MDSU EXAM: दो घंटे की परीक्षा, हल करने होंगे कुल आठ प्रश्न

विश्वविद्यालय इसके निर्देश प्रवेश पत्र पर प्रिंट करने के अलावा वेबसाइट पर अपलोड करेगा।

By: raktim tiwari

Published: 12 Sep 2020, 06:32 AM IST

अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की स्नातक तृतीय वर्ष की परीक्षाएं 17 सितंबर से शुरू होंगी। दो घंटे की परीक्षा में विद्यार्थियों को तीनों वर्गों में आठ प्रश्न करने होंगे। विश्वविद्यालय इसके निर्देश प्रवेश पत्र पर प्रिंट करने के अलावा वेबसाइट पर अपलोड करेगा।

परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुब्रतो दत्ता ने बताया कि बीए, बीएससी, बी.कॉम, बीए, बीएससी और बी.कॉम ऑनर्स, बीएससी होम साइंस, बीएससी बायोटेक, बीएससी आईटी, बीएससी यौगिक साइंस, बीसीए (ओल्ड) और बीसीए न्यू तृतीय वर्ष की परीक्षाएं 17 सितंबर से प्रारंभ होंगी। विद्यार्थियों को भाग-अ में 10 में से 5 प्रश्न, भाग-ब में 5 में से 2 प्रश्न और भाग-स में कोई एक प्रश्न करना होगा। परीक्षा की अवधि दो घंटे होगी।

विश्वविद्यालय यह निर्देश प्रवेश पत्र पर प्रिंट करने के अलावा वेबसाइट पर भी अपलोड करेगा। सभी परीक्षा केंद्रों पर थर्मल स्कैनिंग से तापमान जांच, सेनेटाइजर की व्यवस्था जरूरी होगी। कॉलेज के कमरों में सोशल डिस्टेंसिंग के अनुसार विद्यार्थियों को बैठाया जाएगा।

संदेह के घेरे में परीक्षा केंद्र!
एसीबी ने कॉलेज की सम्बद्धता, सीट बढ़वाने और परीक्षा केंद्र बनवाने की एवज में कुलपति आर. पी. सिंह, दलाल रणजीत सिंह और निजी कॉलेज प्रतिनिधि महिपाल को ट्रेप किया है। जिन कॉलेज में लेन-देन से परीक्षा केंद्र बने हैं, वे संदेह के घेरे में हैं। सरकार, राजभवन और एसीबी को इन पर ध्यान देना जरूरी होगा।

किसके सिर कुलपति का ताज, फैसले का इंतजार

अजमेर. महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में कुलपति का ताज कौन पहनेगा इसका सबको इंतजार है। घूसकांड के चलते विश्वविद्यालय की पूरे देश में किरकिरी हो गई है। राजभवन और सरकार के स्तर पर फैसला नहीं हो पाया है।

एसीबी ने 7 सितंबर को प्रो.आर. पी.सिंह और उसके बॉडीगार्ड (दलाल) रणजीत सिंह तथा निजी कॉलेज प्रतिनिधि महिपाल को गिरफ्तार किया था। गुरुवार को राज्यपाल कलराज मिश्र ने सरकार से परामर्श के बाद आर. पी. सिंह के निलंबन आदेश जारी किए थे।

जांच और साख अहम...
अधिकृत सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय में घूसकांड की आंतरिक जांच और साख अहम है। राजभवन और सरकार ऐसे कुलपति की तलाश में है जो शैक्षिक-प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त कर सके। अस्थाई जिम्मेदारी की दौड़ में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति हैं। हालांकि एसीबी की जांच के चलते कार्यवाहक कुलपति को भी फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे।

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raktim tiwari Reporting
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