वाह रे सरकार.. पहले तरसाते रहे इनको जबरदस्त, चुनाव आते ही याद आ गई इनकी

वाह रे सरकार.. पहले तरसाते रहे इनको जबरदस्त, चुनाव आते ही याद आ गई इनकी

raktim tiwari | Publish: Aug, 05 2018 10:04:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

www.patrika.com/rajasthan-news

अजमेर

प्रदेश के अजमेर सहित अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज को जल्द स्थाई प्राचार्य मिलेंगे। तकनीकी शिक्षा विभाग 13 अगस्त को प्राचार्य पद के लिए साक्षात्कार कराएगा। इसके आधार पर योग्य प्रत्याशियों के नाम उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी के पास भेजा जाएगा। इसके बाद प्राचार्यों की नियुक्तियां होंगी।

प्रदेश के अजमेर, भरतपुर, बारां, झालावाड़ और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज में स्थाई प्राचार्यों की नियुक्ति के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने बीती फरवरी-मार्च में ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। चार महीने में आवेदनों की छंटाई के बाद तकनीकी सिक्षा विभाग ने साक्षात्कार कराने का फैसला किया है। सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस के निदेशक डॉ. अविनाश पंवार के आदेशानुसार 13 अगस्त को साक्षात्कार लिए जाएंगे।

दो साल से नहीं स्थाई प्राचार्य

अजमेर के बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज में जून 2015 से स्थाई प्राचार्य नहीं है। डॉ. एम.एम. शर्मा के बाद यहां कार्यवाहक प्राचार्य ही जिम्मेदारी संभाले हुए है। इस दौरान अप्रेल 2016 में तकनीकी शिक्षा विभाग ने जयपुर में साक्षात्कार भी कराए, पर तकनीकी अड़चनों के चलते नियुक्ति नहीं हो सकी। इस कॉलेज में बिना कॉपियां जांचे नम्बर देने, कई अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं।

सात महीने से पद खाली

महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में बीते दिसम्बर से स्थाई प्राचार्य नहीं है। यहां डॉ. अजयसिंह जेठू के इस्तीफा देने के बाद बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य प्रो. रंजन माहेश्वरी कामकाज संभाले हुए है। बीती फरवरी में छात्राओं के आंदोलन के चलते उन्होंने पद छोड़ दिया था। तकनीकी शिक्षा विभाग इस्तीफा नामंजूर कर दिया थी। बीती जुलाई को भी माहेश्वरी ने वापस राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी कोटा लौटने की इच्छा जताई थी। उन्होंने दोनों कॉलेज के प्राचार्य पद से इस्तीफा भी दे दिया था।

सिर्फ बारिश में ही दिखता है यह खास पक्षी

मानसून के दौरान दिखने वाले प्रवासी पक्षी खरमौर अजमेर जिले में पहुंच गया है। बर्ड कन्जर्वेशन सोसायटी अध्यक्ष महेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि अंग्रेजी में इसे लेसर फ्लोरिकन के नाम से जाना जाता है। बरसात शुरु होते ही खरमोर घास के मैदान एवं खेतों में दिखाई देते हैं।
पर्याप्त बारिश नहीं होने से फिलहाल इनकी संख्या कम है। जिले के सोकलिया, पीपरोली, तथा लोहरवाड़ा और आसपास के क्षेत्र में खरमौर देखे जा सकते है। बर्ड लाइफ इन्टरनेशनल तथा ज्योलोजिकल सोसायटी लंदन ने अति दुर्लभ पक्षियों की सूची में रखा है। दुनिया भर में इनकी संख्या में गिरावट हो रही है। नर खरमोर का रंग काला और उपर के पंख सफेद होते हैं। इनके सिर पर मोर की तरह कलंगी होती है।

मादा खरमोर का रंग भूरा होता है। यह आसानी से दिखाई नहीं देती। वर्षाकाल में यह प्रजनन करते हैं। मादा दो से चार अंडे भूमि पर ही देती है। बरसात खत्म होते ही यह अचानक अदृश्य हो जाते हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिकों ने इस पर अध्ययन किया पर इनके एकाएक स्थान बदलने की असली वजह सामने नहीं आई है।

 

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned