MDSU:चकराया मार्स ऑर्बिटेटेर, जाने कब होगी यहां चहल-पहल...

पूर्व राज्यपाल ने 2017 में किया था भवन का उद्घाटन।

By: raktim tiwari

Published: 08 Oct 2020, 03:48 PM IST

अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में लाखों रुपए से बना मंगलम भवन आबाद होता नहीं दिख रहा। मार्स ऑर्बिटेटर को शायद मंगल गृह पर पानी मिल जाए, लेकिन विवि के मंगलम भवन के ताले खुलने का मुर्हूत नहीं निकल रहा।

विश्वविद्यालय ने बहुउद्देशीय और अत्याधुनिक सुविधाओं युक्त मंगलम भवन बनवाया है। योजना के तहत यहां भारतीय स्टेट बैंक (तब एसबीबीजे), फोटो और फैक्स सुविधा, इंटरनेट, पोस्ट ऑफिस, छोटा केफेटेरिया और विद्यार्थियों के रुकने के लिए प्रतीक्षालय बनाया गया। ताकि एक ही छत के नीचे उनका सारा कामकाज हो जाए। आधुनिक भवन का 1 अगस्त 2017 को दीक्षांत समारोह में आए पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह ने उद्घाटन किया। इसके बाद भवन पर लगे ताले नहीं खुल पाए।

लगती रही फिजूल की अड़चनें
ढाई साल में विश्वविद्यालय स्तर पर फिजूल की अड़चनें लगाई गई। शुरुआत में बैंक और विश्वविद्यालय में किराए को लेकर मामला अटका। इसके बाद हाईटैंशन लाइन और नल-बिजली के कनेक्शन को लेकर बात नहीं बनी। विश्वविद्यालय स्तर पर मामला कहीं ना कहीं अटका रहा।

फर्नीचर बना पर शिफ्टिंग नहीं
घूसकांड में फंसे कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने मंगलम भवन में बैंक शिफ्टिंग में रुचि दिखाई थी। विवि और बैंक प्रबंधन के बीच बातचीत के बाद अड़चनें दूर हुई। बैंक प्रबंधन ने फर्नीचर बनाने का काम शुरू कराया। लेकिन प्रो. सिंह को बीते सितंबर में एसीबी ने रिश्वत राशि के साथ पकड़ लिया तबसे मामला फिर खटाई में चला गया है।

परिसर में कई भवन बदहाल
विश्वविद्यालय की अनदेखी से कई भवन बदहाल हो रहे हैं। जबकि इन्हें बनाने में सरकार, यूजीसी और जनता की गाढ़ी कमाई लगी है। इनमें स्टाफ कॉलोनी के निकट बने परीक्षा नियंत्रक और कुलसचिव के क्वार्टर, शोधार्थियों के लिए बना याज्ञवलक्य भवन और बुक वल्र्ड, डेयरी पार्लर कियोस्क शामिल है। कई विभाग में में एक-एक शिक्षक और 40-50 विद्यार्थी पढ़ते हैं। ऐसे में भवनों की उपयोगिता समझ से परे है।

raktim tiwari Reporting
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