मानसून कमजोर का नतीजा : बीसलपुर बांध में रोज घट रहा एक सेंटीमीटर पानी

गेज 313.49 आरएल मीटर पर स्थिर, त्रिवेणी का गेज 1.10 मीटर दर्ज

 

By: baljeet singh

Updated: 20 Sep 2020, 11:51 PM IST

अजमेर. बीसलपुर बांध के जलभराव में सहायक व कैचमेंट क्षेत्र में पडऩे वाले भीलवाड़ा व चित्तौडगढ़़ सहित राजसंमद जिलों इस वर्ष मानसून की कमी के चलते बीसलपुर बांध में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हुई। इससे बांध पूर्ण जलभराव से दो मीटर दूर रह गया है। वहीं बांध का गेज अब वापस जलापूर्ति के साथ ही वाष्पीकरण व अन्य खर्च को लेकर रोजाना एक सेमी की रफ्तार से घटने लगा है। पिछले दो दिनों में बांध से दो सेमी पानी की कमी दर्ज की गई। इस बार बांध के खाली रहने में बनास नदी की अहम भूमिका रही है, जिसकी इस वर्ष जलधार नहीं फूट सकी। इस वर्ष बांध में अब तक कुल 6.5 टीएमसी पानी की आवक निकटवर्ती क्षेत्र में बरसे मेघ व डाई व खारी नदियों से आए पानी से ही मानी जा रही है। इस बार जलभराव में सहायक त्रिवेणी का गेज भी 1.70 मीटर से पार नहीं हो सका है। बांध के पूर्ण जलभराव के दौरान त्रिवेणी का गेज 4 मीटर से ऊपर लगभग 48 घंटे से अधिक तक चलने पर पूर्ण जलभराव की आशा व्यक्त की जाती है। जो इस बार सिर्फ एक सपना बनकर रह गया। अन्य सालों की अपेक्षा इस बार मानसून सत्र से पूर्व काफी मात्रा में पानी भी था, लेकिन मानसून को शायद इस बार जलभराव व कैचमेंट एरिया में नहीं बरसना था। बांध में पानी की आवक रुकने के साथ ही बांध का गेज पिछले दो दिनों से लगातार घटने लगा है। बांध का गेज बीते 313.51 आर एल मीटर पर आकर अटक गया था। इसमें 24.609 टीएमसी पानी का भराव है। जो पूर्ण जलभराव का लगभग 63.50 प्रतिशत पानी है। रविवार तक बांध से रोजाना एक सेमी की कमी के साथ बांध का गेज 313.49 आर एल मीटर रह गया है। ऐसे में बांध से एक वर्ष तक जलापूर्ति का पानी माना जा रहा है। वहीं सिंचाई पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं।

एक साल का पानी आरक्षित

बीसलपुर बांध के जलभराव में लगभग 27 हजार वर्ग किमी क्षेत्र का पानी आता है। इसमें बांध से बनास का क्षेत्र लगभग 300 किमी लम्बाई है। चित्तौडगढ़़, राजसमंद, अजमेर, टोंक व भीलवाड़ा जिले की सीमा शामिल है। बांध से पेयजल के लिए कुल 16 टीएमसी पानी आरक्षित रखा गया है। वर्षभर के लिए लगभग 5 से 6 टीएमसी पानी वाष्पिकरण व अन्य में खर्च माना जाता है। साथ ही 8 प्रतिशत पानी सिंचाई के लिए आरक्षित है। ऐसे में बांध में आया पानी जून 2021 तक पर्याप्त है। बांध में अभी कुल जलभराव का लगभग 63.50 प्रतिशत पानी आ चुका है। बांध का कुल जलभराव क्षेत्र 21 हजार 300 हैक्टेयर है, जिसमें अभी 16 हजार 500 हैक्टेयर भूमि जलमग्न हो चुकी है। बांध का जलभराव लगभग 12 किमी दूर नेगडिया व बोरड़ा गणेशजी तक पार कर नापा का खेड़ा से आगे तक भर चुका है।

मिट्टी के साथ सिंचाई पर संकट
अभियंताओं के अनुसार 63.50 प्रतिशत कुल जलभराव माना जा रहा है। बांध बनने के बाद से अब तक बांध के नीचे एकत्र मिट्टी, बजरी व कचरे की मात्रा को मध्यनजर रखा जाए तो जलभराव में कुछ मीटर तक मिट्टी का भराव होने से पानी की मात्रा कम भी मानी जा रही है। बांध भरने के दौरान आखिरी में सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। शुरू में पानी का गेज जल्द बढ़ता है ज्यों-ज्यों पानी का भराव ऊपर आता है तो भराव में काफी पानी की आवश्यकता महसूस होने लगती है। ऐसे में इस बार पानी की मात्रा 314 आर एल मीटर से कम रहती है तो किसानों के लिए नहरों से सिंचाई पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं।

जलापूर्ति एक नजर में

बीसलपुर बांध पेयजल परियोजना वृत्त जयपुर के अधिक्षण अभियंता सुधांशु दीक्षित ने बताया कि जयपुर जलापूर्ति के दौरान रोजाना बांध 480 एमएलडी लेकर जयपुर में भेजा जा रहा है। इसी प्रकार दूदू-चाकसू सहित ग्रामीण पेयजल परिसयोजना के तहत 90 एमएलडी पानी लिया जा रहा है। अजमेर पेयजल परियोजना के सहायक अभियंता श्रीनिवास जांगिड के अनुसार अजमेर जिले के लिए बांध रोजाना 305 एमएलडी पानी लिया जा रहा है जिसे अजमेर शहर सहित ग्रामीण इलाकों में प्रति 48 घंटों में एक बार जलापूर्ति किया जा रहा है। इधर बीसलपुर टोंक दनियारा पेयजल परियोजना के राजमहल फिल्टर प्लांट का देख रहे एलएण्डटी कम्पनी के प्रोजेक्ट मैनेजर शादाब खान ने बताया कि योजना के तहत बांध रोजाना 43 एमएलडी पानी लिया जा रहा है।

baljeet singh Desk
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