ओडीएफ का दावा : जबकि शौचालय बने कबाड़घर!

कहीं कृषि संबंधी कामान रखा तो कहीं घरेलू सामान रखने की बनाई ठौर, अभी भी कइयों की खुले में शौच की नहीं बदली प्रवृत्ति

By: CP

Published: 08 Dec 2019, 11:02 AM IST

चन्द्र प्रकाश जोशी
अजमेर. स्वच्छ भारत मिशन के तहत केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर घरों में शौचालय बनवाए। अजमेर की लगभग सभी 282 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित भी कर दिया गया। मगर अभी भी कई ग्रामीणों की मानसिकता में बदलाव नहीं आया है। घर-घर में बनाए गए शौचालय कई लोग कबाड़घर के रूप में काम ले रहे हैं। कहीं कृषि संबंधी सामान तो कहीं घरेलू कबाड़ भर रखे हैं।

अजमेर जिले को प्रशासन एवं सरकार की ओर से खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया। जिन घरों में शौचालय नहीं थे उनमें ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सरकारी मद से शौचालयों का निर्माण करवा दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतीराज जिला परिषद की ओर से ग्राम पंचायतों के माध्यम से शौचालयों का निर्माण करवाया गया।
मगर जब हकीकत जानने के लिए पत्रिका ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। कई घरों में लोगों ने शौचालय तो बनवा दिए मगर यह शौच के उपयोग में नहीं लिए जा रहे हैं। इन घरों की आबादी खुले में शौच के लिए जंगलों का रुख कर रही है।

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केस : 1

घूघरा स्थित एक मकान में सरकारी खर्चे से बने शौचालय में मवेशियों के खाने के लिए खाखला भर रखा है। निर्माण के बाद से इसे उपयोग में नहीं लिया गया है।
केस : 2

गगवाना में सरकारी खर्चे पर बनाए शौचालय में घरेलू कबाड़ पड़ा हुआ है।
केस : 3

घूघरा नाचन बावड़ी स्थित एक घर में सरकारी खर्चे से शौचालय बना तो दिया मगर परिवार वाले शौचालय के बजाय बाहर खुले में शौच के लिए जा रहे हैं।

मानसिकता बदलने की जरूरत

स्वच्छ भारत मिशन के प्रति अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की आवश्यकता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। खुले में शौच के दुष्प्रभाव, स्वास्थ्य को नुकसान आदि की जानकारी दिए जाने की आवश्यकता है।

सख्ती, जुर्माना के साथ उठाएं ये कदम

-ग्राम पंचायतें निर्माणाधीन शौचालयों का भौतिक सत्यापन करवाए।
-शौचालयों के उपयोग संबंधी जानकारी लें।

-पंचायतों की ओर से खुले में शौच करने पर जुर्माना वसूला जाए।
-आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से वार्डवार मीटिंग की जाए।

कार्रवाई के नाम सिर्फ मोटवेशन

पंचायतीराज विभाग के पास कार्रवाई के नाम पर सिर्फ मोटवेशन करना ही है। आमजन को प्रेरित करने के अलावा कोई अधिकार नहीं है।

इनका कहना है

282 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित किया गया है। लोगों को समझाइश कर ही शौचालय बनवाए हैं। इन्हें बताया गया कि खुले में शौच से बीमारियां होती है, देश का भी संकल्प है स्वच्छ भारत हो। अगर कोई शौचालय का उपयोग नहीं कर रहे हैं तो समझाइश की जाएगी। एक बार फिर अभियान चलाया जाएगा।

-गजेन्द्र सिंह राठौड़, सीईओ जिला परिषद अजमेर

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