कोरोना महामारी में आयुर्वेदिक पद्धतियों का अहम रोल-डीएम

धन्वन्तरि जयन्ती आयोजित
कोरोना महामारी में आयुर्वेदिक पद्धतियों का अहम रोल रहा है। आयुर्वेदिक दवाओं व काढ़े से न सिर्फ कोविड मरीज ठीक हुए हैं, बल्कि इम्युनिटी बढ़ाने में भी कारगर सिद्ध हुआ है।

By: Dilip

Published: 13 Nov 2020, 11:17 PM IST

धौलपुर. कोरोना महामारी में आयुर्वेदिक पद्धतियों का अहम रोल रहा है। आयुर्वेदिक दवाओं व काढ़े से न सिर्फ कोविड मरीज ठीक हुए हैं, बल्कि इम्युनिटी बढ़ाने में भी कारगर सिद्ध हुआ है। यह बात पंचायत समिति सभागार में जिला कलक्टर राकेश कुमार जायसवाल ने आयुर्वेद जगत के प्रणेता तथा वैद्यक शास्त्र के देवता भगवान धन्वंतरि की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए। उन्होंने भगवान धनवंतरी का पूजा-अर्चना फल, फूल और दीप प्रज्ज्वलित करके सभी के स्वास्थ और खुशहाली और कोरोना से बचाव के लिए आयु के देवता भगवान धनवंतरी से प्रार्थना की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आयुर्वेद के जनक धनवंतरि को याद करने की सबसे ज्यादा जरूरत है। खुद को स्वस्थ रखना है और कोरोना जैसी महामारी में कोरोना से मुक्ति के लिए भी धन्वंतरि का अनुसरण करना होगा। समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रायोदशी को भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन को धनतेरस भी कहा जाता है।
धन्वंतरि ही आयुर्वेद के रचयिता हैं, इसलिए भारत सरकार ने इस दिन को आयुर्वेद दिवस घोषित किया है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का मुख्य लक्ष्य लोगों को निरोग रखना है। आज विभिन्न रोगों के कारण लोगों को लाखों रुपया चिकित्सा पर खर्च करना पड़ता है, जिससे लोगों की आर्थिक स्थिति बदतर हो जाती है।

तुलसी, गिलोय, बेल, आम व नीबूं के पौधे लगाएं

आयुर्वेद के निर्देशों का पालन कर और स्वस्थ दिनचर्या अपना कर हम निरोग रह सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने घरों व आसपास तुलसी, गिलोय, नीम, बेल, आम, लेमन घास जैसे औषधीय पौधे लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के इस काल में सरकार ने कोविड-19 महामारी के प्रभाव को सीमित करने के लिए आयुष आधारित प्रथाओं की क्षमता में वृद्धि करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। प्रारम्भिक कदम के रूप में निवारक स्वास्थ्य उपायों तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार के लिए स्व देखभाल के दिशा निर्देश जारी किए। कोरोना महामारी से पहले चुनिंदा खासकर बुजुर्ग लोग ही आयुर्वेद दवा व काढ़ा का उपयोग करते थे, लेकिन संक्रमण फैलने के बाद युवा भी इसे अपनाने लगे।
उन्होंने लोगों को कोरोना से बचाव के लिए नियमित रूप से आयुष काढ़ा पीने की सलाह देते हुए योग व्यायाम व प्राणायाम करते रहने को कहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सीईओ जिला परिषद शिवचरन मीणा ने निरोगी काया विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए धन्वन्तरि की महत्ता का वर्णन किया। विकास अधिकारी राजेश लवानियां, आयुर्वेदिक चिकित्सक मनोज कुमार शर्मा, प्रज्ञा जैन, राजवीर शर्मा ने भी धन्वन्तरि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डीडी आयुर्वेद डॉ. बृजमोहन शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस मौके पर डॉ. सुभाष जिन्दल, डॉ. निरंजन शर्मा सहित जिले के आयुर्वेद चिकित्सक व चिकित्सा कर्मी उपस्थित रहे।इसी प्रकार राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बोथपुरा में भी भगवान धन्वंतरि की जयंती का आयोजन किया गया। आयर्वेद के जनक धन्वंतरि का पूजन.अर्चन किया गया।

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