MDSU: खुद के घर का नहीं ध्यान, दूसरों को पढ़ा रहे फिजूल पाठ

ना स्थाई शिक्षक ना संसाधन हैं। यूजीसी, बार कौंसिल और राज्य सरकार विद्यार्थियों से खिलवाड़ में जुटी है।

By: raktim tiwari

Updated: 17 Mar 2021, 08:39 AM IST

अजमेर.

सम्बद्ध कॉलेज को नियमों का पाठ पढ़ा रहे महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के अपने हाल खराब हैं। कैपस में संचालित एलएलएम, पत्रकारिता, गणित, और हिंदी सहित कई कोर्स बदहाल है। इनमें ना स्थाई शिक्षक ना संसाधन हैं। यूजीसी, बार कौंसिल और राज्य सरकार विद्यार्थियों से खिलवाड़ में जुटी है।

विश्वविद्यालय ने सत्र 2006-07 में एलएलएम पाठ्यक्रम शुरु किया। यहां प्रथम और द्वितीय वर्ष 40-40 सीट है। शुरुआत में पाठ्यक्रम में पर्याप्त प्रवेश नहीं हुए। विधि के बजाय दूसरे विभागों के शिक्षकों को यहां विभागाध्यक्ष बनाया गया। वर्ष 2008 में राजस्थान विश्वविद्यालय के विधि शिक्षक प्रो. के. एल. शर्मा और लॉ कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एस.आर. शर्मा को नियुक्त किया था। इनके जाने के बाद एलएलएम बदहाल है। विभाग में कोई स्थाई शिक्षक नहीं है। लॉ कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. आर. एस. अग्रवाल कक्षाएं ले रहे हैं।

नियमित नहीं आते विद्यार्थी
एलएलएम के अन्य विषय पढ़ाने के लिए यदा-कदा वकील या सेवानिवृत्त शिक्षक आते हैं। ज्यादातर विद्यार्थी नियमित नहीं आते हैं। उनकी अटेंडेंस कागजों में ही पूरी हो रही है। एलएलएम पाठ्यक्रम की बदहाली से बार कौंसिल ऑफ इंडिया भी चिंतित नहीं दिख रही। जबकि उसके नियम पार्ट-चतुर्थ, भाग-16 में साफ कहा गया है, कि विश्वविद्यालय और कॉलेज को एलएलएम कोर्स के लिए स्थाई प्राचार्य, विषयवार शिक्षक और संसाधन जुटाने जरूरी होंगे।

हिंदी विभाग भी बदहाल
हिंदी विभाग भी विश्वविद्यालय में बदहाल है। पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह ने पत्रिका की खबर पर संज्ञान लेकर हिंदी विभाग खुलवाया। पांच साल से हिंदी विभाग उधार के शिक्षक के भरोसे संचालित है। विभाग में कोई स्थाई प्रोफेसर, रीडर अथवा लेक्चरर नहीं है। ऐसा तब है जबकि देश-विदेश में हिंदी की लोकप्रियता बढ़ रही है।

पिछड़ा है पत्रकारिता विभाग
सर्वाधिक रोजगारोन्मुखी माना जाने वाला पत्रकारिता विभाग भी पिछड़ा हुआ है। यहां दो-तीन पत्रकार कक्षाएं लेते हैं। विभाग में दस साल से स्थाई शिक्षक नहीं है। कैंपस में विद्यार्थियों के लिए स्टूडियो, कंप्यूटर सुविधा और नामचीन पत्रकारों-विशेषज्ञों के व्याख्यान नहीं होते हैं।

गेस्ट फेकल्टी के भरोसे...
विश्वविद्यालय में कुल 16 शिक्षक हैं। स्थाई शिक्षकों के अलावा सभी विभागों में गेस्ट फेकल्टी कक्षाएं लेती हैं। विभागवार गेस्ट फेकल्टी की संख्या तीन से चार तक हैं। जबकि यूजीसी के कायदे से विश्वविद्यालय में विभागवार एक प्रोफेसर, तीन रीडर और चार लेक्चरर होने चाहिए।

बैसाखियों के सहारे विभाग
प्रो. शिवदयाल सिंह (अर्थशास्त्र)-राजनीति विज्ञान, पृथ्वीराज चौहान शोध पीठ
प्रो. सुब्रतो दत्ता (पर्यावरण विज्ञान)-रिमोट सेंसिंग,भूगोल और परीक्षा नियंत्रक
प्रो. प्रवीण माथुर (पर्यावरण विज्ञान)-वैदिक अध्यययन और दयानंद शोध पीठ
प्रो. शिव प्रसाद (मैनेजमेंट)-कॉमर्स, पत्रकारिता और अम्बेडकर शोध पीठ
डॉ. आशीष पारीक (मैनेजमेंट)-लघु उद्यमिता एवं कौशल केंद्र
डॉ. दीपिका उपाध्याय (मैनेजमेंट)-जनसंख्या अध्ययन, हिंदी विभाग
प्रो.ऋतु माथुर (खाद्य एवं पोषण)-शिक्षा विभाग
प्रो. अरविंद पारीक (बॉटनी)-गणित विभाग
प्रो. नीरज भार्गव (कंप्यूटर)-फिजिक्स विभाग

raktim tiwari Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned