Ignorance: अजमेर के युवाओं को छोडऩा पड़ता है घर, ये है खास वजह

विशेष पाठ्यक्रमों के लिए दूसरे राज्यों-शहरों में दाखिले लेने पड़ते हैं। जबकि केंद्र और राज्य सरकार चाहे तो अजमेर को एज्यूकेशन हब बनाया जा सकता है।

By: raktim tiwari

Published: 01 Mar 2021, 08:48 AM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

शैक्षिक संस्थानों और विशिष्ट पाठ्यक्रमों के मामले में अजमेर राज्य के दूसरे शहरों के मुकाबले पिछड़ रहा है। यहां आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान नहीं है। शहर के युवाओं को विशेष पाठ्यक्रमों के लिए दूसरे राज्यों/शहरों में दाखिले लेने पड़ते हैं। जबकि केंद्र और राज्य सरकार चाहे तो अजमेर को एज्यूकेशन हब बनाया जा सकता है।

प्रत्यूष, निहारिका, मिहिका और ऋत्विक (नाम परिवर्तित)आईआईटी, आईआईएस, सेंट्रल यूनिवर्सिटी, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और अन्य निजी संस्थानों के विद्यार्थी हैं। यह एम.टेक, बी.टेक, मैनेजमेंट, लॉ, ग्रीन केमिस्ट्री, राडार टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स में अध्ययनरत हैं। अजमेर में केंद्रीयकृत और राज्य स्तरीय संस्थानों की कमी के चलते इन्हें अन्यत्र एडमिशन मिला है।

दूसरे शहर में संस्थानों की भरमार
जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर और उदयपुर पर केंद्र और राज्य सरकार ज्यादा मेहरबान है। इन शहरों में ट्रिपल आईआईटी, आईआईटी, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, तकनीकी, आयुर्वेद, संस्कृत, होम्योपैथी, कृषि विश्वविद्यालय खुल चुके हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी राजस्थान भी बांदरसींदरी में खोली गई है।

अजमेर में हैं यह संस्थान
रीजनल कॉलेज-1964-65
जेएलएन मेडिकल कॉलेज-1965
एमडीएस विवि-1987
बड़ल्या इंजीनियरिंग कॉलेज-1997-98
महिला इंजीनियरिंग कॉलेज-2007-08
राजस्थान राज्य आयुष अनुसंधान केंद्र (हालिया बजट में घोषणा)
आयुर्वेद,योग एवं नेचरोपैथी कॉलेज (हालिया बजट में घोषणा)

कई विशिष्ट कोर्स की कमी
पॉलीटेक्कि, इंजीनियरिंग कॉलेज, विश्वविद्यालयों और अन्य कॉलेज में विशिष्ट कोर्स नहीं हैं। इनमें ग्रीन केमिस्ट्री, थियेयर एन्ड आर्ट, सोलर एनर्जी, कॉमर्शियल प्रेक्टिस, कम्प्यूटर एप्लीकेशन एन्ड बिजनेस मैनेजमेंट, एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स, इंश्योरेंस एन्ड कॉमर्स, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी, मेटेलर्जिकल इंजीनियरिंग कोर्स शामिल हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती विवि सहित कॉलेज में घिसे-पिटे ट्रेडिशनल कोर्स चलते हैं।

चलते हैं केवल यह कोर्स
कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय के पारम्परिक कोर्स-सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर, आईटी, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, पर्यावरण विज्ञान और अन्य कोर्स

छोडऩा पड़ता है अपना शहर
रिसर्च और डवेलपमेंट में कॅरियर बनाने वाले अजमेर के 35 से 45 प्रतिशत युवा देश के नामचीन संस्थानो में प्रवेश लेते हैं। इनमें जेएनयू, डीयू, सेंट स्टीफन्स कॉलेज, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइनिंग, आईआईटी-एनआईटी (एम.टेक/बी.टेक) शामिल हैं। ज्यादातर तकनीकी और उच्च शिक्षण संस्थानों में जॉब ओरिन्टेड और ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स का अभाव है। हालांकि अजमेर में गुजरे 10-15 साल में कई नए कोर्स शुरू हुए हैं।

ये कारण हैं जिम्मेदार
-जयपुर, उदयपुर , कोटा, जोधपुर पर सरकार ज्यादा मेहरबान
-अजमेर के सियासी नेता नहीं करते पुरजोर मांग
-उच्च और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में विशिष्ट शोध की कमी
-राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से शैक्षिक आदान-प्रदान नहीं
-विभागों/संकायों में शिक्षकों के पद रिक्त
-विशिष्ट कोर्स खोलने में नहीं संस्थानों/शिक्षकों की रुचि
-मल्टीनेशनल अथवा बड़ी इंडस्ट्री/कम्पनियों का अभाव
-संस्थानों में हाइटेक लैब, रिसर्च संसाधनों की कमी

raktim tiwari Reporting
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