Corona effect : 57 साल से पाले हुए बकरे की दे रहे कुर्बानी, इस बार नहीं

ajmer news : ख्वाजा साहब की दरगाह के वरिष्ठ खादिम सैयद गनी गुर्देजी पिछले 57 सालों से घर में पाले हुए बकरे की ही ईदुलजुहा पर कुर्बानी देते आए हैं। पहली बार उन्होंने यह तय किया है कि वे इस बार पाले हुए बकरे की कुर्बानी नहीं करेंगे।

By: Yuglesh kumar Sharma

Published: 19 Jul 2020, 01:19 AM IST

अजमेर. ख्वाजा साहब की दरगाह (dargah) के वरिष्ठ खादिम (khadim) सैयद गनी गुर्देजी पिछले 57 सालों से घर में पाले हुए बकरे की ही ईदुलजुहा पर कुर्बानी देते आए हैं। पहली बार उन्होंने यह तय किया है कि वे इस बार पाले हुए बकरे की कुर्बानी नहीं करेंगे। साथ ही चार की जगह एक ही बकरे की कुर्बानी देंगे। गुर्देजी ने बताया कि उन्होंने बकरा पालने के लिए खरीद लिया था। लेकिन लॉकडाउन में चारा आदि लाने की दिक्कत हो गई। इसलिए मानस बदल लिया। गुर्देजी ने बताया कि कोरोना के डर के कारण इस बार कुर्बानी कम होगी। क्योंकि एक-दूसरे घर कुर्बानी का हिस्सा भिजवाने में एहतियात बरतनी होगी। इसलिए लोग न तो ज्यादा बकरों की कुर्बानी देंगे और एक-दूसरे के घर हिस्सा भेजने से भी बचेंगे।

बकरों की कुर्बानी पर भी कोरोना की मार!
कोरोना की मार से बकरामंडी भी अछूती नहीं है। ईदुलजुहा के 15 दिन शेष रहते बकरामंडी शुरू तो हो गई लेकिन बकरे खरीदने वाले नहीं पहुंच रहे। यहां तक इस बार मुम्बई, कोलकाता, चैन्नई आदि शहरों में भी यहां से बकरे नहीं जा रहे। इस कारण बकरा व्यापारियों को केवल अजमेर के खरीददारों से ही आस है। लेकिन कोरोना की मार साफ नजर आ रही है।

पहले चार, तो अब सिर्फ एक ही करेंगे कुर्बान

बकरामंडी उपाध्यक्ष इकबाल अहमद और सचिव राजू ने बताया कि मंडी में व्यापारी तो पहुंच गए लेकिन खरीददार बिल्कुल भी नहीं हैं। इसका मुख्य कारण जहां एक तरफ कोरोना का डर है, वहीं दूसरी तरफ लॉकडाउन के चलते लोगों की क्रयशक्ति में गिरावट है। ऐसे में ना तो बाहर बकरे भेजे जा रहे हैं और ना ही लोकल खरीदारी हो रही है। स्थिति यह है कि जो लोग बकरा ईद पर चार-चार बकरों की कुर्बानी देते थे, उन्होंने भी इस बार एक ही बकरे की कुर्बानी देने का मानस बनाया हुआ है।

Yuglesh kumar Sharma Reporting
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