New education policy: विद्यार्थियों की निखरेगी कौशल और प्रायोगिक क्षमता

नई शिक्षा नीति से होगा सर्वांगीण विकास। विद्यार्थियों को मिलेंगे विभिन्न क्षेत्रों में पढऩे के विकल्प।

By: raktim tiwari

Updated: 01 Aug 2020, 07:22 AM IST

अजमेर.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से विद्यार्थियों की कौशल और प्रायोगिक क्षमता का विकास होगा। विद्यार्थियों को विविध विषयों के आधार पर कई क्षेत्रों में पढऩे और रोजगार के विकल्प मिलेंगे। यह विचार विभिन्न स्कूल प्राचार्यों ने राजस्थान पत्रिका के साथ बातचीत के दौरान साझा किए।

रटने की प्रवृत्ति से छुटकारा
नई शिक्षा नीति में प्रेक्टिकल नॉलेज पर सर्वाधिक जोर है। यह मौजूदा रटने की प्रवृत्ति से छुटकारा दिलाएगी। विद्यार्थियों को विविध विषय पढऩे को मिलेंगे। मस्तिष से पढ़ाई का मानसिक दबाव कम होगा। प्रायोगिक ज्ञान, कौशल और रचनात्मक अध्ययन प्रणाली से छात्र-छात्राओं का सर्वांगीण विकास होगा।

नीरू पाठक, प्राचार्य डीपीएस

विविध विषय पढऩे का अवसर
नई शिक्षा नीति में प्री-प्राइमरी से बारहवीं कक्षा तक रोडमैप दिया गया है। दूसरी कक्षा तक बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान, अनुशासन, खेलकूद सीखने को मिलेगा। तीसरी से पांचवीं और बारहवीं तक प्रायोगिक आधारित शिक्षण होगा। अभी विज्ञान, कला या वाणिज्य के विद्यार्थी परस्पर संगीत, भूगोल या इतिहास नहीं पढ़ सकते हैं। अब विद्यार्थियों को विविध विषय पढऩे का अवसर मिलेगा। व्यावसायिक और कौशल आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों को उनके अभिरुचि अनुसार तैयार किया जा सकेगा। इससे भविष्य में उन्हें बेहतर रोजगार मिल सकेंगे।

अजयसिंह राजपूत, प्राचार्य सेंट्रल एकेडमी

घटेगा मानसिक दबाव
नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के लिए तनाव और दबाव मुक्त रहेगी। कई रचनात्मक और स्किल आधारित पाठ्यक्रम और शिक्षण नवाचार होंगे। हमने स्कूल में एक कोर समूह बनाया है। यह शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और अन्य बिंदुओं पर नियमित चर्चा करेगा।

कर्नल ए.के.त्यागी प्राचार्य संस्कृति द स्कूल

विद्यार्थी बन सकेंगे ग्लोबल नागरिक

नई शिक्षा नीति कई मायने में विद्यार्थियों को ग्लोबल नागरिक बना सकेगी। मातृभाषा में शिक्षण से विद्यार्थियों की पढ़ाई में अभिरुचि बढ़ेगी। केवल विज्ञान, कला या वाणिज्य संकाय के बजाय इंटर डिस्पलेनेरी विषय पढ़ सकेंगे। अनुशासन, सामाजिक मूल्यों, खेलकूद, साहित्य, प्रायोगिक अभिरुचियों का भी मूल्यांकन होगा। क्लस्टर प्रणाली से निजी और सरकारी स्कूल एकदूसरे के संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। भारतीय मूल्यों एवं संस्कृति को विद्यार्थी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

राजेंद्र शर्मा, प्राचार्य सम्राट पब्लिक स्कूल

भारत में रहकर पढऩे का अवसर

मातृभाषा में शिक्षा से विद्यार्थियों को अंग्रेजी के साथ-साथ अन्य भाषाएं पढऩे का अवसर मिलेगा। विदेशी विश्वविद्यालय आएंगे तो बाहर जाने वाले विद्यार्थी भारत में रहकर पढ़ सकेंगे। केवल तीन संकायों के बजाय विद्यार्थी पसंदीदा विषय चुनकर पढ़ाई करेंगे। कौशल के अनुसार डिग्री या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकेंगे। नई शिक्षा नीति से सर्वांगीण विकास और प्रायोगिक शिक्षण पद्धति पर जोर रहेगा।

जया कुमार, प्राचार्य ऑल सेंट्स स्कूल

raktim tiwari Reporting
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