राजाखेड़ा में बार बार डोलती साहब की कुर्सी

14 साल में 20 थानाधिकारी बदले, केवल चार थाना प्रभारी ही कर पाए एक साल पूरा, एक दर्जन तो एक से दस माह में ही हटाए गए

खाकी पर खादी भारी, एेसे आरोप हमेशा ही लगते रहे हंै, खाकी की नियुक्ति से लेकर स्थानांतरण तक में खादी की भूमिका संदेह के घेरे में रही है लेकिन संवेदनशील थाने राजाखेड़ा में बीते 14 वर्ष से लगातार थाना प्रभारियों के बदलने का सिलसिला जारी है। थाना क्षेत्र तीन ओर से उत्तर प्रदेश व एक ओर से मध्य प्रदेश से घिरा हुआ है।

By: Dilip

Published: 09 Jun 2021, 12:33 AM IST

राजाखेड़ा. खाकी पर खादी भारी, एेसे आरोप हमेशा ही लगते रहे हंै, खाकी की नियुक्ति से लेकर स्थानांतरण तक में खादी की भूमिका संदेह के घेरे में रही है लेकिन संवेदनशील थाने राजाखेड़ा में बीते 14 वर्ष से लगातार थाना प्रभारियों के बदलने का सिलसिला जारी है। थाना क्षेत्र तीन ओर से उत्तर प्रदेश व एक ओर से मध्य प्रदेश से घिरा हुआ है। यहां अब तक थाना प्रभारियों को बदलने के प्रकरण में खादी की दखलंदाजी रही है या योग्यता के मुद्दे को लेकर एक साल कार्यकाल पूरा होने से पहले ही बदल दिया जाता है। थाने की व्यवस्थाओं पर सवाल उठना लाजिमी है कि किन कारणों से बार बार एेसा होता रहा है ।

आंकडें खोल रहे पोल

राजाखेड़ा के आंकडों पर नजर डाले तो मई 2007 से मई 2021 तक के 14 वर्षों में राजाखेड़ा में 20 थाना प्रभारियों को तैनात किया जा चुका है। इन 20 थाना प्रभारियों में मात्र 4 ही एक वर्ष का कार्यकाल पूरा कर पाए है। अन्य ने बमुश्किल एक वर्ष पूरा किया। कई तो एक से तीन माह तक ही टिक सके। कईयों ने पांच माह, एक प्रभारी चार माह, एक प्रभारी सात माह, एक प्रभारी आठ माह और दो प्रभारी 10 माह ही यहां रूक सके।

अति संवेदनशील थाना में बड़ी चिंता

राजाखेड़ा थाना जिले के सबसे अति संवेदनशील थानों में गिना जाता है । भौगोलिक दृष्टि से थाने की सीमाएं तीन ओर से उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश सीमाओं से जुड़ा है । धोलपुर से जुड़ाव तो सिर्फ स्टेट हाईवे -2 आ से है, बाकी क्षेत्र अन्तरराÓयीय सीमा से लगता है। उपखंड उत्तरप्रदेश के अपराधियों की शरणस्थली बन चुका है। यहंा वे खुले आम विचरण करते है। दर्जनों स्थान तो ऐसे में यहां से कुछ ही मिन में राजस्थान की सीमा पार कर उत्तरप्रदेश में प्रवेश किया जा सकता है। ऐसे में बार बार जिम्मेदार अधिकारियों को बदलना बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

अवैध रेता उत्खनन भी बड़ा मुद्दा

उपखंड अवैध रेता उत्खनन का जिले का सबसे बड़ा केंद्र है। जहां आधा दर्जन घाटों से रेता उत्खनन होकर उत्तरप्रदेश के रास्ते भरतपुर तक पहुंचता है । ऐसे में थानाधिकारियों के तबादलों को भी जोड़कर देखा जा रहा है। जहां लंबे समय से चम्बल उत्खनन को रोकने के लिए अलग थाना बनाने की मांग उठ रही ह

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