Pushkar Mela : नागौरी बैल गायब, अब अश्व और ऊंट तक सिमटा मेला

अश्व और ऊंट की संख्या लगातार हो रही है कम
पिछले साल के आंकड़े के आस-पास भी नहीं आए पशु

 

हिमांशु धवल. अजमेर.

पुष्कर की शान रहे नागौरी नस्ल के बैल और बछड़े अब सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गए हैं। पुष्कर के पशु मेले में अब अश्व और ऊंट ही दिखाई देते हैं। साल दर साल पशुओं की संख्या कम होती जा रही है। पशुओं की खरीद-फरोख्त नहीं होने से पशुपालक भी ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुष्कर पशु मेला परवान पर है। पशुपालक विभिन्न स्थानों से ऊंट और घोड़ों को लेकर मेले में पहुंचे हैं। वहां पर पशुओं की खरीद-फरोख्त जारी है। पुष्कर पशु मेले में मंगलवार से पशुओं का रवन्ना शुरू हो जाएगा। इसमें मुख्य बात यह है कि पुष्कर पशु मेला नागौरी नस्ल के बैलों के लिए विख्यात था, लेकिन अब नाममात्र का गौवंश मेले में पहुंचता है। ऐसे में मेला अश्व और ऊंटों तक सिमट कर रह गया है। मेले में पशुओं की आवक लगातार कम होती जा रही है।

आंकड़े : एक नजर
2001 में गौवंश 3366 था, 2019 में मात्र 32

2001 में भैंसवंश 653 था, 2019 में मात्र 41
2001 में ऊंट वंश 15460 था, 2019 में 2981

अश्ववंश की आवक बढ़ी, इस बार घटी

पुष्कर पशु मेले में पिछले कुछ सालों में अश्ववंश की संख्या बढ़ी है। पशुपालन विभाग की ओर से उपलब्ध आंकडों के अनुसार 2001 में अश्ववंश 1923 आए थे, जबकि 2018 में इनकी संख्या 3339 तक पहुंच गई। 2019 में अभी तक 2340 अश्व पहुंच चुके हैं।

नागौरी बैल देखने को तरसे

धोरों में गौवंश की प्रमुख नस्ल नागौरी बैलों की जोडिय़ां को देखने के लिए किसान एवं पशुपालक तरस गए हैं। तीन साल से छोटे बछड़ों व बैलों को राजस्थान से बाहर नहीं ले जाने के कारण संख्या लगातार कम होती गई। खेती में भी बैलों का स्थान ट्रेक्टरों ने ले लिया है। इसके कारण अब मेले में गौवंश की आवक नाममात्र की रह गई है।

इनका कहना है...

तीन साल से छोटे नागौरी बैल और ऊंट को राजस्थान के बाहर ले जाने पर पाबंदी है। समय के साथ बैल जो काम आते थे उनका स्थान ट्रेक्टरों ने ले लिया है। इनकी उपयोगिता कम होने के कारण पशुओं की संख्या घटती जा रही है। इस बार अभी तक 5394 पशु पहुंचे हैं। इसमें सर्वाधिक ऊंट और अश्व आए हैं।

- डॉ. अजय अरोड़ा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग अजमेर

Pushkar Mela pushkar mela 2019
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himanshu dhawal Reporting
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