scriptHence the choice Ukraine. .Less Fees, Better Security for Women | इसलिए पसंद यूक्रेन. .कम फीस, महिला सुरक्षा बेहतर | Patrika News

इसलिए पसंद यूक्रेन. .कम फीस, महिला सुरक्षा बेहतर

बच्चे बोले : सरकार एमबीबीएस की बढ़ाए सीटें, फीस पर भी हो कंट्रोल, पढ़ाई में नहीं अंतर, कई दवाइयों के प्रोटॉकोल अलग

अजमेर

Published: March 04, 2022 01:29:32 am

अजमेर. भारत में एमबीबीएस की सीटें कम होने के साथ फीस एवं डोनेशन की मार ने युवाओं को विदेश से पढ़ाई को मजबूर किया है। विदेश में भी युवाओं की पसंद बने यूक्रेन के पीछे कई वजह हैं। इनमें फीस के साथ महिला सुरक्षा के नजरिए से यूक्रेन को सुरक्षित माना गया है। यह हकीकत चार-पांच साल से पढ़ाई करने वाली हमारी बेटियों ने भी महसूस की है।
इसलिए पसंद यूक्रेन. .कम फीस, महिला सुरक्षा बेहतर
इसलिए पसंद यूक्रेन. .कम फीस, महिला सुरक्षा बेहतर
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद रातों-रात बदले हालात के चलते यूक्रेन में एमबीबीएस कर रहे कई छात्र-छात्राएं अपने घर पहुंच गए हैं। इनसे बातचीत की तो कई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। वर्तमान हालातों के चलते पढ़ाई को लेकर चिंतित युवा अब केन्द्र सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
यूक्रेन में पढ़ाई की यह प्रमुख वजह

-एमबीबीएस की फीस कम।-छात्राओं (महिलाओं) के लिए सुरक्षित।

-विदेशी डिग्री।-कम प्रतिशत होने पर भी एमबीबीएस की सुविधा।

फीस में इतना अंतर

यूक्रेन से लौटे छात्र-छात्राओं के अनुसार भारत में एक वर्ष के 20 से 30 लाख रुपए खर्च। भारत में प्रति सीट अनुसार लिया जाता है डोनेशन। जबकि यूक्रेन में 20 से 30 लाख रुपए में पूरी डिग्री हो जाती है। वहां एंट्रेंस में ही फीस ले ली जाती है और डिग्री पूरी होने तक बदलाव नहीं होता है।केन्द्र सरकार से उम्मीद
-भारत में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाई जाएं।-एमबीबीएस की डोनेशन सीट का आरक्षण खत्म हो।

-सामान्य वर्ग की भी सीटें का बढ़ाने का प्रावधान हो।-बदले हालात के चलते एमबीबीएस पूरा करवाया जाए।

-हालात नहीं सुधरने पर संबंधित वर्ष में यहां प्रवेश दिया जाए।
इनका कहना है

यूक्रेन में फीस कम होने के साथ महिलाएं सुरक्षित हैं। वहां महिला अपराध भी कम है। भारत में एमसीआई की परीक्षा के बाद डिग्री मिलती है तो यूक्रेन में क्रॉक एक्जाम के बाद डिग्री मिलती है। वहां फीस हर साल नहीं बदलती। पहली बार ही फिक्स होती है जो डिग्री पूरी होने तक वही रहती है।
रिचा चैनानी, निवासी अजमेर (यूक्रेन स्टूडेंट)

यूक्रेन के बजाय भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई अच्छी होती है लेकिन सीटें कम होने से नम्बर नहीं आता है। यूक्रेन छोटा देश है, कम संसाधन हैं। वहां कम फीस में डिग्री मिल जाती है। वहां हालात बिगड़ गए हैं, ऐसे में अब केन्द्र सरकार को देश में ही हमारे लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
समीर मंसूरी, अजमेर (यूक्रेन स्टूडेंट)

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