MDSU: फॉर्म तो भरेंगे जाने कब, पहले करानी पड़ेगी यह जांच

किसी तरह शर्तें-नियम बने तो 16 मार्च निविदाएं मांगी गई। निविदा खुलने पर लखनऊ की फर्म को कामकाज सौंपा गया। यहीं से विवाद की शुरुआत हो गई।

By: raktim tiwari

Published: 05 Apr 2021, 08:36 AM IST

अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के अफसरों की कारगुजारी सालाना परीक्षा फार्म पर भारी पड़ रही है। फर्मों के आपसी विवाद से मामला जांच तक पहुंच गया है। कुलपति ने एक फर्म की शिकायत पर तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराने का फैसला किया है।

विवि को सत्र 2020-21 की सालाना परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरवाने हैं। अव्वल तो विवि के अफसरों ने निविदा से जुड़ी शर्तों को लेकर अड़ंगे लगाए। किसी तरह शर्तें-नियम बने तो 16 मार्च निविदाएं मांगी गई। निविदा खुलने पर लखनऊ की फर्म को कामकाज सौंपा गया। यहीं से विवाद की शुरुआत हो गई।

दूसरी फर्म ने भेजी शिकायत
लखनऊ की फर्म के कामकाज पर सवालिया निशान लगाते हुए अजमेर की स्थानीय कंप्यूटर फर्म ने कुलपति और प्रशासन को शिकायत भेजी। इसमें कहा गया है, कि लखनऊ की फर्म का कामकाज संतोषजनक नहीं रहा है। खुद महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी बीकानेर ने फर्म के परीक्षात्मक कार्यों के प्रति असहमति जताई थी।

यह भरी है दरें...
परीक्षा फर्मों ने ऑनलाइन फार्म भरने, डाटा तैयारी और अन्य कार्यों के लिए निविदा भरी है। इसमें एक फर्म ने प्रति फार्म करीब 18 रुपए 70 पैसे और दूसरी ने 16 रुपए 70 पैसे में कामकाज करना बताया है।

जटिल नियम, अफसरों की सेटिंग!
परीक्षा फार्म भरवाने के विश्वविद्यालय के नियम बेहद जटिल हैं। अधिकृत जानकारी के अनुसार विवि केवल उन्हीं फर्मों से निविदाएं मांगता है, जिनका अन्य विश्वविद्यालयों मे परीक्षात्मक कार्यों का अनुभव होता है। जबकि राजस्थान लोक सेवा आयोग, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई, आईआईटी, एनआईटी और अन्य संस्थानों के परीक्षात्मक कार्यों करने वाली कई फर्मों को बेहतर अनुभव होता है। दायरा बड़ा करने के बाय विवि अफसर अपनी पसंदीदा फर्मों को ही टेंडर देने के पक्षधर रहते हैं।

यही था रामपाल का खेल..
पिछले साल घूसकांड में फंसे रामपाल सिंह (निलंबित कुलपति) का खेल भी कॉलेज को सम्बद्धता, मनमाने ढंग से परीक्षा केंद्र बनाने और चहेती फर्म को कामकाज सौंपने के इर्द-गिर्द घूमा था। रामपाल ने बरेली की फर्म को नियमों को ताक में रखकर कामकाज सौंप दिया था।


परीक्षा फार्म भरवाने को लेकर फर्मों की शिकायतें मिली हैं। इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। ताकि पारदर्शिता से कामकाज हो।
ओम थानवी, कुलपति मदस विश्वविद्यालय

raktim tiwari Reporting
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