पदों की कमी, काम में देरी से कैसे होगा महिला एवं बाल विकास !

विभाग की 13 परियोजना में 1982 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सिर्फ 3 सीडीपीओ

उप निदेशक का पद खाली, काम में परेशानी

एक सीडीपीओ के जिम्मे हैं पांच-पांच प्रोजेक्ट

By: himanshu dhawal

Published: 01 Aug 2020, 04:37 PM IST

हिमांशु धवल
अजमेर. जिले में महिला एवं बालविकास विभाग के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों और विभागीय योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने के जिम्मेदार खुद ही बेतहाशा काम के बोझ से दबे हुए हैं। जिले में अधिकारियों के पदों का टोटा है, जिससे काम पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। विभाग की जिलेभर में संचालित 13 परियोजनाओं में सीडीपीओ के सिर्फ 3 पद ही भरे हैं। ऐसे में योजनाओं की क्रियान्विति, लक्ष्य प्राप्ति और परिणाम का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।

इतने कामों का जिम्मा
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जाता है। इसमें 5 वर्ष तक के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने का जिम्मा है। केंद्रों पर आने वाले बच्चों का टीकाकरण, कुपोषित बच्चे, धात्री महिला और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण और पोषाहार आदि उपलब्ध कराया जाता है। केन्द्रों पर कार्यरत सहायिका, कार्यकर्ता को सर्वे आदि की जिम्मेदारी भी दी जाती है। जिनकी मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना आधिकारी) की होती है। पांच-पांच परियोजना की जिम्मेदारी एक सीडीपीओ पर होने से कार्य के परिणाम और समयबद्धता पर भी असर पड़ता है।

इन पर पड़ता है असर
- परियोजना (ब्लॉक) की मॉनिटरिंग

- आंगनबाड़ी केन्द्र और फील्ड विजिट
- कार्यालयी कामकाज, बैठक आदि

- विभागीय योजनाओं का कियान्वयन
फैक्ट फाइल

- 1982 आंगनबाड़ी केन्द्र जिले में

- 13 परियोजनाओं में बंटे हैं केन्द
्र- 13 में से 10 पद रिक्त हैं सीडीपीओ के

कार्यवाहक के भरोसे सारे काम!
जयपुर रोड स्थित महिला एवं बाल विकास संकुल में उप निदेशक महिला बाल विकास विभाग, सहायक निदेशक महिला अधिकारिता विभाग और बाल विकास परियोजना अधिकारी विभाग संचालित है। उप निदेशक व सहायक निदेशक के पद रिक्त हैं। कार्यवाहक उपनिदेशक अनुराधा सेठ के पास पीसांगन, मसूदा, भिनाय, केकड़ी व सरवाड़ का कार्यभार है। इसी तरह कार्यवाहक सहायक निदेशक विमलेश के पास अजमेर, श्रीनगर, पुष्कर परियोजना के सीडीपीओ एवं ब्यावर व मसूदा की जिम्मेदारी नितेश यादव पर है।

इनका कहना है...

जिले में मात्र 3 सीडीपीओ कार्यरत हैं। काम को पूरा करने का प्रयास किया जाता है।

- अनुराधा सेठ
कार्यवाहक उप निदेशक, महिला बाल विकास विभाग

himanshu dhawal Reporting
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