Operation: नींव खोदते दबा मजदूर, चार घंटे बाद निकाला सुरक्षित

तेज आवाज से मलबा गिर पड़ा। वह मलबे में दब गया। धमाका सुनकर साथी मजदूर दौड़े।

By: raktim tiwari

Updated: 16 Sep 2020, 05:53 AM IST

अजमेर.

देहली गेट पुलिस चौकी के निकट मकान की नींव खोदते समय मजदूर पर मलबा गिर गया। इससे वह नींव में दब गया। यह देख साथी मजदूरों के हाथ-पैर फूल गए। करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद श्रमिकों-क्षेत्रवासियों और सिविल डिफेंस की टीम ने नींव में दबे मजदूर को बाहर निकाला। इस दौरान दरगाह थाना पुलिस भी पहुंची।

देहली गेट पुलिस चौकी स्थित कुम्हार मोहल्ला में कई दिन एक तीन मंजिला पुराने मकान को गिराकर नया निर्माण किया जा रहा था। इसकी नींव खुदाई का कामकाज जारी था। इसी दौरान नींव में एक गहरी जगह खुदाई के दौरान मजदूर पर तेज आवाज से मलबा गिर पड़ा। वह मलबे में दब गया। धमाका सुनकर साथी मजदूर दौड़े।

धीरे-धीरे हटाया मलबा
हादसे की जानकारी मिलते ही क्षेत्रवासी और सिविल डिफेंस की टीम पहुंची। मजदूरों-क्षेत्रवासियों ने टीम ने पहले ऊपरी मलबे को हटाया। इससे मजदूर का मुंह नजर आया। उसकी सांस चलता देख लोगों को कुछ राहत मिली। इसके बाद श्रमिकों, क्षेत्रवासियों और सिविल डिफेंस के जवानों ने पत्थर, मिट्टी को हटाना शुरू किया। करीब तीन-चार घंटे की मशक्कत के बाद नींव में दबे मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाला गया। श्रमिक ने अपना नाम अकबर अली बताया। उसे तत्काल उपचार के लिए जवाहर नेहरू अस्पताल भेजा गया।

पुलिस पहुंची, नहीं मिला ठेकेदार
हादसे की सूचना पर दरगाह थाना प्रभारी रमेंद्र सिंह हाड़ा, वृत्ताधिकारी रघुवीर प्रसाद मौके पर पहुंचे। गंज थाने से भी पुलिसकर्मी पहुंचे। पुलिस ने ठेकेदार के बारे में पूछा तो वह मौके पर नहीं मिला। पुलिस इस मामले में नगर निगम से नक्शा स्वीकृति और ठेकेदार के बारे में जानकारी लेगी।

मैं दे आया फाइल का पैसा, सर देंगे परमानेंट एफिलेशन..

अजमेर. महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के घूसकांड में निलंबित कुलपति आर. पी. सिंह, उसका दलाल रणजीत और उनके नेटवर्क में शामिल लोग बेखौफ होकर कॉलेज संचालकों से डील कर रहे थे। 15-20 हजार से लाखों रुपए की डील मोबाइल पर फिक्स होती थी। यह रिकॉर्डिंग और बातें एसीबी की एफआईआर में दर्ज है।

1 जुलाई 2020 को 4.01:12 बजे रणजीत सिंह के मोबाइल नंबर (7599347117) से राजेंद्र चौधरी के मोबाइल (9829084423) पर बातचीत हुई। इसमें राजेंद्र कहता है....पहले चार-पांच कॉलेज का पैसा एक लाख रुपए दिया था, जो कम ही नहीं किया। इस पर रणजीत कहता है...रजिस्ट्रार पैनल और सीट का एक लाख रुपए मांग रहा है, वो सब काम करा देगा। मैं दो फाइल का पैसा दे भी आया उसको....सर तो परमानेंट एफिलेशन देंगे.....।

raktim tiwari Reporting
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