायलों को जवाहरलाल नेहरू अस्पताल भी भेजा गया।

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