बोला स्टाफ...आप नहीं दे रहे हमारा हक, हम भी नहीं करेंगे आपका काम

बोला स्टाफ...आप नहीं दे रहे हमारा हक, हम भी नहीं करेंगे आपका काम

raktim tiwari | Publish: Sep, 16 2018 09:24:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

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अजमेर.

सातवां वेतनमान नहीं मिलने के विरोध में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कर्मचारी पेन डाउन हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों ने नारेबाजी और प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने चेताया कि जल्द फैसला नहीं हुआ तो पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कामकाज ठप किया जा सकता है।

मंत्रालयिक कर्मचारी संघ अध्यक्ष दिलीप शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों के कार्मिकों का सातवें वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया है। वित्त विभाग की अदूरदर्शिता से कर्मचारी अपने वाजिब हक से वंचित हैं। सरकार ग्यारह महीने से कोई फैसला नहीं कर पाई है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी है।

प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में पैन डाउन हड़ताल रखी गई है। सरकार ने सातवें वेतनमान को लेकर फैसला नहीं किया तो सभी विश्वविद्यालयों में अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रारंभ होगा।

ना दस्तावेज बने, ना निकली पत्रावलियां

पेन डाउन हड़ताल से विभागों में कामकाज प्रभावित रहा। तीन दिन से विश्वविद्यालय में डुप्लीकेट अंकतालिका, सर्टिफिकेट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट नहीं बने। विभागों में पत्रावलियां अटकी रही। कर्मचारियों ने पत्रावलियों पर पेन नहीं चलाकर अपना विरोध जताया। इस दौरान मंत्रालयिक कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष दुर्गेश भारद्वाज, प्रवक्ता गोपाराम, संयुक्त सचिव सुरेंद्र कुमावत, सहायक कर्मचारी संघ अध्यक्ष गुट्टाराम सेन ने संबोधित किया।

राष्ट्र का गौरव है हिन्दी, नहीं दुनिया की किसी भाषा से कम

राष्ट्रभाषा हिन्दी दिवस पर शहर के सरकारी दफ्तरों, स्कूल, कॉलेज, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से कई संस्थानों में कार्यक्रम हुए। वक्ताओं ने हिंदी को राष्ट्र का गौरव, संस्कृति की प्रतीक और परस्पर मेलजोल बढ़ाने वाली भाषा बताया। सबने हिन्दी में अधिकाधिक संवाद, कामकाज पर जोर दिया।

राजकीय कन्या महाविद्यालय में विचार गोष्ठी में बोलते हुए पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. एन. के. भाभड़ा ने कहा भाषा मनुष्य का क्रांतिकारी अविष्कार है। यह वैचारिक अभिव्यक्ति का सरल और सशक्त माध्यम है। हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी पूर्णत: वैज्ञानिक भाषा है। हिन्दी का प्रयोग एवं व्यवहार आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए केवल हिन्दी दिवस ही प्रमुख नहीं है। हर दिन, हर पल हिन्दी को अपनाया जाना चाहिए।

डॉ. अरविंद कश्यप ने कहा कि भारत गंगा-जमनी संस्कृति से वैभवशाली है। हिन्दी विश्व की किसी भाषा से कमतर नहीं है। हमें हिंदी को मन, वचन और कर्म से अपनाना चाहिए। हिन्दी विभाग प्रभारी डॉ. शमा खान ने कहा कि हिन्दी देश की आत्मा, सांस्कृतिक अस्मिता की भाषा है। इस दौरान काव्य पाठ, निबंध, पोस्टर और अन्य प्रतियोगिता हुई। काव्य पाठ में हर्षिता, दर्शिता व्यास, वर्षा शर्मा, ऐश्वर्या दाधीच, पोस्टर प्रतियोगिता में अक्षिता वर्मा विजेता रही। डॉ. अंजु ने धन्यवाद दिया। संचालन सुष्मा टाक ने किया।

 

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