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पशुपालक बेचारा : मवेशियों को पालना भी हुआ मुश्किल

महंगाई के दौर में घाटे का सौदा साबित हो रहा पशुपालन, दुधारु पशु से नहीं हो रही बचत, छोटे व दूध नहीं देने वाले पशुओं को पालना में भी आ रही दिक्कत

अजमेर

Updated: April 28, 2022 02:57:38 am

दिनेश कुमार शर्मा

अजमेर . चारे के भावों में एकाएक हुई बढ़ोत्तरी ने पशुपालकों को बे-चारा बना दिया है। उनके सामने अपना और पशु दोनों का परिवार पालने का संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां महंगाई के दौर में गुजारा कर पाना मुश्किल है, वहीं चारे के भाव बहुत अधिक बढ़ने से पशुपालक के लिए पशुपालन घाटे का सौदा बन गया है, जिसमें वह परिवार का भरण-पोषण नहीं कर पा रहा है। वहीं महंगे चारे के दौर में दुधारु पशु का दूध बेचकर तो बमुश्किल उसकी खुराक निकाली जा रही है, लेकिन छोटे और दूध ना दे पाने वाले पशुओं को पालना टेड़ी खीर साबित हो रहा है।
पशुपालक बेचारा : मवेशियों को पालना भी हुआ मुश्किल
पशुपालक बेचारा : मवेशियों को पालना भी हुआ मुश्किल
इसलिए खड़ा हुआ चारे का संकट

राजस्थान में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व हरियाणा से आने वाले पशुआहार (भूसे) पर वहां की सरकारों ने प्रतिबंध लगा दिया। इससे पशुपालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि इन राज्यों से प्रतिमाह 200 से 300 ट्रक भूसे के प्रदेश में आते थे।
जिले में कहां से आ रहा चारा

अजमेर जिले में सरवाड़, केकड़ी के अलावा मेड़ता, डिग्गी मालपुरा, टोंक आदि कस्बों से चारा बिक्री के लिए पहुंच रहा है। ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से जनाना अस्पताल के आस-पास चारा पहुंचाया जाता है। यहां से जीप और टैम्पो के जरिए शहर के अंदरूनी हिस्सों में बिक्री के लिए कुट्टी की टाल तक पहुंचता है।
कुट्टी की 15-16 टाल हैं शहर में

शहर में कुट्टी की 15 से अधिक टाल हैं। इनमें शांतिपुरा, चौरसियावास रोड, पुष्कर रोड, फव्वारा सर्किल, लवकुश उद्यान, धौलाभाटा, 9 नम्बर पेट्रोल पम्प, लोहागल, पर्वतपुरा समेत अन्य स्थानों पर शहर के पशुपालकों के लिए चारा बिक्री किया जाता है।
दूसरे शहर भी बढ़ा रहे भाव

जिले में कई स्थानों से व्यापारी गुजरात और राजस्थान के जयपुर और जोधपुर समेत ऐसे शहरों में चारा पहुंचाने में अधिक रुझान दिखा रहे हैँ, जहां चारे की अधिक किल्लत है। यहां उन्हें चारे का अधिक भाव मिल पा रहा है। इससे भी जिले में चारे का संकट बढ़ा है।
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महंगे भाव के बावजूद नहीं मिल रहा

जिले में वर्तमान में तकरीबन पांच लाख पशुधन है। प्रति पशु को प्रतिदिन लगभग 10 किलो भूसे की आवश्यकता होती है।वहीं दूसरी ओर पूर्व में भूसा 800 से 900 रुपए क्विंटल तक मिल जाता था। वह वर्तमान में 1200 से 1300 रुपए क्विंटल भाव देने के बावजूद नहीं मिल पा रहा।
अनियमित बरसात ने किया बिगाड़ा

जिले में चारे के संकट के लिए इस वर्ष हुई अनियमित बरसात भी जिम्मेदार है। जिल के कई हिस्साें में जहां लगातार बरसात होने से फसल खराब हुई तो कई स्थान ऐसे रहे जहां बरसात नहीं होने से फसल को नुकसान पहुंचा। इससे भी चारे का अभाव बन गया है।
- दीपक बदलानी, कुट्टी संचालक

राहत की उम्मीद कम

विभिन्न कारणों से चारे के भावों में इस बार 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। इसमें कमी आने की उम्मीद भी कम ही है, क्योंकि जब सीजन में ही यह भाव हैं तो अगली फसल आने में तो अभी 7-8 महीने हैं। ऐसे में उपलब्ध चारे से ही काम चलाया जाएगा, जिससे भाव आने वाले दिनों में और बढ़ेंगे।
मुरली, कुट्टी संचालक

चारा आमतौर पर भाव वर्तमान भाव (रुपए/प्रतिकिलो)

ज्वार की कुट्टी 9-10 18
खाखला 7-9 14
खेजड़ी की पत्ती 17-18 25
जौ का दलिया 12-13 30
काकड़ा खल 32 40
ग्वार फलकट 12-13 15-16

एक स्वस्थ्य दुधारू पशु का प्रतिदिन का आहार
कुट्टी 10 से 12 किलो
चूरी 4 किलो
दलिया 4 किलो
काकरा 2 किलो
तेल 100 ग्राम

घाटे का सौदा

पशु की दूध देने की क्षमता 20 लीटर मानते हुए चारे की वर्तमान दर और 40 रुपए लीटर दूध की दर से हिसाब लगाया जाए तो दूध से प्राप्त दाम और चारे के दाम लगभग बराबर हैं। ऐसे में पशुपालक के लिए पशु का पालन कर पाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। क्योंकि पशुपालन के लिए स्थान का होना, पानी-बिजली समेत अन्य खर्च और पशुपालक की मेहनत भी शामिल है।
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पालना होता है इनका परिवार भी

पशुपालक को दुधारू पशु के बच्चे भी पालने होते हैं, जिससे उसे कोई कमाई तो नहीं होती, लेकिन खुराक पर खर्च जरूर करना होता है। कृषि कार्य में जरूरत नहीं रहने से अब बछड़े और पाड़े अनुपयोगी बन गए हैं तो बछिया और पाडी को दुधारू पशु बनने तक करीब तीन साल पालना होता है। दुधारू पशु को भी दो से ढाई महीने बिना दूध लिए ही पालना होता है, जो कि महंगे चारे के साथ बहुत मुश्किल काम है।
सुखदेव, डेयरी संचालक

क्या कहते हैं पशुपालक

चारा महंगा होने से पशुपालक बहुत परेशान हैं। गांव में पशुओं को पिलाने के लिए पानी नहीं है, खिलाने के लिए चारा नहीं है। दूध का भाव 60 रुपए लीटर किया जाए तो ही राहत मिलेगी।
कैलाश गुर्जर, पशुपालक

किसानों और पशुपालकों के हित में सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिएं। चारे पर सब्सिडी जारी की जाए तो कुछ राहत मिल सकती है।

हरिराम जाट, पशुपालक

चारा बहुत महंगा है। इसमें दुधारू पशु को पौष्टिक आहार भी खिलाना पड़ता है। यह और अधिक महंगा पड़ता है। दुधारु पशुओं के बच्चे भी पालने होते हैं।
मानसिंह राठौड़, पशुपालक

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