RPSC: आरएएस के साक्षात्कार कराने में जुटेगा अभ्यर्थी

आयोग अगस्त अंत या सितंबर में आरएएस के साक्षात्कार करा सकता है।

By: raktim tiwari

Published: 20 Jul 2020, 07:36 AM IST

अजमेर.

राजस्थान लोक सेवा आयोग आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती-2018 की मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के साक्षात्कार की तैयारी में जुटेगा। सब इंस्पेक्टर/प्लाटून कमांडर भर्ती के साक्षात्कार जुलाई अंत तक चलेंगे। आयोग अगस्त अंत या सितंबर में आरएएस के साक्षात्कार करा सकता है।

आयोग ने हाईकोर्ट के आदेशानुसार आरएएस मुख्य परीक्षा-2018 का परिणाम जारी किया है। आरएएएस एवं अधीनस्थ सेवाओं के 1051 पदों के विरुद्ध आयोग ने टीएसपी में 57 और नॉन टीएसपी में 1053 अभ्यर्थियों को अस्थाई रूप से उत्तीर्ण किया है। अब इनके साक्षात्कार कराए जाएंगे।

साक्षात्कार कराने की तैयारी
आयोग मुख्य परीक्षा परिणाम जारी कर चुका है। उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थियों के साक्षात्कार कराए जाएंगे। नियमानुसार आयोग को अभ्यर्थियों को अधिसूचना जारी कर एक महीने का समय देना होगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए विशेष सावधानी बरतनी होगी। आयोग 8 जुलाई से उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर भर्ती-2016 के साक्षात्कार शुरू कर चुका है। यह जुलाई अंत तक चलेंगे।

अगस्त या सितंबर में साक्षात्कार...
अध्यक्ष दीपक उप्रेती के अक्टूबर में कार्यकाल खत्म होगा। आयोग की मंशा है, आरएएस एवं अधीनस्थ भर्ती-2018 के साक्षात्कार अगस्त या सितंबर में कराए जाएं। हालांकि तीन ही सदस्य होने और 2010 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार कराना आयोग के लिए आसान नहीं है। अध्यक्ष उप्रेती सदस्यों की नियुक्ति को लेकर सरकार से मुलाकात भी कर सकते हैं।

बोली महिलाएं....नेताओं की लड़ाई में कहां है लोकतंत्र और युवा नेतृत्व

अजमेर. राज्य में पिछले 10 दिन से सियासी पारा चढ़ा हुआ है। शह और मात के खेल को जनता देख रही है। जनता ने विश्वास के साथ अपने जनप्रतिनिधि चुने लेकिन वह बंद कमरों में एकदूसरे को नीचा दिखाने में जुटे हैं। पक्ष और विपक्ष के सिर्फ एकमात्र मुद्दा सत्ता है। पत्रिका ने इस मुद्दे पर महिलाओं से बातचीत कर उनके विचार जाने।

लोकतंत्र पर मंडराया खतरा
पहले मध्यप्रदेश और अब राजस्थान में लोकतांत्रिक सरकार पर खतरा मंडराया है। पिछले दस दिन से राज्य में सियासी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। राजनीतिक बहस में सामाजिक, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। स्थानीय विधायक नजरबंद हैं या किसी अन्य प्रदेश में हैं। अपनी सरकार के खिलाफ कदम उठाने वाले विधायकों को निश्चित तौर पर दंडित किया जाना चाहिए। ताकि लोकतंत्र में मतदाताओं की आस्था बरकरार रहे।

डॉ.पूनम पांडे, गृहिणी

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