दलालों के चंगुल में करौली का श्रम विभाग दफ्तर, एसीबी की नजरों में कई कार्मिक और बिचौलिए

श्रमिकों की योजनाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय हैं दलाल, श्रमिक पंजीयन से लेकर सिलीकोसिस तथा मृत श्रमिकों की सहायता में गड़बड़ी के कई मामले

By: suresh bharti

Updated: 27 Jun 2021, 10:57 PM IST

अजमेर/करौली. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से जयपुर में श्रम आयुक्त को तीन लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार करने के बाद करौली में श्रम विभाग की कारगुजारियों की भी परतें भी खुलने की उम्मीदें बनी हैं। लम्बे समय से यहां के श्रम विभाग में गड़बडिय़ों की शिकायतें की जाती रही हैं। विशेष तौर पर खनन मजदूरों को सिलीकोसिस रोगियों और मृत श्रमिकों के आश्रितों को सहायता के नाम पर पिछले कुछ वर्षो में काफी कुछ हेराफेरी हुई बताते हैं।
श्रमिकों के पंजीयन कराने और फिर योजनाओं के लाभ दिलाने के नाम पर सक्रिय रहे दलालों ने यहां काफी गुल खिलाए हैं। इसमें श्रम विभाग के अधिकारी-कार्मिकों की भूमिका संदेहास्पद रही है। इस तरह की सूचनाएं एसीबी तक भी पहुंच जाने के बाद अब करौली जिले में एसीबी सक्रिय हो गई है।

सूत्रों की मानें तो एसीबी की कुछ खास लोगों पर नजरें हैं। एक दिन पहले करौली के श्रम अधिकारी के कार्यालय को सील बंद करने और गांव के आवास पर छापे में १० लाख से अधिक राशि जब्त करने की एसीबी कार्रवाई को इसी से जोडक़र देखा जा रहा है।

सहायता राशि में बंदरबांट

जानकार सूत्र बताते हैं करौली जिले में सिलीकोसिस सहायता तथा श्रमिकों की योजनाओं की करोड़ों रुपए की राशि के वितरण में बीते कुछ वर्षो में काफी बंदरबांट हुई है। इसमें श्रम विभाग में सक्रिय कुछ दलाल संस्थाओं की भूमिका को प्रमुख रूप से संदेहास्पद माना जा रहा है।

कुछ संस्थाओं के मजे

आरोप है कि करौली में कुछ संस्थाओं ने तो सिलीकोसिस की सहायता में दलाली का धंधा कर लाखों रुपए के वारे-न्यारे किए हैं। इन संस्थाओं के गांव-ढाणियों तक में एजेंट अभी भी नियुक्त हैं। उनका काम सिलीकोसिस की सहायता के मामलों का स्थानीय स्तर पर सांठगांठ करना रहा है। संस्थाएं प्रमाण-पत्र बनवाने, श्रमिक के रूप में पंजीयन कराने से लेकर सहायता राशि स्वीकृत कराने का काम करती रही है।

श्रम विभाग, चिकित्सा विभाग और प्रशासनिक स्तर पर अधिकारी-कार्मिक इसमें लिप्त भी रहे हैं। इनका पूरा नेटवर्क करौली जिले में फैला हुआ है। इस हेराफेरी की बदौलत संस्था के जो संचालक कुछ समय पहले तक जमीन पर चलते थे, वह महंगी गाडिय़ों में घूमते नजर आ रहे हैं। इन संस्थाओं के एजेंटों तक के महंगे मकान, वाहन कई संदेह पैदा कर रहे हैं।

रफादफा किए जाते रहे मामले

इनको लेकर कई बार शिकायतें भी हुई। बीच में फर्जीवाड़े के कुछ मामले सामने आए भी तो उनको रफा-दफा करा दिया गया। चूंकि अब मामला प्रदेश स्तर पर एसीबी अधिकारियों की नजरों में आया है तो उम्मीद की जा रही है कि फर्जी श्रमिक और श्रमिकों की सहायता के नाम पर बीते वर्षो में की गई हेराफेरी के काफी कुछ खुलासे संभव हो सकेंगे। एसीबी के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर संकेत दिए कि वह करौली में पिछले वर्षो में श्रम विभाग के जरिए से विभिन्न योजनाओं में वितरित सह ाीयता राशि की जांच करा रहे हैं।

suresh bharti Desk
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