पीडी खाता खुलने से ‘मुखिया’ की जेब होगी तंग, वित्तीय अनियमितताओं पर लगेगी लगाम

राज्य सरकार के नए नियम से आखिर परेशान क्यों हैं प्रदेश के सरपंच,पंचायत की राशि अब व्यक्तिगत नहीं आ सकेगी काम,वित्त विभाग नियमों के हिसाब से करेगा भुगतान,पंचायतों की भूमिका केवल मध्यस्त की रहेगी।

By: suresh bharti

Published: 22 Jan 2021, 01:20 AM IST

अजमेर. राज्य सरकार ने सरपंचों के वित्तीय अधिकारों में बड़ी कटौती की है। विकास कार्यों के लिए आने वाला पैसा अब सीधे पंचायतों के खातों में नहीं जाकर वित्त विभाग के पास जमा होगा। वहां पंचायतों के पीडी खाते खोले जाएंगे। सरपंचों को अब वित्त विभाग के पीडी खाते से पैसा लेना पड़ेगा। सरकार के इस फैसले के विरोध स्वरूप प्रदेशभर के सरपंच लामबंद हैं।

जानकारों के अनुसार अब तक केन्द्र सरकार की योजनाओं का पैसा स्टेट फाइनेंस कमीशन के जरिए सीधे पंचायतों के खातों में आता था। इसकी निकासी का जिम्मा सरपंच व सचिव के पास होता था। जो अपने हिसाब से विकास कार्यों पर पैसा खर्च करते थे। सरकार का मानना था कि इसमें पंचायतों में अनियमितताएं पनपती थी। सरपंच लाखों रुपए एडवांस उठा लेते थे। इन्हें वापस वसूल कर पाना टेढ़ी खीर होता था। पंचायतों के वित्तीय कार्यों पर कोई निगरानी नहीं हो पाती थी। नई व्यवस्था से इन सब पर लगाम लग सकेगी।

अब वित्त विभाग देगा पैसा

अब सरपंचों को पंचायतों के विकास कार्यों के लिए पैसा खर्च करने का अधिकार नहीं होगा। अब पंचायतों के पैसों का हिसाब किताब वित्त विभाग के पास होगा। वित्त विभाग सभी पंचायतों के लिए पीडी अकाउंट खोल रहा है। सरपंचों को सीधे राशि निकालने की बजाय वित्त विभाग के पीडी खाते से निकालनी होगी। अग्रिम राशि एठाने से पहले पुरानी राशि का हिसाब भी देना होगा।

पहले पंचायतों के खाते में ट्रांसफर होता था पैसा। सरकार विकास कार्यों के लिए प्रत्येक पंचायत में स्टेट फाइनेंस कमीशन के जरिये पंचायतों के खातों में पैसा ट्रांसफर करती थी। वह राशि साल में दो किश्त में पंचायतों के खातों में दी जाती थी। मध्यम पंचायतो में 10-10 लाख रुपए औेर बड़ी पंचायतों के लिए 15-15 लाख की दो किश्त में पैसा दिया जाता था। पंचायत में विकास कार्यो के लिए सरपंच पंचायत के बैंक अकाउंट से पैसा खर्च करते थे, लेकिन अब ये व्यवस्था बंद कर दी है।

सरपंच के कार्य

सरपंच एक पंचायत का मुखिया होता है। सरपंच सीधे अपनी पंचायत के भीतर चुने जाते हैं। सरपंच या मुखिया का काम ग्राम सभा की बैठक बुलाना औेर उसकी अध्यक्षता करना होता है। ग्राम पंचायत का रेकॉर्ड रखना, वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था की देखभाल करना तथा ग्राम पंचायत के कर्मचारियों, अधिकारियों (जो पंचायत से जुड़े काम में लगे हैं) के कामो पर प्रशासनिक नियंत्रण रखना भी सरपंच के काम में आता है। पुरानी व्यवस्था के तहत सीधे पंचायत के खाते में पैसा जमा होता था। उस पर सरकार कोई नियंत्रण नहीं होता था। सरपंच ही उसका हिसाब-किताब रखता था।

नई व्यवस्था के लाभ व हानि

पंचायतों के लिए वित्तीय विभाग में पीडी खाते की व्यवस्था होने से सरपंचों द्वारा गड़बड़ी की सम्भावना कम हो जाएगी। पहले सरपंच ग्राम पंचायत के खाते से पैसा निकालकर कई बार व्यक्तिगत कार्यो पर खर्च कर देते थे। बाद में उनसे वसूली नहीं हो पाती थी। नई व्यवस्था से इस पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी।
सरपंचों का कहना है कि नई व्यवस्था का खामियाजा क्षेत्र की जनता को भुगतना पड़ेगा। उनके पास विकास कार्यो के लिए पैसा नहीं होगा। सरकार पंचायतों के पैसे का कहीं और उपयोग कर लेगी।

ग्राम पंचायत भवन पर लटकाए ताले

पीडी खाता खोलने के विरोध में गुरवार को अजमेर जिले सहित प्रदेश के ग्राम पंचायत भवनों की तालाबंदी की गई। राज्य सरकार के नाम ज्ञापन देकर राज्य सरकार के आदेश वापस लेने की मांग की गई।

suresh bharti Desk
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