कोरोना से बचाव के लिए पटाखे फ ोडऩे से बचें आमजन

जिला कलक्टर ने की अपील

By: bhupendra singh

Published: 13 Nov 2020, 06:29 PM IST

अजमेर.जिला कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने जिले के लोगों से इस दीपावली पर्व पर पटाखे फ ोडऩे से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए वायु प्रदूषण स्तर को नियंत्रित रखने के लिए यह प्रतिबन्ध लागू किया गया है। जिला कलक्टर ने शुक्रवार को यह अपील जारी की। उन्होंने कहा कि सरकार ने पटाखों की बिक्री और उनके जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। दीपावली के दौरान पटाखों से कोरोनोवायरस रोगियों के लिए वायु प्रदूषण की समस्या पैदा हो सकती है। त्योहार के दौरान हर साल बड़े पैमाने पर पटाखे फू टते हैं। इससे वायु और ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और लोगों और जानवरों के स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव दीपावली के बाद काफी समय तक दिखाई देता है।

कोविड-19 से प्रभावित लोग पटाखों के फ टने से होने वाले वायु प्रदूषण के कारण सीधे परेशान होने की संभावना रखते हैं। इसे देखते हुए,लोगों को इस साल पटाखे फ ोडऩे से बचना चाहिए। इसके बजाय,वे बड़े पैमाने पर दीपक जला सकते हैं और त्योहार मना सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को विशेष रूप से त्योहार की अवधि के दौरान घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। भौतिक समारोहों को आयोजित करने के बजाय ऑनलाइन प्लेटफ ार्मों के माध्यम से कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बजाय, स्वास्थ्य पहल और जागरूकता अभियान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पटाखे एरोसोल उत्पन्न करते हैं। कोविड-19 महामारी के साथए यह आशंका है कि पटाखे फू टने से और संभवत: संक्रमण फैलाने का एक माध्यम बन जाएगा। चिकित्सा जगत का मानना है कि सर्दियों के महीनों में पटाखे, पत्तियों को जलाने और अन्य कचरे को जलाने से भी बचा जाना चाहिए। वे बताते हैं कि इन गतिविधियों और वायु प्रदूषण में वृद्धि के बीच में एक सीधा संबंध है। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड,पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों से जैसे जहरीले मामलों और जहरीली गैसों से वरिष्ठ नागरिकोंए विशेष रूप से अस्थमा और श्वसन एलर्जी जैसी बीमारियों वाले लोगों में तीव्र श्वसन संकट होता है।

उन्होंने कहा कि सर्दियों में,एयरोसोल और हवा में निलंबित कण कोरोनावायरस के वाहक के रूप में कार्य कर सकते हैं। चूंकि वायरस हवा हवाई है, हवा में इन कणों की भारी एकाग्रता उनके संचरण को गति देगी। इस कारण से, सभी एयरोसोल जनरेटिंग गतिविधियाँ महामारी के दौरान जोखिम कारक हैं। एरोसोल जनित व्यवहारों में खाँसना, छींकना,जोर से बात करना, चीखना, चिल्लाना और जोर से गाना भी शामिल है।
पटाखे में प्रयुक्त रसायन हमारे स्वास्थ्य को ऐसे करते हैं प्रभावित

कॉपर-श्वसन मार्ग को प्रभावित करता है।
कैडमियम-ऑक्सीजन ले जाने के लिए रक्त की क्षमता कम करके एनीमिया की ओर ले जाता है।

जस्ता-धातु बुखार पैदा कर सकता है और उल्टी को प्रेरित कर सकता है।
लीड-तंत्रिका तंत्रा को नुकसान पहुँचाता है।

मैग्नीशियम-मैग्नीशियम धातु बुखार मैग्नीशियम धुएं के कारण होता है।
सोडियम-यह एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील तत्व है और नमी के साथ संयुक्त होने पर जलता है।

संभावित स्वास्थ्य जोखिम जो फ ायरिंग क्रैकर्स के परिणामस्वरूप होते हैं।
यह हो सकती हैं परेशानियां

छोटे स्पार्कलर और फ्लावरपॉट द्वारा उत्पन्न घने धुएं भी श्वसन पथ को प्रभावित कर सकते हैं,खासकर छोटे बच्चों को।
वायु को प्रदूषित करने वाला धुआं सर्दी और एलर्जी से पीडि़त लोगों की स्थिति को गंभीर बना सकता हैं। यह गले और छाती की जकडऩ का कारण भी बनता है।

दीपावली के दौरान, निलंबित कण के स्तर में वृद्धि होती है। जब लोग इन प्रदूषक कणों के संपर्क में आते हैंए तो वे आंख,नाक और गले से संबंधित समस्याओं से पीडि़त हो सकते हैं।
वायु और ध्वनि प्रदूषण जो कि पटाखे के कारण होता है, लोगों को हृदयए श्वसन और तंत्रिका तंत्र से संबंधित विकारों को प्रभावित कर सकता है।

दीपावली एक खुशहाली का त्योंहार है, इसमें सुख और समृद्धि का अनुभव होता है। प्रदूषण रहित दीपावली हेतु दी, जलाए जाएं तथा एलईडी लाइट्स से जगमगाहट की जानी चाहिए। इस जगमगाहट से कोरोना के शोक से निजात मिल सकती है। सरकार द्वारा पटाखे जलाने पर 2 हजार रुपए का जुर्माना तथा पटाखे बेचने वालों पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश जारी किए गए हैं। उसकी अनुपालना करना प्रत्येक नागरिक का उत्तर दायित्व है।

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bhupendra singh Reporting
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