हम कॉलेज स्टूडेंट हैं भाई, नहीं लाएंगे पेरेन्ट्स को...

कई परिजन तो बच्चों के कोर्स के बारे में जानकारी भी नहीं थी।

raktim tiwari

16 Feb 2020, 10:04 AM IST

अजमेर. स्कूल की तर्ज पर कॉलेज में पेरेंट-टीचर मीटिंग हुई। अधिकांश कॉलेज में 70 फीसदी से ज्यादा विद्यार्थी इससे दूर रहे। स्कूली बच्चों की तरह अभिभावकों को कॉलेज ले जाना उन्हें रास नहीं आया।

उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2019-20 से सभी कॉलेज में अभिभावक संवाद कार्यक्रम शुरू किया है। मौजूदा सत्र की चौथी बैठक शनिवार हुई। सभी छात्र-छात्राओं को परिजनों के साथ कॉलेज पहुंचना था। सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, राजकीय कन्या महाविद्यालय, लॉ कॉलेज सहित अन्य संस्थानों में यह कार्यक्रम हुआ।

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कहीं 40 तो तो कहीं 60 परिजन ज्यादातर छात्राएं और छात्र बिना अभिभावकों के कॉलेज पहुंचे। वे कैंटीन या चाय की थडिय़ों पर गपशप लड़ाते नजर आए। लॉ कॉलेज में 40, एसपीसी-जीसीए में 60, कन्या महाविद्यालय में 35 छात्राओं के अभिभावक पहुंचे। कई परिजन तो बच्चों के कोर्स के बारे में जानकारी भी नहीं थी।

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ये हुई बैठक में चर्चा
-लॉ कॉलेज शहर से दूर, छात्राओं की सुरक्षा के लिए बने महिला पुलिस चौकी
-अभय कमांड सेंटर के कैमरे लगे कायड़ इलाके में
-कॉलेज में निर्धारित अवधि में नियमित लगे क्लास
-डिग्री के साथ चलें रोजगारोन्मुखी और कौशल विकास कोसर्
-कॉलेज में बच्चे क्लास में आते हैं या नहीं इसकी मोबाइल पर हर सप्ताह या प्रतिमाह दें सूचना

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आरएमएल के कारण अंग्रेजी शराब के ठेकदारों में खौफ

राजस्थान सरकार की नयी आबकारी नीति के तहत राजस्थान मैक लीटर ब्रांड के नाम से देशी शराब ठेकों पर अंग्रजी चीप रेन्ज की शराब बेचे जाने की अनिवार्यता के चलते अंग्रेजी शराब का धंधा करने वाले ठेकेदारों में खौफ पैदा हो गया है। उनका मानना है कि यदि चीप रेन्ज की अंग्रेजी शराब देशी शराब की दुकानो ंपर मिलेगी तो हमारे ग्राहक टूट जाएंगे और हमें करोडों रूपए का घाटा भुगतने के लिए मजबूर होना होना पडेगा।

नयी आबकारी नीति में राजस्थान की गहलोत सरकार ने यह तय किया है कि राज्य की सभी देशी शराब की दुकानों पर व्हस्की से निर्मित आरएमएल ब्रांड की तीस प्रतिशत शराब बेचना जरूरी होगा। इस शराब को प्राइवेट कंपनी बना कर सरकार को सप्लाई करेगी। सूत्रों ने बताया कि इस तरह की शराब पूर्व में भी सप्लाई की जाती थी किन्तु सरकार की ओर से इस संबंध में किसी तरह की अनिवार्यता लागू नहीं थी।

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raktim tiwari Reporting
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