NETWORK : घर में घुसो तो नेटवर्क ‘आउट’ !

शहर के अधिकांश क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क रहता है बाधित

वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज वाले सबसे ज्यादा परेशान
निजी कम्पनियों के फाइबर से भी नहीं हो रहा समस्या का समाधान

 

By: himanshu dhawal

Published: 02 Sep 2020, 05:30 PM IST

हिमांशु धवल

अजमेर. शहर में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब है। हालत यह है कि घर में घुसते ही नेटवर्क आउट हो जाता है। ऐसे में कभी छत पर, तो कभी घर के बाहर आकर बात करनी पड़ती है। जरूरी वार्तालाप के दौरान अक्सर आवाज आनी-जानी बंद हो जाती है अथवा कॉल स्वत: ही ड्रॉप हो जाता है। वर्क फ्रॉम होम और छात्र-छात्राओं की ऑन लाइन क्लासेज के कारण ऐसा होना बड़ी परेशानी बन गया है। इससे निजात पाने के लिए वैकल्पिक रूप से ऑप्टीकल फाइबर केबल लगवाए जाने के बावजूद कंपनियों द्वारा दावा की जा रही नेट स्पीड नहीं मिल रही। कई उपभोक्ता इसे फाइबर केबल कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए खुद कम्पनियों की ओर से ही मोबाइल नेटवर्क को बाधित करने की कोशिश बताते हैं।
जरूरत बन गया फास्ट नेटवर्क

कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के बाद से भी वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज का पैटर्न यकायक बढ़ा है। तीसरी कक्षा से लेकर कॉलेज तक की ऑनलाइन क्लासेज संचालित हो रही हैं। स्कूलों में क्वार्टरली परीक्षा ऑनलाइन चल रही है। सरकारी और निजी कम्पनी के कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम पर हैं। इससे मोबाइल डाटा की डिमांड बढ़ गई है।
ऑप्टीकल फाइबर केबल का बिछ रहा जाल

शहर में हर जगह ऑप्टीकल फाइबर केबल का जाल बिछ गया है। पहले बेसिक फोन और ब्रॉडबैंड आदि में तांबे के तार का उपयोग होता था। लेकिन इसकी स्पीड 8 एमबीपीएस तक होती थी। इसे बढ़ाने पर अवरोध अधिक आते थे। पिछले कुछ वर्षों से सभी कम्पनियां ऑप्टीकल फाइबर तकनीक का उपयोग कर रही हैं। इससे 100 एमबीपीएस तक की स्पीड मिलने लगी है। जिससे इसका चलन बढऩे लगा है।
फैक्ट फाइल

- 7 लाख की अजमेर की आबादी

- 9-10 लाख के करीब मोबाइल सिम का उपयोग

- 4 मोबाइल कम्पनियों के सर्वाधिक कनेक्शन
छत पर ले जाना पड़ता है लैपटॉप

यूक्रेन से एमबीबीएस कर रहा हूं। वर्तमान में फाइनल ईयर का स्टूडेंट हूं। मैंने सभी मोबाइल नेटवर्क ट्राई कर लिए हैें। सबकी एक जैसी ही स्थिति है। मोबाइल पर बात करते समय कॉल डिसकनेक्ट हो जाता है। डाउनलोडिंग हो नहीं पाती। ऑनलाइन क्लासेज चल रही हैं। क्लास के बीच में नेटवर्क चले जाने पर लैपटॉप को छत पर ले जाना पड़ता है। यहां भी काफी परेशानी होती है।
- रितिक सांखला, क्रिश्चियनगंज निवासी

किराए पर लेना पड़ा रूम
घर के अंदर फोन लगता ही नहीं है। कॉलेज की ऑनलाइन क्लासेज चल रही हैं। इसके लिए घर से दो किलोमीटर दूर रिश्तेदार के यहां जाना पड़ता था । पापा का भी वर्क फ्रॉम होम चालू हो गया है। अब पड़ोस में ही छत पर बना कमरा किराए पर लिया है। जहां पर अपना ऑनलाइन काम करते हैं। मोबाइल पर बात करने के लिए घर के बाहर अथवा छत पर आना पड़ता है।

- साक्षी किशनानी, अजयनगर

ऑप्टीकल फाइबर भी कारगर नहीं
मोबाइल नेटवर्क की समस्या के समाधान के लिए गत दिनों निजी कम्पनी का ऑप्टीकल फाइबर केबल लगवाया है। इसमें कम्पनी 100 एमबीपीएस की स्पीड का दावा कर रही थी। लेकिन ट्राई माई स्पीड से नेटवर्क जांचा तो बमुश्किल 60-70 एमबीपीएस आ रही है। बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज और कम्पनी के काम घर से ही करना पड़ता है। इसके कारण परेशानी बढ़ गई है।

- प्रतीक सैनी, प्रगति नगर कोटड़ा

himanshu dhawal Reporting
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