Policy: शराब का धंधा करने वाले ठेकेदारों में खौफ

शुगर मिल की देशी मदिरा बेचने की अनिवार्यता पहले से ही लागू है।

raktim tiwari

16 Feb 2020, 09:52 AM IST

अजमेर। राजस्थान सरकार की नयी आबकारी नीति के तहत राजस्थान मैक लीटर ब्रांड के नाम से देशी शराब ठेकों पर अंग्रजी चीप रेन्ज की शराब बेचे जाने की अनिवार्यता के चलते अंग्रेजी शराब का धंधा करने वाले ठेकेदारों में खौफ पैदा हो गया है। उनका मानना है कि यदि चीप रेन्ज की अंग्रेजी शराब देशी शराब की दुकानो ंपर मिलेगी तो हमारे ग्राहक टूट जाएंगे और हमें करोडों रूपए का घाटा भुगतने के लिए मजबूर होना होना पडेगा।

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नयी आबकारी नीति में राजस्थान की गहलोत सरकार ने यह तय किया है कि राज्य की सभी देशी शराब की दुकानों पर व्हस्की से निर्मित आरएमएल ब्रांड की तीस प्रतिशत शराब बेचना जरूरी होगा। इस शराब को प्राइवेट कंपनी बना कर सरकार को सप्लाई करेगी। सूत्रों ने बताया कि इस तरह की शराब पूर्व में भी सप्लाई की जाती थी किन्तु सरकार की ओर से इस संबंध में किसी तरह की अनिवार्यता लागू नहीं थी।

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आरएमएल शराब के एक पव्वे की कीमत अंदाजन सत्तर रूपए होगी जबकि अन्य अंग्रेजी शराब की प्रति पव्वे कीमत अस्सी से नब्बे रूपए या इससे अधिक है। इस हिसाब से अंग्रेजी शराब के ठेकेदारों को खतरा है कि पियक्कडों का आकर्षण उनकी दुकानों की तरफ कम हो जाएगा। इस तरह सरकार की नीति के कारण उन्हें मंदी के दौर से गुजरना पडेगा। यदि यह नियम लागू करना था तो अंग्रेजी के शराब ठेकेदारों के साथ सौतेला व्यहार क्यों किया गया। इसमें यह भी उल्लेखनीय है कि देशी शराब की दुकानों से 43 फीसदी गंगानगर शुगर मिल की देशी मदिरा बेचने की अनिवार्यता पहले से ही लागू है।

ऐसे में देशी शराब के ठेकेदारों का कहना है कि जब कुल शत प्रतिशत उठाइ्र्र गयी शराब में से 73 प्रतिशत सरकार की शराब की बेचनी है तो अन्य प्राइवेट कंपनी की देशी मदिरा कैसे बेच सकेंगे जिसमें पियक्कडों के कई प्रिय ब्रांन्ड शामिल हैं। राज्य सरकार के नए फरमान से देशी मदिरा बनाने वाली कई फर्मो को भी घाटे की स्थिति का सामना करना पडेगा। विभागीय सूत्रों का कहना है कि गहलोत सरकार के नए निर्णय से कंट्री लीटर यानि कम गुणवत्ता वाली देशी मदिरा की खपत पर अंकुश लगेगा और सुरा प्रेमियों को उच्च गुणवत्ता वाली सुरा उपलब्ध हो सकेगी।

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खास बात है कि गहलोत सरकार ने नयी आबकारी नीति में राजस्व बढाए जाने की भावना ने देश के अन्य राज्यों में फैक्ट फाइडिंग टीम भेजी थी। इस टीम ने अपनी विशेष सिफारिश में देशी शराब की जगह अंग्रेजी शराब निर्मित देशी शराब सुरा प्रेमियों को तक पहुंचाने के लिए कहा था जिसे सुरक्षित स्वास्थ्य की मनोभावना से लागू किया गया है। यह इस योजना का प्रथम चरण है यानि आने वालेे सालों में आरएमएल मदिरा की खपत को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। जिले में देशी शराब के कुल 302 समूह है जिनमें 402 दुकानें हैं।

कोई अंतर नहीं पडेगा

गोयल जिला आबकारी अधिकारी राजेश गोयल ने बताया कि अंग्रेजी शराब के ठेकेदारों का यह सोचना गलत है कि सरकार की इस व्यवस्था से उन्हें राजस्व घाटा भुगतना पडेगा। क्योंकि देशी व अंग्रेजी शराब के ग्राहकों की अपनी अपनी पसंद अलग होती है। इसके अलावा आरएमएल शराब देशी मदिरा के ठेकों से बिक्री किए जाने की अनिवार्यता ठेकेदारों के लिए भी फायदेमंद है क्योकि इसकी बिक्री में अधिक चालीस फीसदी तक मुनाफा दिए जाने की व्यवस्था भी है। उन्होंने बताया कि नयी आबकारी नीति के अंतर्गत आवेदन जमा कराने की अंतिम तारीख 27 फरवरी है जबकि लाटरी सात मार्च को निकाली लाएगी। जिसमेंं देशी मदिरा के लिए 53 एवं अंग्रेजी शराब के लिए 44 आवेदन अब तक जमा किए जा चुके हैं।

raktim tiwari Reporting
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