Good sign: टॉडगढ़ अभ्यारण्य में बढ़े पैंथर और वन्य जीव

अभ्यारण्य को पर्यटन के रूप में बढ़ाने की जरूरत।

By: raktim tiwari

Updated: 08 Oct 2020, 04:00 PM IST

अजमेर.

खान-पान और आश्रय स्थल की कमी के चलते आम दिनों में हमें पैंथर, भालू, सियार, चिडिय़ा, मैना, अन्य पशु-पक्षी कम नजर आते थे। लेकिन मार्च से मई तक रहा लॉकडाउन वन्य जीवों के लिए फायदेमंद रहा। जिले के टॉडगढ़-रावली अभ्यारण्य में पैंथर और अन्य जीवों की हलचल बढ़ी। थोड़े से प्रयास किए जाएं तो अभ्यारण्य को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

लॉक डाउन के दौरान टॉडगढ़ अभ्यारण्य क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही थमी थी। शोर कम होने वन्य जीवों का मूवमेंट बढ़ा था। इस वन क्षेत्र में आठ पैंथर का कुनबा होने की बात सामने आई। अन्य वन्य जीवों का मूवमेंट भी इस दौरान बढ़ा।

बढ़ रहा है पैंथर का कुनबा
रावली अभ्यारण्य क्षेत्र में पैंथर का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। रावली क्षेत्र में आठ से दस पैंथर होने की संभावना है। अभ्यारण्य से पैंथर व रीछ ब्यावर व सेलागुडा रेंज की ओर जाते है। बीते जून में पैंथर शिंकजे में फंस गया था। वन विभाग ने उसे रेस्क्यू कर घने जंगल में छोड़ा था। हाल में एक मादा पैंथर की पैंथर के आपसी विवाद में मृत्यु हो गई थी। 24 मई को भालू गांव थूनी का थाक में नजर आया था। सेंदडा सहित आस-पास के क्षेत्र में भालू लगातार नजर आ रहे हैं।

बन सकता है पर्यटक स्थल
टॉडगढ़-रावली अभ्यारण्य 195.27 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। पर्यठ, शूटिंग एवं एडवेंचर स्पोट्र्स विस्तार की यहां संभावनाएं हैं। इससे कुंभलगढ़ अभ्यारण्य भी जुड़ता है। देवगढ़, नाथद्वारा, उदयपुर, कुंभलगढ़, हल्दीघाटी से इसे जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा रावली क्षेत्र ट्रेकिंग व रोमांचक खेलों की शुरुआत हो सकती है। पर्वतारोहण इसमें प्रमुख है। गेस्ट हाउस से तालाब के आस-पास पैंथर समेत कई वन्य जीवों को आसानी से देखा जा सकता है।

करने होंगे यह प्रयास
-वन्य जीवों के आश्रय स्थल के निकट रोकें मानवीय हलचल और शोर-शराबा
-शहरीकरण की निर्धारित करें सीमा
-प्राकृतिक आवास, भोजन-पानी का प्रबंधन
-वन्य जीवों-पक्षियों के लिए बनाएं जलाशयों पर प्राकृतिक वैटलैंड

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raktim tiwari Reporting
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