MDSU: दूसरे बैंक में पहुंच गई थी विश्वविद्यालय की राशि, मामले पर पर्दा

raktim tiwari

Updated: 16 Nov 2019, 04:10:00 PM (IST)

Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

अजमेर. महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) बड़े ‘ मामले ’ पर पर्दा डाले बैठा है। यहां एफडीआर की लाखों की राशि राष्ट्रीयकृत (nationalized bank) के बजाय दूसरे बैंक में घूमकर वापस आ गई। लेकिन प्रशासन ने जिम्मेदारों से पूछताछ और जांच तक नहीं बिठाई है।

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विश्वविद्यालय की आय-व्यय, एफडीआर और अन्य कार्य वित्त विभाग (finance dept) देखता है। कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह के कामकाज पर रोक के दौरान लाखों रुपए एफडीआर (FDR) के पेटे अन्य बैंक में ट्रांसफर कर दिए गए। इसके लिए बाकयादा खाता भी खुलवाया गया। लेखा विभाग के कार्मिकों ने नियम विरुद्ध बताते हुए आपत्ति भी जताई। लेकिन उन्हें ज्यादा ब्याज राशि ज्यादा होने का तर्क दिया गया। राशि करीब पांच-छह दिन निजी बैंक के खाते में रही। इसके बाद इसे पुन: विश्वविद्यालय के नियमित खाते में ट्रांसफर (transfer) करा दिया गया।

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केवल सरकारी बैंक अधिकृत

विश्वविद्यालय के एक्ट और नियमानुसार नकद राशि (cash) अथवा एफडीआर (Fie deposit) सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक में रखी जा सकती है। यह नियम प्रबंध मंडल में पारित किया गया है। इससे मिलने वाले ब्याज से प्रशासन प्रतिमाह अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन-भत्ते चुका रहा है।

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कुलपति के बगैर फैसला कैसे?

विवि के एक्ट के अध्याय 8 की धारा 33, 35, 36 और 37 में निधियों, संपत्तियों को लेकर स्पष्ट प्रावधान है। इसके तहत कुलपति (vice chancellor)की अध्यक्षता वाली वित्त समिति ही अहम फैसले लेने में सक्षम है। इसमें सरकार द्वारा नियुक्ति व्यक्ति और वित्त नियंत्रक सदस्य सचिव होते हैं। कुलपति अथवा प्रबंध मंडल की मंजूरी के बगैर वित्तीय मामलों में फैसला नहीं हो सकता है। इसके बावजूद करोड़ों की राशि अन्य बैंक में पहुंचा दी गई।

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विश्वविद्यालय की समस्त निधि-राशि राष्ट्रीयकृत बैंक में रहने का नियम है। इस मामले में हमने कुछ बिंदुओं पर पूछताछ की है। जो भी दोषी होगा कार्रवाई करेंगे।

प्रो. आर. पी. सिंह कुलपति मदस विश्वविद्यालय

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