वृद्धा मां ने मृत बेटी के लिए मांगा इंसाफ, कब्रिस्तान में कब्र खोकर निकाला शव

ढाई माह पहले संदिग्ध हालात में ससुराल में बेटी की हुई मौत के कारणों पर मां की ओर से शक जाहिर किे जाने पर क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस ने कब्र खुदवा कर विवाहिता के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया।

By: kamlesh

Published: 22 Jan 2021, 03:52 PM IST

अजमेर। ढाई माह पहले संदिग्ध हालात में ससुराल में बेटी की हुई मौत के कारणों पर मां की ओर से शक जाहिर किे जाने पर क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस ने कब्र खुदवा कर विवाहिता के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया। बेटी का शव क्रब से बाहर निकालते ही बूढ़ी मां की आंखों से अश्रुधारा फूट पड़ी। उसने मृत बेटी को इंसाफ दिलवाने की मांग की। मां ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताडि़त कर हत्या का संदेह जाहिर किया था।

पुलिस-प्रशासनिक अफसर रहे मौजूद
गुरुवार को सुबह 11 बजे तहसीलदार प्रीति चौहान, वृत्ताधिकारी(उत्तर) डा. प्रियंका रघुवंशी, थानाप्रभारी डा. रवीश सामरिया गौरव पथ स्थित रोबसन मेमोरियल क्रिमेटोरी(कब्रिस्तान) पहुंचे। जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड मेडिकल ज्युरिस्ट डॉ. वी.डी. बीजावत, फिजिशियन डॉ. पिंकी, पेथोलॉजिस्ट डॉ अर्पना राठी के पहुंचने पर कब्रिस्तान इंचार्ज नवीन जोसफ की देखरेख में 4 नवम्बर को दफन वैशाली नगर छतरी योजना निवासी मारिया पत्नी आशीष पैट्रिक का शव क्रब से बाहर निकाला गया। मृतका की मां सुशीला मैसी के शव पहचानने की प्रक्रिया के बाद कब्रिस्तान में टैंट लगाकर किए गए पोस्टमार्टम के बाद शव पुन: दफनाया गया।

शव देख मां की फूटी रुलाई
मृत बेटी मारिया का शव कब्र से बाहर निकलते ही बूढ़ी मां आगरा निवासी सुशीला मैसी के आंखों से आंसू फूट पड़े। उसे पुलिस अधिकारियों ने ढांढस बंधाया। सुशीला ने बताया कि मारिया की मौत के वक्त वह अजमेर आई लेकिन तब उसके बाद दो माह तक बीमार रहने के बाद पुत्री की संदिग्ध हालात में मौत की जांच करवाने के लिए गुहार की है।

...रोटी तक को थी मोहताज
सुशीला मैसी ने बताया कि उसकी बेटी मारिया का दिसम्बर 2014 में आशीष पेट्रिक से विवाह हुआ था। मारिया को शादी के बाद से ही मारपीट कर प्रताडि़त किया जाने लगा, जबकि शादी के समय उसने पांच लाख रुपए का दहेज दिया था। मारिया को ससुराल पक्ष की ओर से शारीरिक व मानसिक प्रताडऩा दी जाती थी। उस पर पीहर से दहेज लाने का दबाव बनाने के लिए कई-कई दिन तक खाना नहीं देकर भूखा रखते थे। वह उसे कई मर्तबा अपने साथ आगरा ले गई। जहां से कुछ दिन बाद फिर आशीष और उसके परिजन अजमेर लेकर आ जाते थे।

बीमारी से बताई थी मौत
सुशीला मैसी ने बताया कि उसको मारिया के ससुराल वालों ने उसके बीमार होने की सूचना दी थी। वह अजमेर पहुंची तो मारिया की मौत का पता चला। बेटी की मौत के सदमे से उसने भी सुधबुध खो दी। जिससे वह उस वक्त मामले की रिपोर्ट भी नहीं कर सकी।

सौ साल में ऐसा पहली बार. . .
कब्रिस्तान इंचार्ज नवीन जोसफ ने बताया कि कब्रस्तिान 1911 से वजूद में है लेकिन बीते सौ साल में कब्र खोदकर पोस्टमार्टम करवाने की कभी नौबत नहीं आई। पहली बार कब्र की खुदाई कर शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया अंजाम दी गई है।

उपचार के दस्तावेजों का होगा परीक्षण, विसरा लिया
ढाई माह बाद दफनाए गए शव के पोस्टमार्टम में मृतका के अस्पताल में चले इलाज के दस्तावेज अहम है। पोस्टमार्टम में फोरेंसिक जांच के लिए मृतका का विसरा भी लिया गया। लेकिन अस्पताल में चले इलाज व दवाओं से भी मामले का परीक्षण किया जाएगा। हालांकि ससुराल पक्ष ने सुशीला मैसी को मारिया की बीमारी से मौत होना बताया था।

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