Mother's Day 2021: अपनों को बिसराए कई मोर्चों पर डटी हैं माएं. . .

उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है वह उसे घर के साथ बाहर भी बखूबी निभा रही हैं। बस कोरोना काल में थोड़ी सतर्कता ज्यादा बरतनी पड़ रही है।

By: manish Singh

Published: 09 May 2021, 08:57 AM IST

मनीष कुमार सिंह/अजमेर.

कोरोना के फैलते संक्रमण में जब हम सब घरों में सुरक्षित हैं वहीं कुछ माताएं अपने बच्चों को दूसरों के भरोसे छोड़ आमजन की सुरक्षा में दिन-रात सड़क-चौराहों पर डटी हुई हैं। जब उनसे पूछा गया कि कोरोना संक्रमण से डर नहीं लगता है तो जवाब मिला. . .खाकी पहनने के बाद डर किसका. . । उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है वह उसे घर के साथ बाहर भी बखूबी निभा रही हैं। बस कोरोना काल में थोड़ी सतर्कता ज्यादा बरतनी पड़ रही है। अजमेर जिले में विभिन्न स्थानों पर अपना दायित्व निभा रही पुलिस अधिकारी व महिला कांस्टेबल ने राजस्थान पत्रिका से साझा की अपनी सोच. . .।

मंजू मलेवा: कोरोना काल में बॉर्डर की कमान
जिले के बॉर्डर थाने की बागडोर संभाल रहीं निरीक्षक मंजू मुलेवा दो जुड़वां सहित तीन बच्चों की मां हैं। तीनों बच्चों की देखभाल के साथ मंजू मुलेवा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित बॉर्डर के थाने की कमान भी बखुबी संभाल रही हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में यह जिम्मेदारी दोहरी हो जाती है। जब बॉर्डर से आने वाले लोगों पर भी निगरानी रखनी पड़ती है। कई मर्तबा पलायन करने वाले श्रमिकों से दो-चार होना पड़ता है। खुद समेत थाने के स्टाफ को संक्रमण से सुरक्षित रखते हुए व्यवस्था बनाना चुनौतीपूर्ण रहता है।

सुनीता गुर्जर: जुड़वा बच्चे घर पर, बाहर बेइंतहा काम

शहर में अलवर गेट थाने की कमान संभाल रही निरीक्षक सुनिता गुर्जर कोरोना काल में दो जुड़वां बच्चों की देखभाल के साथ नाकाबंदी, फिक्स पिकेट्स चैकिंग, बाजार बंद कराना, लोगों से समझाइश, भामाशाह के साथ मास्क वितरण का भी काम कर रही हैं। रेड अलर्ट जन अनुशासन पखवाड़े में शराब के ठेकों पर निगाह रखना चुनौतीपूर्ण होता है। शराब तस्करों पर निगरानी व कार्रवाई भी करनी पडती है। इन सबके बीच बच्चों की देखभाल भी करनी होती है। घर पहुंचने पर नहाने तक उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए कई बार कमरे में बंद तक करना पड़ता है।

गीता गुर्जर: बेटे आधीरात तक करते हैं इंतजार

सिविल लाइंस थाने में तैनात हैडकांस्टेबल गीता गुर्जर केन्द्रीय बस स्टैंड के बाहर शाम 4 से रात 12 बजे तक ड्यूटी दे रही हैं। जयपुर की ओर से आने वाले बाहरी लोगों से पूछताछ करके ही शहर में प्रवेश दिया जाता है। अधिकांश वाहनों में संक्रमित मरीज होते हैं। ऐसे में सतर्कता रखते हुए बातचीत, नाम, पते का भी इन्द्राज करना होता है। रात 12 बजे घर पहुंचने तक बेटा सुजीत व बेटी वर्षा इंतजार करते हैं। खुद को संक्रमण मुक्त करने के बाद उनके पास बैठ पाती हूं व खाना खाते हैं। खाकी पहन ली तो फिर किस बात का डर।

सरोज: ड्यूटी के बाद दुधमुंहे की देखभाल

क्रिश्चियन गंज थाने में तैनात महिला कांस्टेबल सरोज आनासागर पुरानी चौपाटी स्थित फिक्स पिकेट पर दोपहर 1 बजे से रात 9 बजे तक ड्यूटी पर मुस्तैद रहती हैं। इस दौरान बेवजह बाहर निकलने वालों को रोकना, पूछताछ और उनसे समझाइश करनी होती है। ड्यूटी के बाद 14 माह के यश और उससे बड़े गर्विश की सार-संभाल की जिम्मेदारी भी निभाती हूं। हालांकि मौजूदा हालात में थोड़ी ज्यादा सतर्कता बरतनी पड़ती है। घर जाते ही खुद को संक्रमण मुक्त कर फिर बच्चों को समय देती हूं।

manish Singh Reporting
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