पुलिस ने नहीं सुनी गुहार,अब न्यायालय का सहारा

गांव बिजौली की सरकारी भूमि पर पेपर मिल निर्माण का आरोप, पीडि़त ने डीएम, एसपी के यहां भी लगाई गुहार, नहीं हुई सुनवाई

उपखंड के सदर थाना क्षेत्र के बीजौली कचेलपुरा गांव स्थित सरकारी भूमि के फर्जी रूप से बेचे जाने और विक्रय करने को लेकर गांव के एक पशुपालक ने इस्तगासे के माध्यम से मामला दर्ज कराया है साथ में जिला पुलिस अधीक्षक को जिला कलेक्टर को भी मामले से अवगत कराते हुए सरकारी चारागाह भूमि को मुक्त कराने की मांग की है।

By: Dilip

Published: 12 Feb 2021, 12:44 AM IST

बाड़ी. उपखंड के सदर थाना क्षेत्र के बीजौली कचेलपुरा गांव स्थित सरकारी भूमि के फर्जी रूप से बेचे जाने और विक्रय करने को लेकर गांव के एक पशुपालक ने इस्तगासे के माध्यम से मामला दर्ज कराया है साथ में जिला पुलिस अधीक्षक को जिला कलेक्टर को भी मामले से अवगत कराते हुए सरकारी चारागाह भूमि को मुक्त कराने की मांग की है।
पीडि़त भूरा पुत्र दुर्गा गुर्जर ने इस्तगासे से दर्ज कराए मामले में आरोप लगाया है कि गांव के सरनाम, बटकना, जोगिंदर, रामेश्वर, सुरेंद्र और पास के गांव समाधिया पुरा के रविंद्र पुत्र कैलाशी ने खसरा नंबर 1586 बटा 1982/1958 रकबा 244 बीघा 11 बिस्वा भूमि को आगरा खंदारी निवासी सेठ विनती पुत्र प्रेम नारायण खन्ना और करण खन्ना पुत्र विनती खन्ना को 12 लाख रूपए में फर्जकारी कर बेच दिया है।

उक्त भूमि पर दोनों उद्योगपतियों ने बाद में पेपर फैक्ट्री लगा ली और आसपास की सरकारी भूमि पर भी कब्जा कर लिया। ऐसे में अब गांव के पशु चरने से वंचित है और कागज की फैक्ट्री में गत्ता निर्माण के दौरान होने वाले केमिकल की बदबू से ग्रामीण जहरीले वातावरण में जीने को मजबूर है। इसके अलावा गांव के बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
भूरा गुर्जर का कहना है कि वह पशुपालक है, तीन-चार वर्ष से अपने बच्चों को लेकर जयपुर मजदूरी करने चला गया था,जब वहां से वापस लौटा तो उसने देखा कि उसके गांव के लोग जिस सरकारी भूमि पर पशु चराते थे। वहां एक फैक्ट्री का निर्माण हो गया है,जब उसने पूरे मामले का पता लगाया तो गांव के कुछ लोगों की ओर से उक्तभूमि को यापारियों को 12 लाख रुपए में बेचना सामने आया।

पीडि़त का कहना है कि यह सरकारी भूमि है इसको बेचना और खरीदना गैरकानूनी है। ऐसे में उक्त मामले को लेकर उसने सदर थाने में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर पीडि़त ने इस्तगासा दायर किया है। जिसकी जांच ओमप्रकाश एएसआई कर रहे हैं लेकिन मामले में अभी तक कोई अनुसंधान शुरू नहीं हो सका है।

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