अवैध कनेक्शनों ने बिगाड़ा पेयजल वितरण का गणित

साढ़े दस हजार परिवारों में से 2500 के पास ही है कनेक्शन, अधिकारियों की लापरवाही ने ध्वस्त की पेयजल स्कीम

राजाखेड़ा शहरी क्षेत्र के लिए 4 दशक पहले तैयार की गई पेयजल योजना अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही समय से पहले खत्म हो गई लेकिन हर बार की तरह नुकसान के लिए जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की जगह एक नई स्कीम की घोषणा कर दी गई।

By: Dilip

Published: 12 Jul 2021, 12:43 AM IST

राजाखेड़ा. राजाखेड़ा शहरी क्षेत्र के लिए 4 दशक पहले तैयार की गई पेयजल योजना अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही समय से पहले खत्म हो गई लेकिन हर बार की तरह नुकसान के लिए जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की जगह एक नई स्कीम की घोषणा कर दी गई। उपभोक्ताओं का आरोप है कि अगर हालात यही रहे तो नई स्कीम की जिंदगी तो पुरानी स्कीम के आधी भी नहीं रह पाएगी। इसका लाभ भी वास्तविक उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाएगा। बड़ी राशि खर्च करने के बाद भी हालात जस के तस ही बने रहने की आशंका है।

क्या हैं हालात

राजाखेड़ा नगरपालिका क्षेत्र में 10200 परिवार निवास करते हैं। सभी के घर पर जल संयोजन किए हैं, लेकिन जलदाय विभाग के वास्तविक और वैध उपभोक्ताओं की संख्या 2500 से भी कम है। स्पष्ट है कि शहरी क्षेत्र में 7500 से अधिक अवैध जल संयोजन है। इस कारण वास्तविक वैध उपभोक्ताओं को पेयजल मिल ही नहीं पाता और वे विभाग को नियमानुसार भुगतान करने के बाद भी पेयजल से वंचित रह जाते हैं। अवैध संयोजन वाले इस कीमती भूजल का जमकर दुरुपयोग करते हैं। जिससे वितरण लाइनों का प्रेशर कम हो जाता है कि पानी का बहाव का उचित स्तर रह नहीं रह पाता।

क्या हैं कारण

लगभग सभी अवैध उपभोक्ताओं के कनेक्शन गलत तरीके से प्लास्टिक पाइपों से किए गए हैं, जो खुले पड़े रहते हैं। आधा शहरी क्षेत्र में ट्यूबवेल से सीधी सप्लाई होती है, जिससे पूरी सप्लाई के समय इन कनेक्शन से पेयजल नालियों में बहता रहता है। उपयोग तो मात्र 20 फीसदी होता है बर्बादी 80 फीसदी होकर तालाबों में इक_ा हो जाता है। इस पेयजल से भूतेस्वर और अभूकि तालाब हमेशा लबालब रहते हैं। जिनसे किसान पंपसेट डालकर अपने खेतों की सिंचाई भी करते है।
हर घर की जानकारी फिर भी नहीं कार्यवाही

संवेदनशील तथ्य यह है कि यहां तैनात सभी अधिकारी और कर्मचारी स्थानीय हैं, जिनके पास प्रत्येक अवैध कनेक्शन की जानकारी है। उसके बाद भी कार्यवाही न होना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। आरोप है कि अधिकांश कनेक्शन खुद जलदाय कर्मियों ने ही करवाए हैं। सुविधा शुल्क भी वसूला जाता है।

इन हालातों में अब वरिष्ठ नागरिकों को यहां के लिए स्वीकृत की गई नवीन स्कीम पर भी संशय है।

इन हालात का जिम्मेदार कौन

भरपूर पानी की उपलब्धता होते हुए भी जबरदस्त पेयजल किल्लत के लिए विभागीय अधिकारियों की लापरवाही तो है ही, आमजन भी जिम्मेदार है। हम विधायक के प्रयासों से अधिकारियों पर कार्यवाही का प्रयास तो कर ही रहे हंै। जल्द नई स्कीम भी ला रहे है।
वीरेंद्र सिंह जादौन, नगरपालिकाध्यक्ष राजाखेड़ा

इनका कहना है
अवैध कनेक्शन एक बड़ी समस्या बन चुके है। अधिकारियों को सख्ती से इनके विरुद्ध कार्यवाही करनी ही चाहिए, अन्यथा हालात दुरूह होते चले जाएंगे।

नवल सिंह, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, राजाखेड़ा
इनका कहना है

जलदाय विभाग जो पानी अहसान कर देता है वो भी पीने योग्य नहीं है। लोग जल जनित बीमारियों का शिकार हो रहे है और अधिकारी अपने घरों में मस्त है। सभी अधिकारी कर्मचारियो को अन्य जिलों में भेजा जाए, तभी हालात सुधर पाएंगे। लक्ष्मीकांत गुप्ता, व्यापारी हाट मैदान

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