सरकार पलायन रोक बढ़ाए हाथ, उद्यमी श्रमिकों को प्रशिक्षण एवं काम देने को तैयार

लॉकडाउन में बंद इकाइयों के बिजली के बिल व फिक्स चार्ज होना चाहिए माफ, स्थानीय श्रमिकों को रोजगार के लिए उठाने होंगे कड़े कदम

By: CP

Published: 28 May 2020, 07:25 PM IST

अजमेर. कोरोना महामारी के बाद लॉक डाउन के चलते औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन बंद हो गया। श्रमिकों को पलायन हो गया। करीब दो महीनों से अधिक समय हो गया कई इकाइयां शुरू भी नहीं हो पाई हैं। मगर सरकार और डिस्कॉम की ओर से आज तक इनके बिजली के बिल और फिक्स सरचार्ज माफ करने के आदेश जारी नहीं हो पाए। औद्योगिक इकाइयों एवं मध्यम उद्योगों से जुड़े व्यापारियों व उद्यमियों ने पत्रिका के माध्यम से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है। अजमेर में सोमवार को राजस्थान पत्रिका की ओर से आयोजित वेबीनार में उद्यमियों ने कई सुझाव दिए। उद्यमियों ने लॉक डाउन पीरियड में बंद औद्योगिक इकाइयों के बिजली के बिल एवं फिक्स चार्ज में छूट की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जब लॉक डाउन में उद्योग धंधे ठप हो गए, श्रमिकों के पलायन के चलते उत्पादन भी नहीं हुआ ऐसे में बिजली के बिलों की मार से हर उद्यमी आहत है। विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों-पदाधिकारियों ने बताया कि श्रमिकों के पलायन को भी रोकना जरूरी है। इन श्रमिकों के स्किल डवलपमेंट के लिए उद्यमी तैयार है मगर सरकार को इसके लिए बैंक ऋण और ब्याज में छूट की सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए। प्रशिक्षण के लिए सरकार को भी उद्यमियों का सहयोग करना चाहिए। रोजगार कार्यालय और जिला उद्योग केद्र और प्रशासन को उद्यमियों को श्रमिकों का डाटा उपलब्ध कराना चाहिए। राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर संयुक्त टास्क फोर्स बने। इसमें ब्यूरोक्रेट, उद्यमी, श्रमिक प्रतिनिधि शामिल हों। टास्क फार्म में शहरी और ग्रामीण स्तर के लघु, मझौले और बड़े उद्योगों की रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजें। मार्बल उद्यमियों ने मांग की है कि केंद्र सरकार को मार्बल पर 18 के बजाय 5 प्रतिशत जीएसटी करनी चाहिए। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए उपखण्ड मुख्यालयों पर मिल्क प्रोडक्ट उत्पादन बनाने की इकाइयां शुरू करने की जरूरत बताई गई। वेबीनार में अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़ सहित अन्य शहर, कस्बों के उद्यमी शामिल रहे।

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