scriptfor a few drops life has to be kept on the palm | जीवन से ज्यादा कीमती पानी, चंद बूंदों के लिए हथेली पर रखनी पड़ती है जान | Patrika News

जीवन से ज्यादा कीमती पानी, चंद बूंदों के लिए हथेली पर रखनी पड़ती है जान

- सेना के फायरिंग रेंज में बने जलस्रोत ‘झिन्ना’ से पानी लाने की मजबूरी - इन दिनों चल रहा है फायरिंग अभ्यास, सेना ने लगा रखा है चेतावनी बोर्ड - झल्लूकाझोर व आसपास के पुरा-पट्टों का दर्द

एक्वा डी क्रिस्टालो ट्रिब्यूटो अ मोडिग्लिआनी को दुनिया का सबसे महंगा पानी माना जाता है। इस पानी की 750 मिली लीटर की बोतल की कीमत करीब 44 लाख रुपए है। दुनिया के चंद खरबपति इस पानी को पीते हैं, लेकिन, सरमथुरा के डांग क्षेत्र में बसे लोग इससे भी महंगा पानी पीने को मजबूर हैं।

 

 

अजमेर

Updated: April 25, 2022 12:54:31 am

धौलपुर. एक्वा डी क्रिस्टालो ट्रिब्यूटो अ मोडिग्लिआनी को दुनिया का सबसे महंगा पानी माना जाता है। इस पानी की 750 मिली लीटर की बोतल की कीमत करीब 44 लाख रुपए है। दुनिया के चंद खरबपति इस पानी को पीते हैं, लेकिन, सरमथुरा के डांग क्षेत्र में बसे लोग इससे भी महंगा पानी पीने को मजबूर हैं। दरअसल, डांग के इन बाशिंदों के लिए पानी की कीमत जीवन से भी अधिक है। यहां बसे लोगों को चंद बंूदों के लिए अपनी जान हथेली पर रखनी पड़ती है। झल्लूकाझोर क्षेत्र में पानी की किल्लत के कारण यहां के बाशिंदों को मजबूरी में सेना के फायरिंग रेंज में बने जलस्रोतों से चोरी-छिपे पानी लाना पड़ता है।
जीवन से ज्यादा कीमती पानी, चंद बूंदों के लिए हथेली पर रखनी पड़ती है जान
जीवन से ज्यादा कीमती पानी, चंद बूंदों के लिए हथेली पर रखनी पड़ती है जान
फायरिंग रेंज में है ‘झिन्ना’
गर्मी शुरू होते ही डांग की पथरीली भूमि पर जलस्रोतों से पानी सूखने लग जाता है। यहां-वहां चंद जलस्रोतों के सहारे ही डांग के बाशिंदों को प्यास बुझानी होती है। हमेशा पानी देने वाले जलस्रोतों को स्थानीय भाषा में ‘झिन्ना’ कहा जाता है। डांग के झल्लूकाझोर और उसके आसपास बसे पुरा-पट्टों का झिन्ना सेना की फायरिंग रेंज में आता है। ऐसे में ग्रामीण सेना की फायरिंग रेंज से पानी लाकर पीने को मजबूर हैं।
अनदेखी करते हैं चेतावनी
सेना की ओर से फायरिंग रेंज के आसपास चेतावनी के नोटिस भी चस्पा कर रखे हैं। इनमें साफ लिखा है कि 14 से 30 अप्रेल तक सेना की तोप की फायरिंग है। सेना ने लोगों से अपील की है कि वे रेंज की ओर न जाएं और न ही पशुओं को जाने दें। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। सेना की ओर से गांव में भी लोगों को सावचेत करने के लिए दो आदमी लगा रखे हैं। इस सब के बावजूद झल्लूकाझोर और आसपास के ग्रामीण जान की परवाह किए बिना झिन्ना से पानी लाने रेंज में आते-जाते रहते हैं।
इन दिनों चल रहा फायरिंग अभ्यास
रेंज में इन दिनों फायरिंग का अभ्यास जारी है। दूर से ही धमाकों की गूंज सुनाई देती है। इसके बावजूद पानी की किल्लत झेल रहे लोग रेंज में जाने को मजबूर हैं। असापास कहीं और साफ पानी का स्रोत नहीं होने से ग्रामीणों को जान की परवाह नहीं करते हुए फायरिंग रेंज में जाने को मजबूर होना पड़ता है।
मचा हडक़म्प, डांग के गांवों में पानी समस्या देखने पहुंचे अधिकारी

कार्यवाहक कलक्टर सहित पीएचईडी अधिकारी, तहसीलदार भी पहुंचे
पलायन करने वाले गांवों में मनरेगा में बनाए जाएंगे तालाब व टांके

धौलपुर. डांग क्षेत्र के गांवों से पानी की समस्या को लेकर पलायन करने वाले ग्रामीणों की व्यथा का राजस्थान पत्रिका में खुलासा होने पर रविवार को अधिकारियों में हडक़म्प मच गया। इस पर कार्यवाहक जिला कलक्टर तथा जिला परिषद सीईओ चेतन चौहान विभागीय अधिकारियों के साथ डांग क्षेत्र के दुर्गम गांवों में पहुंचे। इस दौरान लोगों से उन्होंने पेयजल तथा मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था को लेकर जानकारी ली। जिसमें सामने आया कि फरवरी माह में ही घास सूख जाती है। ऐसे में मवेशियों के लिए चारे व पानी की समस्या हो जाती है। इसके चलते पशुपालक उत्तरप्रदेश के युमना, मध्यप्रदेश तथा पार्वती व चम्बल नदी के किनारों पर रहने चले जाते हैं। बारिश के बाद फिर से घर लौटते हैं। यह समस्या आज की नहीं, वर्षों से चली आ रही है, लेकिन किसी भी अधिकारी ने इनकी व्यवस्था करने की पहल नहीं की है। इस सम्बंध में राजस्थान पत्रिका ने २४ अप्रेल को ‘गर्मी आते ही डांग में शुरू हुआ पानी के लिए पलायन’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इधर, सीईओ चेतन चौहान ने बताया कि जिन गांवों में लोग पलायन करते हैं, उन गांवों में मनरेगा के तहत तालाब, टांके बनवाए जाएंगे। इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। वहीं सबसे बड़ी समस्या बिजली की आती है, इस कारण वहां पर पानी की आपूर्ति सुचारू नहीं हो पाती है। इसके लिए अधिशासी अभियंता पीएचईडी को निर्देश दिए हैं। साथ ही गौलारी, मदनपुर पंचायतों के विभिन्न गांवों का दौराकर जहां पर पानी की उपलब्धता है, वहां पर पेयजलापूर्ति सुचारू कराई है। ग्राम मदनपुर व गोलारी में पेयजल की व्यवस्था का निरीक्षण किया। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिवर्ष मवेशीपालक परिवार कुछ सदस्यों के साथ घर से 15-20 किमी दूरी पर अच्छी घास व पानी वाले स्थान पर चले जाते है। इस स्थान को लोकल भाषा में खिरकारी कहते है। निरीक्षण के दौरान पीएचईडी एक्सईएन निरंजन मीणा, तहसीलदार, सरपंच तथा अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

17 जनवरी 2023 तक 4 राशियों पर रहेगी 'शनि' की कृपा दृष्टि, जानें क्या मिलेगा लाभज्योतिष अनुसार घर में इस यंत्र को लगाने से व्यापार-नौकरी में जबरदस्त तरक्की मिलने की है मान्यतासूर्य-मंगल बैक-टू-बैक बदलेंगे राशि, जानें किन राशि वालों की होगी चांदी ही चांदीससुराल को स्वर्ग बनाकर रखती हैं इन 3 नाम वाली लड़कियां, मां लक्ष्मी का मानी जाती हैं रूपबंद हो गए 1, 2, 5 और 10 रुपए के सिक्के, लोग परेशान, अब क्या करें'दिलजले' के लिए अजय देवगन नहीं ये थे पहली पसंद, एक्टर ने दाढ़ी कटवाने की शर्त पर छोड़ी थी फिल्ममेष से मीन तक ये 4 राशियां होती हैं सबसे भाग्यशाली, जानें इनके बारे में खास बातेंरत्न ज्योतिष: इस लग्न या राशि के लोगों के लिए वरदान साबित होता है मोती रत्न, चमक उठती है किस्मत

बड़ी खबरें

भारत में पेट्रोल अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और श्रीलंका से भी महंगामुस्लिम पक्षकार क्यों चाहते हैं 1991 एक्ट को लागू कराना, क्या कनेक्शन है काशी की ज्ञानवापी मस्जिद और शिवलिंग...योगी की राह पर दक्षिण के बोम्मई, इस कानून को लागू करने वाला नौवां राज्य बना कर्नाटकSri Lanka Crisis: राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की बची कुर्सी, अविश्वास प्रस्ताव हुआ खारिज900 छक्के, IPL 2022 में रचा गया इतिहास, बल्लेबाजों ने 15वें सीजन में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्डIPL 2022 : 65वें मैच के बाद हुआ बड़ा उलटफेर ऑरेंज कैप पर बटलर नंबर- 1 पर कायम, पर्पल कैप में उमरान मलिक ने लगाई छलांगज्ञानवापी मामले में काशी से दिल्ली तक सुनवाई: शिवलिंग की जगह सुरक्षित की जाए, नमाज में कोई बाधा न होभाजपा के पूर्व सांसद व अजजा आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस पोस्ट से मचा बवाल
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.