scriptParalysis patients are troubled like this | पैरालाइसिस के मरीज ऐसे होते हैं परेशान | Patrika News

पैरालाइसिस के मरीज ऐसे होते हैं परेशान

मरीज को इलाज शुरू होने के लिए करना पड़ा है इंतजार, न्यूरो फिजिशियन का एक व न्यूरो सर्जरी के दो पद खाली, पहले मेडिसिन विभाग के चिकित्सक करते हैं अटेंड, फिर ऑनकॉल बुलाते हैं न्यूरो फिजिशियन , अजमेर के साथ कई मेडिकल कॉलेज में नहीं है इमरजेंसी इकाई, प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों की स्थिति

अजमेर

Published: June 09, 2022 01:55:09 pm


चन्द्र प्रकाश जोशी

अजमेर. गंभीर बीमारी में जकड़े मरीज को अस्पताल में तत्काल उपचार व इलाज की दरकार होती है। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में पक्षाघात (पैरालाइसिस) की स्थिति में मरीज को तत्काल इलाज नहीं मिल पा रहा है। मरीज पहले मेडिसिन विभाग में भर्ती होता है। उसके बाद न्यूरो फिजिशियन की सेवाएं उपलब्ध होती हैं। ऐसे में मरीज को तत्काल राहत नहीं मिल पा रही है।
पैरालाइसिस के मरीज ऐसे होते हैं परेशान
पैरालाइसिस के मरीज ऐसे होते हैं परेशान
अजमेर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी यूनिट नाम मात्र की है। यहां सभी विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ ऑनकॉल चिकित्सकों की सेवाएं हैं। यहां पैरालाइसिस के मरीजों को आज भी तत्काल इलाज नहीं मिल पा रहा है। गंभीर घायलों आदि को तो इलाज मिल रहा है मगर पैरालाइसिस अटैक व हार्ट अटैक के मरीज को आपातकालीन इकाई में तत्काल इलाज नहीं मिल पाता है। इधर-उधर ले जाने में ही मरीज की जान को संकट उत्पन्न हो जाता है। जेएलएनएच में न्यूरो फिजिशियन के चार में से एक पद खाली है, जबकि न्यूरो सर्जरी में दो पद खाली हैं।
अभी यह है व्यवस्थाएं
पक्षाघात व गंभीर मरीज आने पर कैज्युल्टी में कार्यरत रेजीडेंट चिकित्सक मरीज को अटेंड करता है। उसके बाद अपने सीनियर डॉक्टर से राय लेकर सीटी स्कैन आदि जांचें करवाई जाती है। जरूरत पड़ने पर ऑनकॉल सीनियर डॉक्टर को बुलवाते हैं। मेडिसिन विभाग के बाद जरूरत पड़ने पर न्यूरो फिजिशियन को ऑनकॉल बुलवाते हैं। एम्बुलेंस चालक संबंधित डॉक्टर को या तो लेकर आता है या डॉक्टर अपने वाहन से पहुंचते हैं।

इमरजेंसी यूनिट बनने पर यह बढ़ेंगी सुविधाएं


-कैज्युल्टी में 24 घंटे इमरजेंसी यूनिट के चिकित्सक मौजूद रहेंगे।

-न्यूरो फिजिशियन, न्यूरो सर्जन, अस्थि रोग विशेषज्ञ, कार्डियोलॉजिस्ट इसमें मौजूद रहेंगे।
-मरीज के पहुंचते ही संबंधित विभाग के चिकित्सक ही मरीज को अटेंड कर उपचार उपलब्ध करवाएंगे।
-एक बारगी कार्डिक अटैक के मरीज का उपचार भी इमरजेंसी यूनिट में शुरू हो जाएगा।
इनका कहना है

अभी कोई भी मरीज आता है तो संबंधित चिकित्सक को कॉल किया जाता है। जरूरत पड़ने पर एम्बुलेंस लेने पहुंच जाती है। अगर अभी भी पैरालाइसिस के मरीज के इलाज में परेशानी आ रही है तो जानकारी करवा कर समाधान करवाएंगे। इमरजेंसी इकाई के लिए निरीक्षण हो चुका है। जल्द इकाई बनेगी।
डॉ. अनिल जैन, अधीक्षक जेएलएनएच

अन्य मेडिकल कॉलेज की स्थिति

उदयपुर
इमरजेंसी यूनिट में सभी विभागों की रोस्टर से ड्यूटी लगती है। यहां प्रतिमाह पैरालाइसिस के 175 मरीज आते हैं। न्यूरो फ़िज़िशियन के 3 में से एक पद व सर्जरी के चारों पद रिक्त हैं।
जोधपुर

महात्मा गांधी, एमडीएम व उम्मेद अस्पताल तीनों में इमरजेंसी यूनिट हैं। हर माह औसतन 100 केस पैरालाइसिस के आते हैं। न्यूरो सर्जरी विभाग में 10 में से 4 पद रिक्त हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में वर्तमान में प्रोफेसर रैंक के चार चिकित्सक शिक्षक कार्यरत हैं।
कोटा

कोटा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमबीएस अस्पताल में अलग से इमरजेंसी यूनिट है। बीते एक माह में 150 मरीज पैरालाइसिस अटैक के आए हैं। न्यूरो फिजिशियन के तीन पद स्वीकृत हैं। तीनों भरे हैं। न्यूरो सर्जरी में 7 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 4 रिक्त हैं।

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