Good News: अब गांव दिखेंगे स्मार्ट, इंजीनियरिंग कॉलेज करेगा ये काम

उपकरण देने के अलावा तकनीकी सहायता में मदद करेगा। कॉलेज ने इसकी योजना तैयार कर ली है।

By: raktim tiwari

Published: 07 Sep 2020, 07:04 AM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

ग्रामीण विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज बड़लिया जल्द नई शुरुआत करेगा। कॉलेज निकटवर्ती पांच गांवों को कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण देने के अलावा तकनीकी सहायता में मदद करेगा। कॉलेज ने इसकी योजना तैयार कर ली है।

वर्ष 1996-97 में स्थापित इंजीनियरिंग कॉलेज में आईटी, कंप्यूटर, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल और अन्य ब्रांच संचालित हैं। बीते 24 साल में हजारों विद्यार्थी यहां से बीई कर चुके हैं। कॉलेज कई साल से बड़ल्या और अन्य गांवों में कई कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है। अब उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है।

पांच गांवों की करेंगे मदद
कॉलेज प्रशासन ने बड़ल्या, पालरा, माखुपुरा, सेंदरिया और अन्य गांव में सहायता की योजना बनाई है। कॉलेज अपने पुराने कंप्यूटर, माउस, की-प्रिंटर को दुरुस्त कर इन गांवों को देगा। इनमें पंचायत और स्कूल शामिल होंगे। पर्याप्त बजट की उपलब्धता होने पर नए उपकरण भी दिए जाएंगे।

उपलब्ध कराएंगे तकनीकी सहायता
कॉलेज प्रशासन ने गांवों मं तकनीकी सहायता मुहैया कराने की योजना भी बनाई है। कॉलेज ग्रामीणों की मदद के लिए मोबाइल एप और छोटे-बड़े कार्यों के लिए तकनीकी प्रोग्राम भी तैयार करेगा। खासतौर पर बीई अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट बनाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। कोरोना संक्रमण के बाद स्थिति सामान्य होने पर इसकी शुरुआत होगी।

यह होगा फायदा
-गांवों तक त्वरित पहुंचेगी तकनीकी सहायता
-कॉलेज और ग्रामीणों के बीच संवाद में आसानी
- स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को मिलेगा कंप्यूटर ज्ञान
-मोबाइल एप से जरूरी कामकाज में होगी आसानी


छात्रों ने बनाया स्टार्ट अप

क्रेजी ड्रायड टेक्निकल हब एंड रिसर्च सेंटर कम्पनी संचालक छात्र सूर्य प्रकाश सामोता और लोकेश राजस्थान को ऑटिफिशियल इंटेलीजेंस और रोबोटिक हब बनाने के लिए स्टार्ट अप शुरू कर चुके हैं। कॉरपॉरेट मामलात मंत्रालय में पंजीयन कराया गया है। वे स्कूल, कॉलेज के 10 हजार विद्यार्थियों को इसका प्रशिक्षण दे चुके हैं। जयपुर के कंचनपुर पंचायत भवन में इनोवेशन लैब स्थापित की गई है।


सामाजिक सरोकार के तहत पांच गांवों को गोद लिया है। यहां तकनीकी उपकरण और सहायता मुहैया कराएंगे। इससे गांवों भी तकनीकी विकास में भागीदार बनेंगे।डॉ. उमाशंकर मोदानी, प्राचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज बड़ल्या

raktim tiwari Reporting
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