बाबा रामदेव जी के भण्डारे में घुली समरसता की मिठास , केवल अजमेर में दिखता है ये कौमी एकता का नजारा

बाबा रामदेव जी के भण्डारे में घुली समरसता की मिठास , केवल अजमेर में दिखता है ये कौमी एकता का नजारा

Sonam Ranawat | Publish: Sep, 05 2018 08:07:45 PM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

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अजमेर. भादवे का महीना आते ही बाबा रामदेव के जाने वाले लोगों की श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है। भक्तों की सुविधा के लिए पूरे रास्ते जगह-जगह भण्डारे लगे है। हजारों लोग भण्डारों में भोजन करते है। इनकी सेवा के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते है। युवा भी जाति-धर्म से ऊपर उठकर भण्डारों में सेवाएं दे रहे है। इनमें मुस्लिम भी शामिल है। पूरे महीने नि:स्वार्थ भाव से जातरूओं की सेवा करते है।


सलीम एक फैक्ट्री में काम करता है। शाम को अपने काम से छूट कर सीधा। हरिभाऊ उपाध्याय नगर के बाहर लगे भण्डारे में पहुंच जाता है। शाम से देर रात तक भण्डारे में आने वाले जातरूओं की सेवा करता है। रात को भण्डारे में ही सो जाता है।

 

सुबह उठकर फिर से जातरूओं की सेवा करता है। चाय-नाश्ता कराकर ही घर जाता है। पिछले दो साल से भादवे के महीने में सलीम की यही दिनचर्या है। वह पूरे मन से इसका पालन करता है। कुछ ऐसा ही हाल फारूख का है वह भण्डारे में आने वाले लोगों को खाना तो खिलाता ही है। जरूरत पडऩे पर सेवा भाव बर्तन उठा लेता है। दोनो बाबा के भजन सुनते-सुनते काम कर लेते है।

 

बाबूलाल शर्मा ने बताया कि भण्डार में जातरूओं के लिए भोजन, नाश्ता, मेडिकल शौचालय सहित सभी सुविधाएं मौजूद है। यहां रोज करीब 8 हजार से ज्यादा लोग आते है। भण्डारे की विधिवत शुरूआत सुबह 6 बजे हो जाती है। जो देर रात तक चलता है। वैसे भण्डारों में किसी भी समय जातरू आ जाए तो उसे लौटाया नहीं जाता।


दिल को मिलती है तसल्ली

मुझे यहां सेवा करना बहुत अच्छा लगता है दिल को तसल्ली मिलती है कि मैने आज कुछ किया है। क्योंकि मानव सेवा ही परम धर्म है।
सलीम

लोगों को खाना खिलाना उनकी आवभगत करना अच्छा लगता है। खास तौर पर बुजुर्गों के लिए कुछ करना बहुत सुकून देता है।

फारूख

भण्डारा 10 साल से लगाया जा रहा है। वैसे तो भण्डारा 24 घंटे ही चलता है। लेकिन विधिवत रूप से सुबह 6 बजे से शुरू हो जाती है। अलग-अलग समय पर करीब 600 से ज्यादा लोग सेवा करते है। सब अपनी-अपनी भागीदारी निभाते है। इनमें कई समुदायों और धर्मों के लोग है।

कुंदन वैष्णव

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