scriptHuman interference reduced, then the disturbance of migratory birds | कम हुआ मानव दखल, तो मिटा प्रवासी पक्षियों का खलल | Patrika News

कम हुआ मानव दखल, तो मिटा प्रवासी पक्षियों का खलल

- जिले के बांध, ताल-तलैयों से हटने लगे अवैध मछुआरे - पत्रिका ने उठाया था मामला - मछली पकडऩे का जाल बन रहा था प्रवासी पक्षियों के लिए जंजाल

जिले के लगभग सभी बांधों और ताल-तलैयों में मछली पकडऩे वालों के कारण प्रवासी पक्षियों को हो रही परेशानी कुछ हद तक कम हुई है। पत्रिका ने बुधवार, 22 दिसंबर के अंक में इस समस्या को लेकर 'मछली पकडऩे का जाल, बन रहा प्रवासी पक्षियों के लिए जंजालÓ शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।

अजमेर

Updated: December 24, 2021 01:39:43 am

धौलपुर. जिले के लगभग सभी बांधों और ताल-तलैयों में मछली पकडऩे वालों के कारण प्रवासी पक्षियों को हो रही परेशानी कुछ हद तक कम हुई है। पत्रिका ने बुधवार, 22 दिसंबर के अंक में इस समस्या को लेकर 'मछली पकडऩे का जाल, बन रहा प्रवासी पक्षियों के लिए जंजालÓ शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशन के बाद अवैध रूप से मत्स्य आखेट में जुटे लोगों के हौसले पस्त हुए हैं। हुसैनपुर सहित जिन स्थानों पर अवैध रूप से मछली पकडऩे का काम हो रहा था, वहां से नावें हटा ली गई हैं। ऐसे में अब प्रवासी मेहमान पक्षी चैन की सांस ले स्वच्छंद कलरव कर रहे हैं।
कम हुआ मानव दखल, तो मिटा प्रवासी पक्षियों का खलल
कम हुआ मानव दखल, तो मिटा प्रवासी पक्षियों का खलल
नावें हटीं, तंबू-डेरे बरकरार

समाचार प्रकाशन के बाद अवैध मछुआरों ने हुसैनपुर बांध से नावें तो हटा ली हैं लेकिन, उनके तंबू-डेरे अभी किनारे पर बरकरार हैं। मछली रखने के बक्से आदि भी वहीं पड़े हैं। ऐसे में मामला थोड़ा ठंडा होने पर उनके लौट के आने की पूरी आशंका है।
जाल बन रहा था मुसीबत

इन बांध, ताल-तलैयों में मछुआरों द्वारा डाले जा रहे जाल के कारण प्रवासी पक्षी परेशान थे। मछली के जाल में कई बार प्रवासी पक्षी भी फंस रहे थे। वहीं, उनका भोजन भी खत्म हो रहा था। उनके प्राकृतिक रहवास में मानवीय दखल के कारण पक्षी आस-पास के खेतों का रुख कर गए थे।
अब बांध में लौटे पक्षी

हुसैनपुर बांध से मानवीय हलचल कम हुई तो प्रवासी पक्षी भी बांध क्षेत्र में लौट आए हैं। गुरुवार को प्रवासी पक्षियों के झुंड बांध में विचरण करते नजर आए। हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले इन पक्षियों को अब वहां भरपूर भोजन और पानी मिल रहा है।
पेलिकन जैसे पक्षी पर था समाप्ति का खतरा

पेलिकन और इंडियन स्कीमर जैसे सिर्फ मछली पर निर्भर रहने वाले पक्षियों के लिए मछली पकडऩे वाले लोग बड़ा खतरा हैं। बांधों-तालाबों में जाल बिछा मछली पकडऩे के कारण इनको पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में यह पक्षी जिले से दूरी बनाने लगे हैं। लगातार कम संख्या में आवक से इनके आने वाले वर्षों में यहां आने की संभावना पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
जिले में बढ़ा वैध-अवैध मत्स्य पालन

पूर्व में जिले के गिने-चुने जलाशयों पर ही मछली पालन होता था लेकिन, अब ज्यादातर जलस्रोतों पर मछली पकडऩे का ठेका होने लगा है। जिले में वर्तमान में सभी प्रमुख बांधों में मछली पकडऩे का ठेका है। इनमें पार्वती नदी पर बना आंगई बांध, रामसागर, तालाबशाही और उर्मिला सागर (निभी का ताल) बांध में मछली पकडऩे का ठेका दिया गया है। वहीं जिले के उमरेह, हुसैनपुर और आरटी बांध पर ठेका तो नहीं है लेकिन, यहां अवैध रूप से मछली पकडऩे वालों की भरमार है।

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