माशिबो : सत्रांक भेजने की तिथि बढ़ाई, इससे पहले सोमवार को सर्वर डाउन होने से दिनभर जूझता रहा स्कूल प्रशासन

ऑनलाइन सत्रांक भेजने में कई दिक् कतों का सामना करना पड़ा,सोमवार को सत्रांक भेजने की अंतिम तिथि थी,लेकिन बाद में माशिबो ने समय सीमा बढ़ा थी,इससे शाला प्रबंधन ने राहत की सांस ली।

By: suresh bharti

Updated: 29 Jun 2021, 12:43 AM IST

Ajmer. अजमेर/जवाजा. कोरोना महामारी की दूसरी लहर को ध्यान में रखकर निरस्त बोर्ड परीक्षाओं के सत्रांक भेजने की व्यवस्था स्कूलों के लिए बड़ी परेशानी बन गई। अंतिम तिथि होने से पर सोमवार को बोर्ड में सत्रांक की ऑनलाइन फीडिंग नहीं हो सकी।

ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर व इंटरनेट की समस्याओं के चलते शहरों में आकर फीडिंग करवाई गई। सर्वर डाउन होने से बड़ी संख्या में स्कूलों का डाटा फीडिंग का कार्य अधूरा रह गया। जबकि तय तिथि के बाद ऑनलाइन सत्रांक फीडिंग के लिए विलम्ब शुल्क तय है। सर्वर डाउन होने के कारण दिनभर स्कूल संचालक जूझते रहे, शाम तक अंकों की फीडिंग नहीं हो पाई।

अब 1 जुलाई तक भेज सकेंगे सत्रांक

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने वर्ष 2021 की परीक्षाओं के लिए विद्यालयों द्वारा नियमित परीक्षार्थियों के सत्रांक भेजने की अंतिम तिथि 1 जुलाई तक बढ़ा दी है । पूर्व में सत्रांक भेजने की तिथि सोमवार को समाप्त हो रही थी।

स्कूलों को भेजने हैं 20 फीसदी सत्रांक

बोर्ड की व्यवस्था के अनुसार 20 प्रतिशत सत्रांक स्कूल की ओर से भेजना निर्धारित है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने आदेश जारी कर 21 से 28 जून तक बोर्ड कक्षाओं के सत्रांक ऑनलाइन फीडिंग करने के निर्देश दिए। 10-12वीं बोर्ड परीक्षाएं तो निरस्त हो गईं, लेकिन परीक्षा-परिणाम का इंतजार है। इसी के मध्यनजर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से 21 से 28 जून तक सत्रांक फीडिंग करने के लिए वेबसाइट ओपन की। विषयवार अंक अपलोड करने के लिए वेबसाइट पर सर्व डाउन की एरर आने से अंक अपलोड नहीं हो सके। जबकि सोमवार को शाम तक विभाग की ओर से तिथि बढ़ाने संबंधी कोई आदेश नहीं आया। जबकि अंतिम तिथि के बाद अंकों की फीडिंग करने का विलम्ब शुल्क भी काफी ज्यादा है।

150 रुपए प्रति विद्यार्थी विलंब शुल्क

बोर्ड की ओर से 8 दिन की अवधि के बाद सत्रांक अपलोड के लिए 150 रुपए प्रति विद्यार्थी विलंब शुल्क तय किया है। इसके बाद अगर किसी स्कूल में अधिक विद्यार्थी है तो सत्रांक अपलोड करने के लिए अधिकतम 15 हजार रुपए विलंब शुल्क देना होगा।

प्रोमेट की स्पष्ट नीति नहीं

जितेंद्र अरोड़ा (रूपनगर), अध्यक्ष, गैर सरकारी स्कूल एसोसिशन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन फीडिंग होना मुश्किल है। बोर्ड ने कम समय दिया है। सत्रांक देने और विद्यार्थियों को प्रमोट करने की नीति में स्पष्टता नहीं है। प्रमोट करने की नीति में स्पष्टता रखने के लिए संशोधित आदेश जारी करने चाहिए।

suresh bharti Desk
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