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वृद्धाश्रम : सरकारी नियंत्रण की बजाए निजी क्षेत्र को सौंपने का विरोध,कड़ी पाबंदियां व कम सुविधाए नामंजूर

पुष्कर स्थित आश्रम के वृद्धजन तो इतने मुखर है कि उन्होंने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा दिया कि वह वृद्धाश्रम का संचालन नहीं कर पा रही तो राज्य की सरकार कैसे चलाएंगी। पुष्कर का एकमात्र सरकारी वृद्धाश्रय राज्य सरकार को बोझ लग रहा है।

अजमेर

Updated: July 18, 2021 12:28:40 am

अजमेर/पुष्कर. उम्र के अंतिम पड़ाव में भी कड़ी पाबंदियां रहेंगी तो चैन से नहीं जी पाएंगे। पारिवारिक परिस्थितियां विपरीत होने व अकेला होने की वजह से ही तो वृद्धाश्रम में पनाह ली है। एकांतवास, हंसी-ठहाके व मनोरंजन व अच्छी खुराक समेत अन्य सुविधाएं निजी संस्थाओं में संभव नहीं है। सरकार की ओर से संचालित वृद्धाश्रम विश् वसनीय,अधिक सुविधाजनक और स्कून देने वाले हैं। यह कहना है पुष्कर में संचालित एकमात्र वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों का। उनकी पीड़ा तब झलक पड़ी जब यहां का वृद्धाश्रम अपना घर संस्था को सौंप दिया। इससे नाराज दो वद्धजन ने तो आश्रम ही छोड़ दिया।
वृद्धाश्रम : सरकारी नियंत्रण की बजाए निजी क्षेत्र को सौंपने का विरोध,कड़ी पाबंदियां व कम सुविधाए नामंजूर
वृद्धाश्रम : सरकारी नियंत्रण की बजाए निजी क्षेत्र को सौंपने का विरोध,कड़ी पाबंदियां व कम सुविधाए नामंजूर
जेलखाने में कैद कर दिया...

पुष्कर स्थित आश्रम के वृद्धजन तो इतने मुखर है कि उन्होंने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा दिया कि वह वृद्धाश्रम का संचालन नहीं कर पा रही तो राज्य की सरकार कैसे चलाएंगी। पुष्कर का एकमात्र सरकारी वृद्धाश्रय राज्य सरकार को बोझ लग रहा है। कांग्रेस सरकार ने वृद्धजन को जेलखाने में कैद कर दिया है। अब तो इच्छा मृत्यु की दवाई ही विकल्प है,ताकि इस जीवन से मुक्ति मिल जाए।
निजीकरण का विरोध

प्रदेश में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधीन संचालित जामडोली एवं पुष्कर के सरकारी वृद्धाश्रमों की व्यवस्थाएं 15 जुलाई से अपना घर संस्था को सौंपे दी गई। इसे लेकर पुष्कर स्थित वृद्धाश्रम वृद्धजन में काफी नाराजगी है। दो वृद्ध तो आश्रम छोडक़र भी चले गए, वहीं तीन बुजुर्गो कोलोहागल रोड पर संचालित अपना घर में इलाज के लिए ले जाया गया है। हालत यह है कि वृद्धाश्रय के १२ में से मात्र ७ वृद्ध शेष रहे हैं।
सीधी सहायता पर पाबंदी

वृद्ध अजय बाबा बंगाली ने कहा कि वह तो इच्छा मृत्यु चाहते हैं। हम आराम से जी रहे थे। कोई तकलीफ नहीं थी। नई व्यवस्था से बाहर जाने, आमजन से मिलने तथा भामाशाहे से मिलने वाली सीधी सहायता पर पाबंदी लगा दी गई है। कांगे्रस सरकार वृद्धाश्रम नहीं चला सकती। निजीकरण कर हमें कैद कर दिया है। राज्य की कांग्रेस सरकार वृद्धाश्रम चलाने में सक्षम नहीं है।
छीन रहे स्वतंत्रता

वृद्ध लालचंद ने कहा कि भामाशाह से हाथ खर्चे के रुपए मिल जाते थे। अब वह बंद करने की बात कह रहे हैं। हमारी स्वतंत्रता छीनी जा रही है। बाहर जाने, किसी से मिलने, नकद सहायता लेने पर पाबंदी लगाई जा रही है। ऐसा रहा तो हम आश्रम छोड़ देंगे।
आरोप गलत

दूसरी ओर भगवान स्वरूप, कार्यालय प्रभारी अपना घर संस्था अजमेर का कहना है कि वृद्धावस्था पेंशन वृद्धों को ही मिलेगी। हमने कोई पाबन्दियां नहीं लगाई हैं। निजी संस्थानों, भामाशाहों से प्राप्त मदद रसीद देकर ली जाएगी। वृद्धजन को कैद करने के आरोप गलत हैं।

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