सरकारी तंत्र भी बजरी माफिया को पनपाने में मददगार-डीजीपी गर्ग

सरकारी तंत्र भी बजरी माफिया को पनपाने में मददगार-डीजीपी गर्ग

Manish Singh | Updated: 14 Jun 2019, 03:31:50 PM (IST) Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने कहा कि राजस्थान में बजरी समस्या बन चुकी है। यह लोगों की आवश्यकता है लेकिन प्रदेश में बजरी का खनन बंद है। जिससे ऐसा गप बन गया है जिससे राज्य में बजरी माफिया पनप गया।

अजमेर में क्राइम मिटिंग लेने आए आए डीजीपी, राजस्थान पत्रिका के सवाल पर बोले

अजमेर.

पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने कहा कि राजस्थान में बजरी समस्या बन चुकी है। यह लोगों की आवश्यकता है लेकिन प्रदेश में बजरी का खनन बंद है। जिससे ऐसा गप बन गया है जिससे राज्य में बजरी माफिया पनप गया। मुझे यह स्वीकार करने कोई कठिनाई नहीं है कि सरकारी तंत्र भी बजरी माफिया को पनपाने में मददगार है। इसमें हम भी शामिल है, जो उन्हें सहयोग कर देते हैं।

डीजीपी गर्ग शुक्रवार सुबह अजमेर प्रवास के दौरान खबरनविसों से बातचीत की। पत्रिका संवाददाता के सवाल पर कहा कि हमारा प्रयास है कि अवैध खनन पर कार्रवाई की जाए। पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश है कि उनसे मिलीभगत न रखे। आदेशों की 100 फीसदी पालना हो यही आदर्श स्थिति है। उन्होंने कहा कि कमियां हम में है और पहले भी थी लेकिन निरंतर प्रयास होना चाहिए कि हम कमी को ढूंढ कर सुधार करें। आमजन भी पुलिस का सहयोग करे। हम बजरी के अवैध खनन को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और कार्रवाई करेंगे। राज्य सराकर भी चाहती है कि बजरी वैध रूप से मिलना शुरू हो जाए।

अपराध नहीं पंजीयन बढ़ा

बढ़ते अपराध के सवाल पर डीजीपी गर्ग ने कहा कि हमारे लिए प्रत्येक प्रकरण महत्वपूर्ण है। अगर ट्रेंड की बात करें तो गतवर्ष 31 मई तक बलात्कार के 40 फीसदी प्रकरण बढ़े लेकिन मौजूद वर्ष में 32 प्रतिशत है। मेरे लिए 32 प्रतिशत बढ़ा अपराध भी चिंता का विषय है। हमने राज्य में प्रकरण दर्ज करने की परम्परा शुरू की है। आमजन इसका समर्थन व सहयोग करे। प्रदेश में अपराध नहीं उसका पंजीकरण में बढ़त्तोरी हुई है। इसे अपराध की बढ़ोत्तरी की श्रेणी में रखेंगे तो नुकसान यह होगा कि अन्य राज्य राजस्थान की तरह अपराध पंजीयन पर ध्यान नहीं देगा।

अपने आपको नहीं बदल पाए

हमें अंग्रेजों से क्लॉनियल पुलिसिंग मिली है। उसका परिणाम यह हुआ कि हम अपने आपको बदल नहीं पाए। आमजन को जो पुलिस सेवाएं मिलनी चाहिए थी वो उपलब्ध नहीं करवा पाए। एफआईआर दर्ज करवाना चुनौती हुआ करता था लेकिन अब आसान है। पहले अपराध पंजीबद्ध नहीं होते थे। मेरे डीजीपी बनने पर राज्य सरकार ने शतप्रतिशत अपराध पंजीबद्ध पर जोर दिया। प्रदेश में ऑपरेशन डी-कोए शुरू किया। उन्होंने शिकायते भेजकर जांच की कि कितनी दर्ज की गई। फिर व्यवहार, आचरण, भ्रष्टाचार, ड्यूटी की जांच की गई। मुझे गर्व है कि प्रदेश पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आगे निकल चुकी है। किसी को न्याय दिलाने का पहला स्टेप एफआईआर है। बाद में अनुसंधान और चालान होता है।

साप्ताहिक अवकाश पर सकारात्मक

डीजीपी गर्ग ने कहा कि हर व्यक्ति की अपेक्षा रहती है कि मुझे बेहतर मिले लेकिन सरकार को आमजन के लिए सड़क, पानी, बिजली और अस्पताल की भी व्यवस्था करनी पड़ती है। पुलिस को हर सरकार ने प्राथमिकता से संसाधन मुहैया कराए है। देश अभी इतना उन्नत नहीं हुआ कि सभी साधन मिल सके। संसाधन की कमी को ड्यूटी में आड़ नहीं आने दिया जाएगा।

प्रदेश पुलिस में है विश्वास
डीजीपी गर्ग ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश के गृहमंत्री है। उन्होंने गतदिनों पुलिस का रिव्यू किया। उन्होंने प्रदेश पुलिस में विश्वास जाहिर किया। उनका तर्क था कि राज्य के अधिकारी कर्मठ, सक्षम है। इसे यू कहा जा सकता है कि बीते 5 माह में प्रदेश में करीब 235 संवेदनशील अपराध घटित हुए उनमें से 30 में अनुसंधान लम्बित है। शेष में अनुसंधान के साथ अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस जवानों को अपने आचरण में बदलाव करना होगा। तभी आमजन का विश्वास अर्जित किया जा सकता है।

सुधार के हो प्रयास

उन्होंने कहा कि आम नागरिक पुलिस से नहीं अपराध से डरता है जबकि अपराधी दुबारा जेल जाने से नहीं डरता। ऐसे जेल, खुली जेल, बाल सम्प्रेषण गृह और समाज की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ताकि अपराधी व्यक्ति में सुधार के प्रयास किए जा सके। हर काम में कभी भी शतप्रतिशत कही भी नहीं मिलती है। बस प्रयास करने की जरूरत है।

प्रारंभ में हुई गलतियां

डीजीजी ने अलवर सामूहिक बलात्कार कांड का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस से जो प्रारंभिक गलतियां हुई वह छिपी नहीं है लेकिन घटना से सबक लेते हुए अपराध सामने आने के बाद पुलिस के मुखिया से लेकर आखरी व्यक्ति तक संगठित होकर काम किया। रिकॉर्ड टाइम में अपराधियों की गिरफ्तारी और अनुसंधान पूरा किया गया। कभी-कभी हममें से कोई गलती कर बैठता है लेकिन उसके लिए पूरे महकमे को गलत ठहराना गलत है।

बदलाव की जरूरत
अलवर प्रकरण के बाद ऐसे प्रकरण की बढ़ोत्तरी पर डीजीपी ने कहा कि यह तो रिसर्च और मनोवैज्ञानिक ही बता सकते हैं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति में भगवान व राक्षस प्रवृति होती है। जब एक जैसा अपराध होता है तो उसे देखकर प्रत्येक व्यक्ति के भीतर की भावना उत्पन्न होती है। जो अच्छी और बुरी भी सकती है। उन्होंने मासूम बच्चियों के साथ होने वाले अपराध पर हैवानियत बताया। उन्होंने इसके लिए सामाजिक चिंतन व बदलाव की जरूरत बताया।

 

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