मास्टर भंवर लाल मेघवाल : चुनाव में हार से कभी नहीं डगमगाए कदम तो जीत से बढ़ता रहा हौंसला

मा. मेघवाल कभी पैराशूट वाले नेता नहीं रहे। उनका आधार पार्टी कार्यकर्ता व आमजन थे। यही वजह रही कि उन्होंने पंचायत समिति प्रधान, सांसद और विधायक का चुनाव लड़ा। इसमें चुनाव जीते तो पराजय का भी सामना करना पड़ा, लेकिन मेघवाल ने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा।

By: suresh bharti

Published: 17 Nov 2020, 06:15 PM IST

अजमेर/चुरू. कांग्रेस संगठन और जनता के बीच गहरी पकड़ रखने वाले पार्टी के दिग्गज नेता भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहे हों,लेकिन उनके राजनीतिक जीवन यात्रा के कई पहलु लोगों के लिए प्रेरणादायी बने रहेंगे। सरकारी शिक्षक पद से त्यागपत्र देकर राजनीति में आने वाले मेघवाल ने शुरू से जमीं से जुड़ी राजनीति की है। वह कभी पैराशूट वाले नेता नहीं रहे।

उनका आधार पार्टी कार्यकर्ता व आमजन थे। यही वजह रही कि उन्होंने पंचायत समिति प्रधान,सांसद और विधायक का चुनाव लड़ा। इसमें चुनाव जीते तो पराजय का भी सामना करना पड़ा, लेकिन मेघवाल ने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा।

यही वजह है कि आज मंत्री मेघवाल निधन के बाद भी लोगों के बीच प्रतिष्ठित हैं। चूरू जिले की राजनीति में कांग्रेस में एक धुरि कहे जाने वाली शख्सियत के निधन से न केवल चूरू जिले में बल्कि प्रदेश में शोक की लहर है।

संघर्ष करते हुए पाया मुकाम

मा. मेघवाल एक ऐसा व्यक्तित्व थे,जिन्होंने शिक्षक की नौकरी छोडक़र राजनीति को अपना कर्मक्षेत्र बनाया और शिखर तक पहुंचकर कांग्रेस सरकार में मंत्री पद तक पहुंचे। भंवरलाल मेघवाल 72 वर्ष के थे। उनका लंबे समय से गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में उपचार चल रहा था। रात जैसे ही उनके निधन का समाचार मिला तो शोक की लहर दौड़ गई। मेघवाल का अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर 2 बजे सुजानगढ़ के चापटिया स्थित श्मशान घाट में किया गया।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पीसीसी अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा ने मेघवाल के निधन पर उनके पुत्र मनोज कुमार से वार्ता कर संवेदना प्रकट की।

पहला चुनाव हारे,दूसरी बार जीते

वर्ष1977 से मेघवाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की है। उन्होंने इस वर्ष पहला चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 1980 के विधानसभा चुनावों में फिर निर्दलीय मैदान में उतरे। उन्होंने कांग्रेस के मोतीलाल आर्य को हराया। इस समय आर्य की जमानत तक जब्त हो गई थी। इस चुनाव में भंवरलाल सहित 25 जनों को कांग्रेस से निष्कासित भी किया गया था।

हार-जीत का रहा संयोग

मंत्री भंवरलाल मेघवाल 1985 में विधायक का चुनाव हारे। इसके बाद 1990 के चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की। फिर 1993 में पराजित हुए। 1998 में जीते। इस समय उन्हें गहलोत सरकार में राज्यमंत्री बनाया गया। 2003 में फिर हारे, 2008 में जीते और शिक्षा मंत्री बने। इसी प्रकार 2013 में भंवरलाल मेघवाल चुनाव हार गए। 2018 में वे फिर चुनाव जीते। उन्हें गहलोत सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री बना गया।

प्रधान भी रह चुके हैं

मास्टर भंवरलाल मेघवाल 1995 से 1998 तक सुजानगढ़ पंचायत समिति में प्रधान भी रह चुके हैं। मेघवाल राजनीति में आने से पहले शिक्षक थे। जो नयाबास स्थित राजकीय झंवर उच्च प्राथमिक विद्यालय में पीटीआई के पद पर कार्यरत रहे। इसलिए इनको मास्टर भंवरलाल मेघवाल के नाम से पुकारा जाता है। वह आज राजस्थान की राजनीति में मास्टरजी के रूप में पहचान बनाए हुए थे। अभी वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर थे।

ग्रामीण पृष्ठ भूमि

मास्ïटर भंवरलाल का जन्म तहसील के गांव बाघसरा पूर्वी (ग्राम पंचायत शोभासर) में चुनाराम मेघवाल-रुकमणी देवी के घर 19 नवम्बर 1947 को हुआ। उनकी शुरुआती शिक्षा पास के गांव खींचीवाला से हुई। इतिहास में एमए तक उन्होंने शिक्षा ग्रहण की।

1972 से होने वाली थी राजनीति की शुरुआत पर...

वरिष्ठ व वयोवृद्ध कांग्रेसी बाबूलाल दुगड़ के अनुसार भंवरलाल को सन् 1972 के विधानसभा चुनाव विधायक रहे फूलचन्द जैन ने छापर से चुनाव लड़ाने की फैसला किया था, लेकिन निर्धारित उम्र से दो माह कम होने से चुनाव नहीं लड़ सके। उन्होंने बताया कि 1970-71 में भंवरलाल ने पूर्वी क्षेत्र के गांवों में कांग्रेस संगठन से बिना जुड़े ही कार्य किया था।

दबंग नेता जैसी धाक

क्षेत्र ही नहीं, अपितु प्रदेश में भंवरलाल की प्रतिष्ठा व धाक एक दबंग व मुंह पर खरी खरी बात कहने वाली थी। इसलिए कई बार विवादों से भी घिरे रहे है। सुजानगढ़ क्षेत्र में ऐसा कोई गांव या ढाणी नहीं है,जहां के 10-20 लोगों को नाम से न जानते हों। इसलिए कई बार उन लोगों को सार्वजनिक बैठकों में नाम लेकर पुकारते थे। भंवरलाल की इस मजबूत पकड़ के सामने विपक्षी नेता लगातार टक्कर नहीं दे पाए। भंवरलाल के दो पुत्रियां व एक पुत्र है, जिनमें से बड़ी पुत्री व पूर्व जिला प्रमुख डॉ. बनारसी मेघवाल का निधन अक्टूबर माह 2020 में हो गया। काबीना मंत्री भंवरलाल की जयपुर में तबीयत बिगडऩे पर 13 मई 2020 को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

हमेशा सरकार के साथ रहे

- मेघवाल 1998 से 2001 तक ग्रामीण विकास एंव पंचायत राज व जेल मंत्री रहे।

— इसके बाद मेघवाल 2002 से 2003 तक इन्दिरा गांधी नहर राज्य मंत्री रहे।

— मेघवाल गहलोत सरकार में 2008 से लेकर 2011 तक शिक्षा श्रम एवं नियोजन मंत्री रहे।

— 2013 का कांग्रेस पार्टी से चुनाव हारने के बाद मेघवाल को पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने पार्टी मेंवरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया।

पार्टी के आदेश पर लड़ा था लोकसभा चुनाव

जानकारी के अनुसार मेघवाल ने 2014 लोकसभा चुनावों में गंगानगर से चुनाव लड़ा था, लेकिन मोदी लहर में वे हार गए थे। मेघवाल ने पार्टी के आदेश पर यह चुनाव लड़ा था।

suresh bharti Desk
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