सरकार कर रही टेक्नोक्रेट्स से खिलवाड़, तीन साल में नहीं हो पाया ये काम

सरकार कर रही टेक्नोक्रेट्स से खिलवाड़, तीन साल में नहीं हो पाया ये काम

raktim tiwari | Publish: Sep, 05 2018 08:50:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

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रक्तिम तिवारी/अजमेर.

सरकार को टेक्नोक्रेट्स से ज्यादा मतलब नहीं है। अजमेर का बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज को देखकर ऐसा ही लगता है। यहां तीन साल से स्थाई प्राचार्य नहीं है। कार्यवाहक प्राचार्य ही कमान संभाले हुए हैं। साक्षात्कार प्रक्रिया का अता-पता नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में मेक इन इंडिया और स्किल्ड राजस्थान के दावे खोखले नजर आ रहे हैं।

राजकीय बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज 1996-97 में स्थापित हुआ था। यहां जून 2015 से स्थाई प्राचार्य नहीं है। डॉ. एम.एम. शर्मा के बाद से यहां कार्यवाहक प्राचार्य ही जिम्मेदारी संभाले हुए है। इस दौरान अप्रेल 2016 में तकनीकी शिक्षा विभाग ने जयपुर में साक्षात्कार भी कराए, पर तकनीकी अड़चनों के चलते नियुक्ति नहीं हो सकी।

स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने बीती फरवरी-मार्च में ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। आवेदनों की छंटाई के बाद तकनीकी शिक्षा विभाग ने बीती 13 अगस्त को साक्षात्कार कराने का फैसला किया। लेकिन जयपुर में तीज के अवकाश और उसके बाद फिर तकनीकी कारणों से तिथि बदल दी गई। इसके बाद से साक्षात्कार ही अटके हुए हैं।

कारनामों के लिए मशहूर रहा कॉलेज

बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज कई कारनामों के लिए मशहूर रह चुका है। यहां बिना कॉपियां जांचे विद्यार्थियों को नम्बर देने, उपकरणों और सामान की मनमानी खरीद-फरोख्त, शिक्षक के छात्राओं को गंदे मैसेज भेजने, कथित तौर पर बीमा कराने के लिए मजबूर करने, नियुक्तियों में गड़बड़ी सहित कई शिकायतें सरकार तक पहुंची। सरकार और राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय ने कई मामलों में जुर्माना लगाने के अलावा शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई भी की।

किसी ब्रांच में नहीं प्रोफेसर

तीन साल से सरकार इंजीनियरिंग कॉलेज कार्यवाहक प्राचार्यों के भरोसे चला रही है। यहां मेक इन इंडिया और स्किल्ड राजस्थान के दावे हवा होते दिख रहे हैं। कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल, कम्प्यूटर, आईटी और अन्य ब्रांच संचालित हैं।

यहां किसी भी ब्रांच में प्रोफेसर नहीं है। टेक्निकल विभागों में रीडर या लेक्चरर ही पढ़ा रहे हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अनुसार टेक्निकल यूनिवर्सिटी-कॉलेज में विभागवार एक प्रोफेसर, दो रीडर और तीन लेक्चरर की अनिवार्यता रखी गई है। लेकिन देशभर में स्थिति खराब है।

यहां भी नौ महीने से पद खाली

राजकीय महिला इंजीनियरिंग कॉलेज में बीते साल दिसम्बर से स्थाई प्राचार्य नहीं है। पूर्व प्राचार्य डॉ. अजयसिंह जेठू दिसम्बर 2017 में इस्तीफा देकर मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में चले गए थे। तबसे बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य प्रो. रंजन माहेश्वरी कामकाज संभाले हुए है। बीती फरवरी में छात्राओं के आंदोलन के चलते उन्होंने पद छोड़ दिया था। लेकिन तकनीकी शिक्षा विभाग ने उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया था। हाल में जुलाई में भी माहेश्वरी ने वापस राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी कोटा लौटने की इच्छा जताई थी। उन्होंने दोनों कॉलेज के प्राचार्य पद से इस्तीफा भी दे दिया था।


संस्थानों में खाली रहती हैं सीट

प्रदेश के इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्किल कॉलेज में हर साल ब्रांचवार कई सीट खाली रहती हैं। साल 2016 में पॉलीटेक्निक सहित इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिलों के हाल बहुत बुरे थे। पूरे राज्य में अगस्त के पहले पखवाड़े तक 82 हजार से ज्यादा सीट रिक्त थी। इंजीनियरिंग कॉलेज में तो केंद्रीयकृत व्यवस्था के बावजूद दाखिलों में विद्यार्थियों ने खास रुझान नहीं दिखाया था। पिछले साल भी शत-प्रतिशत सीटें नहीं भरी थी। इस साल भी पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेज में कई ब्रांच में सीट खाली हैं। साफ तौर पर यह विद्यार्थियों की इंजीनियरिंग क्षेत्र से घटती रुचि का परिचायक है।

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