झलक दिखाकर फिर भाग गया भालू

ढाणी पुरोहितान गांव में सामने आई थी भालू की मूवमेंट, वन विभाग और ग्रामीण कर रहे है रात्रि गश्त, अब तक ना भालू मिला और ना पगमार्ग, पथरीला इलाका होने से नहीं मिल पा रहे पैरों के निशान

By: dinesh sharma

Published: 28 Nov 2020, 01:47 AM IST

मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर).

क्षेत्र में एक बार फिर भालू झलक दिखाकर गायब हो गया है। भालू की मूवमेंट को लेकर जहां ग्रामीण भयभीत हैं, वहीं वन विभाग के कर्मचारी दिनभर निगरानी के अलावा रात्रि गश्त भी कर रहे हैं। इसके बावजूद ना भालू के पगमार्क मिल सके हैं और ना ही भालू का मल ही नजर आया है, जिससे यह पता चल सके कि भालू यहीं कहीं मौजूद है और उसकी अब भी यहां आवाजाही है। क्षेत्र में गत दो महीने में दो बार भालू ग्रामीणों को नजर आया है, लेकिन वन विभाग की पकड़ से अब भी दूर है।

ऐसे में अब किशनगढ़ रेंज के बड़ामाला वन खंड और ढाणी पुरोहितान के बीच भालू के मूवमेंट को लेकर वन विभाग ने फिलहाल दो-तीन दिन और निगरानी एवं रात्रि गश्त जारी रखने का निर्णय किया है। वन विभाग भालू की मौजूदगी को लेकर खासी सजगता बरत रहा है और किसी भी सूरत में कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। यही वजह है कि वन विभाग वनकर्मियों और वन सुरक्षा समिति सदस्यों के माध्यम से वन क्षेत्रों में भालू को ढूंढने के लिए नियमित निगरानी और रात्रि गश्त फिलहाल जारी रखने का निर्णय किया गया है।


ढाणी पुरोहितान के खेतों में 21 सितम्बर की मध्यरात्रि को भी भालू देखा गया था। गांव के किसान छोटूसिंह रावत ने प्याज के खेतों में भालू के आने और क्यारियां तोडऩे के साथ ही प्याज की भरे कट्टे फाडऩे एवं बकरियों पर भी हमला करने की जानकारी दी थी। इसके बाद ढाणी पुरोहितान गांव और देवमंड गांव की सरहदों के बीच तालाब के किनारे स्थित एक खेत के पास 19 नवम्बर की मध्यरात्रि भालू घुमता नजर आया।

खेत मालिक किशनसिंह रावत को यह भालू कंटीले तारों के नीचे से खेत में घुसने की कोशिश करता नजर आया। हालांकि कंटीले तारों में फंसने की वजह से और किसान किशन सिंह रावत के टॉर्च से रोशनी करने पर भालू भाग गया। इसके बाद 20 नवम्बर से ही ढाणी पुरोहितान से सटे बड़ा माला वन क्षेत्र एवं पातलिया और उदयपुर कलां वन क्षेत्रों में नियमित रूप से निगरानी और रात्रि गश्त की जा रही है। इन वन क्षेत्रों में वनकर्मियों के साथ ही वन सुरक्षा समिति के सदस्यों के सहयोग से यह निगरानी और रात्रि गश्त की जा रही है। हालांकि इसके बाद से दोबारा ना तो भालू दिखा है और ना ही उसके पैरों के निशान मिले हैं।

किशनगढ़ के क्षेत्रीय वन अधिकारी नरेन्द्र चौधरी ने बताया कि फिलहाल वन क्षेत्र में कहीं भी भालू या उसके पैरों के निशान और ना ही कहीं मल मिला है। ऐतिहातन और बतौर सतर्कता के लिए फिलहाल दो तीन दिन और क्षेत्र में निगरानी और रात्रि गश्त की जाएगी।

dinesh sharma
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