अजमेर . दो जून रोटी के लिए मेहनतकश को रोज कुआं खोद कर पानी पीना पड़ता है। चाहे सर्दी हो गर्मी या बरसात हर मौसम में उसे मजदूरी के लिए पसीना बहाना ही होता है। अप्रेल माह में पड़ रही भीषण धूप और गर्मी में हाथ ठेले पर बल्लियां लादकर ले जाते मेहनतकश

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