mythology: खुद ब्रह्माजी ने बनाया था यह सरोवर, अब एक-एक बूंद को तलाश रहे लोग

mythology: खुद ब्रह्माजी ने बनाया था यह सरोवर, अब एक-एक बूंद को तलाश रहे लोग

raktim tiwari | Publish: May, 18 2018 09:27:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

बरसाती पानी की सीधी आवक तय करने के लिए करीब 6 किलोमीटर लम्बा सीमेन्ट का फीडर बनाया जा चुका है।

महावीर भट्ट/पुष्कर।

कभी अजमेर में रेलवे को सालों तक पानी पिलाने वाले बूढ़ा पुष्कर सरोवर को अब लबालब भरने का इंतजार है। इस सरोवर के पाताल तोड़ कुओं का जलस्तर लगभग समाप्त हो गया है। यही कारण है कि बूढ़ा पुष्कर आज इन्द्रदेव की मेहरबानी के लिए मोहताज दिख रहा है।

हालांकि सरकारी स्तर पर करीब 12 करोड़ से ज्यादा राशि खर्च कर ब्रह्मा का यह पवित्र रुद्र पुष्कर विभिन्न समाजों की ओर से बनाए गए 11 घाटों से सजा व हरीतिमा से आच्छादित होकर धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। लेकिन यहां स्नान दर्शन को आने वाले श्रद्धालु मायूस लौटते दिखाई पड़ते हैं।

छह किमी लंबा फीडर

भाजपा राज में वर्ष 2006 में राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत ने इस प्राचीन तीर्थ का संरक्षण करने को लेकर जन आंदोलन चलाकर जन सहभागिता से इसका विकास कराया गया था। सरोवर के चारों ओर विभिन्न समाजों के 11 घाट हैं। सीढिय़ां बनाई गई हैं। इसमें निकटवती पहाडिय़ों से बरसाती पानी की सीधी आवक तय करने के लिए करीब 6 किलोमीटर लम्बा सीमेन्ट का फीडर बनाया जा चुका है।

जल सुखाकर मध्य भाग की सफाई
बरसात नहीं आने पर श्रद्धालुओं की भावना को दृष्टिगत रखते हुए सरोवर के मध्य भाग को पक्का कराने का काम शुरू किया गया था, लेकिन बरसात का पानी आने से यह काम अधूरा रह गया था। सिंचाई विभाग की ओर से एक बार फिर सरोवर के मध्य भाग की साफ-सफाई कराई जा रही है। सरोवर में एक ट्यूबवैल भी खुदवाया जा चुका है, लेकिन बरसाती पानी की आवक होने पर ही इस प्राकृतिक तीर्थ की महिमा में चार चांद लग सकेंगे। वर्तमान में बूढ़ा पुष्कर सरोवर जलाभाव के कारण सूखा दिखने लगा है। इसके किनारे बने कुंडों में भरा जल गंदगी से अटा है।

उत्पत्ति पर एक नजर

पदम पुराण की कथा पर नजर डालें तो जगतपिता ब्रह्मा ने उसके पुत्रों को मारने वाले वज्रनाभ नामक राक्षस का वध करने के लिए कमलपुष्प रूपी अस्त्र फेंका था। इसके तीन स्थानों से गिरने पर जलधाराएं बह निकलीं तथा त्रि-पुष्कर की उत्पत्ति हुई थी। इनमें कनिष्क यानी बूढ़ा पुष्कर सरोवर भी था। इस तीर्थ की खास बात तो यह रही कि बादलों की गर्जन के साथ ही इस तीर्थ में पाताल तोड़ कुओं के माध्यम से अथाह जल निकलता था। करीब 100 वर्षों तक रेलवे ने प्रतिदिन चार हॉर्स पावर की मशीनों से लगातार जलदोहन किया। लेकिन बूढ़ा पुष्कर सरोवर में जल की कभी कमी नहीं आई।

बूढ़ा पुष्कर सरोवर के आंशिक मध्य भाग को एक्सपर्ट की राय पर पक्का कराया गया था। काम चलने के दौरान बरसात होने से काम पूरा नहीं हो सका। अभी मध्य भाग का जल सुखाकर सफाई कराई जा रही है तथा हमेशा जल बनाए रखने को लेकर ट्यूबवैल भी लगाया जा चुका है। बरसाती जल की आवक के लिए पक्की फीडर बनाई गई है।

-ओंकार सिंह लखावत, अध्यक्ष राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण

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