ब्लाइंड मर्डर का खुलासा : अवैध संबंधों में बाधक बने प्रेमिका के पति को उतारा था मौत के घाट

आरोपी महिला और प्रेमी युवक गिरफ्तार, तीन महीने पहले के ब्लाइंड मर्डर का पुलिस ने किया खुलासा,रीको इंडस्ट्रीज एरिया में मलबे के नीचे प्लास्टिक के कट्टे में मिला था शव

By: suresh bharti

Published: 11 Apr 2021, 11:18 PM IST

मदनगंज-किशनगढ़/अजमेर. अपराध चाहे कितनी ही चालकी से क्यों न किया जाए। आखिर आरोपी पकड़ा ही जाएगा। मार्बल नगरी किशनगढ़ में तीन महीने पहले हुए ब्लाइंड मर्डर का पुलिस ने रविवार को खुलासा कर ही दिया। युवक की हत्या अवैध संबंधों की परिणति थी। पुलिस ने आरोपी महिला एवं उसके प्रेमी को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने महिला से अवैध संबंधों के चलते उसके पति को मौत के घाट उतारा था। मृतक की पहचान नहीं हो सके। इसके लिए शव को प्लास्टिक के कट्टे में डालकर उसे मिनरल फैक्ट्री से निकलने वाले मलबे के नीचे छिपा कर प्रेमी-प्रेमिका भाग गए थे।

 प्लास्टिक का कट्टा नजर आया, इसमें लाश निकली

पुलिस अधीक्षक जगदीशचन्द्र शर्मा ने बताया कि 3 जनवरी को भंवरलाल गुर्जर ने किशनगढ़ थाना पुलिस को लिखित में रिपोर्ट देकर बताया था कि उसने मंगलम मिनिरल फैक्ट्री किराए पर ले रखी है। 3 जनवरी शाम करीब 5 बजे मजदूर फैक्ट्री के सामने पड़े पत्थर और मैटेरियल (मलबा) हटा रहे थे। इसी दौरान उन्हें सफेद प्लास्टिक का कट्टा नजर आया। इसमें एक व्यक्ति की लाश निकली।

परिवादी ने रिपोर्ट में बताया कि किसी ने अज्ञात व्यक्ति को मारकर उसकी लाश पत्थरों और मैटेरियल के नीचे प्लास्टिक के कट्टे में बंद कर छिपा दी है। किशनगढ़ थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर हत्यारों की तलाश शुरू कर दी। शव की शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने करीब 20 दिन बाद पोस्टमार्टम करा उसे लावारिस के रूप में अंतिम संस्कार करा दिया।

ट्रैक्टर ट्रॉली से मिला अहम सुराग

सिलोरा रीको इंडस्ट्रीज एरिया स्थित मंगलम फैक्ट्री में गत वर्ष 25 दिसम्बर रात्रि ट्रैक्टर ट्रॉली चोरी हो गई थी। जांच में उक्त फैक्ट्री में 15-20 दिन पहले ही काम पर लगाए मजदूर की ओर से ट्रैक्टर ट्रॉली चोरी करने की पुष्टि हुई। यह मजदूर यहां पत्नी एवं बच्चों समेत रहता था, लेकिन किसी को ना तो उसका नाम मालूम था और ना ही पता। उसने मोबाइल सिम भी किसी और के पहचान पत्र से ली हुई थी। इस पर पुलिस ने दोनों मामलों को जोडकऱ अनुसंधान को गति दी।

एक माह बाद मिली सफलता

पुलिस ने एक महीने बाद आरोपी को चुराई ट्रैक्टर ट्रॉली समेत मध्यप्रदेश के नागपुर से धर-दबोचा। पुलिस ने उसकी पहचान सीकर के खाटूश्यामजी थाना क्षेत्र के गोवटी तुलसीरामपुरा निवासी रामप्रसाद जाट के रूप में की। पूछताछ में पुलिस को आरोपी से पता चला कि उसने श्याम पाउडर फैक्ट्री में काम करना शुरू किया। उस फैक्ट्री में रामस्वरूप नाम का व्यक्ति पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। इनके साथ अर्जुन नाम का व्यक्ति भी रहता था। कुछ दिनों से वह सभी मंगलम फैक्ट्री में आकर रहने लगे। अर्जुन एक बार रामस्वरूप की पत्नी को कपड़े दिलाने बाजार ले गया। इस बात पर अर्जुन एवं रामस्वरूप में झगड़ा भी हुआ। इस पर पुलिस ने मृतक के कपड़े व उसके हाथ में पहने कड़े को दिखाया तो रामप्रसाद ने यह वस्तुएं रामस्वरूप की होने की पुष्टि की। इस पर पुलिस ने रामस्वरूप के भाई भीलवाड़ा के पुलियाकलां पालोला निवासी मिश्री बलाई (45) को थाने बुलाया। यहां पुलिस ने उसे रामस्वरूप का फोटो दिखाया। मिश्री ने उसकी पहचान अपने भाई रामस्वरूप उर्फ चांदमल बलाई के रूप में की। पुलिस ने मृतक रामस्वरूप और मिश्री बलाई के डीएनए की जांच कर मिलान कराया।

गांव में हो गया था आना-जाना बंद

पुलिस जांच में सामने आया कि रामस्वरूप करीब 15 वर्ष पहले भीलवाड़ा के खेड़ा पालोला गांव से किरण को भगाकर लाया था। इसके बाद से ही उसका गांव में आना-जाना बंद हो गया। इसके बाद वह किशनगढ़ में रहकर मजदूरी करने लगा।

अवैध संबंधों के चलते की हत्या

रामस्वरूप की पत्नी किरण और आरोपी अर्जुन के बीच काफी समय से अवैध संबंध थे। यह बात रामस्वरूप को पता चल गई। घटना वाली रात रामस्वरूप शराब लेने गया, जब वापस आया तो अर्जुन और किरण को कमरे में बंद पाया। उसने कमरे का दरवाजा खुलवाया। दोनों को भीतर साथ देख रामस्वरूप अपनी पत्नी किरण के साथ मारपीट करने लगा। यह देख अर्जुन ने लोहे के सम्बल से उस पर हमला कर दिया। कुछ ही देर में रामस्वरूप ने दम तोड़ दिया। इसके बाद अर्जुन ने किरण के साथ मिलकर लाश को प्लास्टिक के कट्टे में बंद किया और फैक्ट्री के सामने पड़े मलबे में दबा दिया।

देबास के जंगल में झोपड़ी बनाकर रहने लगा

वारदात के अगले दिन किरण और उसके बच्चों को लेकर अर्जुन मध्यप्रदेश चला गया। वह किरण एवं इसके दो बच्चों के साथ अपने गांव से करीब 200 किलोमीटर दूर देबास के जंगल में झोपड़ी बनाकर रहने लगा और अपना मोबाइल भी बंद कर दिया।

भाई की मदद से कातिल तक पहुंची पुलिस

अर्जुन का भाई गोवर्धन भी मजदूरी के लिए किशनगढ़ आने वाला था, लेकिन वारदात के बाद वह किशनगढ़ नहीं आया। यह पता चलने पर पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी, लेकिन उसने मोबाइल नम्बर बदल लिए थे। पुलिस को उसके नए मोबाइल नम्बर मिल गए और उससे सम्पर्क किया। इसके बाद पुलिस ने गोवर्धन के सहयोग से आरोपी अर्जुन और उसके साथ रह रही किरण के बारे में जानकारी हासिल की। पुलिस टीम ने मध्यप्रदेश में देवास के जंगल से दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

बच्चों को बोलती रही झूठ...

पुलिस पूछताछ में पता चला कि किरण बच्चों की ओर से पिता के बारे में पूछने पर उन्हें कह देती कि तुम्हारे पापा पर केस चल रहा है और वह जेल में हैं। उसके एक 10 साल की पुत्री और 8 साल का पुत्र समेत दो संतानें हैं।

पुलिस ने मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के भाट पचलाना थाना क्षेत्र के बालोदा कोरान निवासी आरोपी अर्जुन भील (28) को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही मूलत: भीलवाड़ा के पुलियाकलां थाना क्षेत्र के खेड़ा पालोला निवासी एवं हाल किशनगढ़ के पुराना शहर गुर्जरों का मोहल्ला निवासी मृतक की पत्नी आरोपी किरण बलाई (37) को गिरफ्तार कर लिया।

suresh bharti Desk
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