देश भर में भव्यता और नक्काशी का अद्भुत नमूना है सैपऊ महादेव मंदिर

कस्बे का ऐतिहासिक महादेव मंदिर न केवल जन-जन की आस्था का केंद्र हैं, बल्कि देश भर में भव्यता और नक्काशी का अद्भुत नमूना भी हैं। बल्कि मौर्य कालीन स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है।

By: Dilip

Published: 05 Apr 2021, 12:39 AM IST

सैपऊ.कस्बे का ऐतिहासिक महादेव मंदिर न केवल जन-जन की आस्था का केंद्र हैं, बल्कि देश भर में भव्यता और नक्काशी का अद्भुत नमूना भी हैं। बल्कि मौर्य कालीन स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है। इनको राम रामेश्वर भी कहा जाता है। पार्वती नदी की ओर धौलपुर जिले के सैंपऊ कस्बे से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर महाराजा भगवंत सिंह और उनके संरक्षक कन्हैयालाल राजधर की धार्मिक आस्था का परिचय है।

मंदिर में स्थापित शिवलिंग करीब सात सो वर्ष पुराना है। यह शिवलिंग संवत 1305 में तीर्थाटन करते हुए यहां आए श्याम रतन पुरी ने एक पेड़ के नीचे अपना धुना लगा लिया और कुछ दिन बाद उन्हें आभास हुआ की इन झाडिय़ों में शिवलिंग दबा है। झाडिय़ों को हटाकर इस जगह की खुदाई की तो शिवलिंग दिखाई दिया। खुदाई करते समय शिवलिंग खंडित हो गया और खंडित मूर्ति को निषेध मानकर श्याम रतन पुरी ने मिटटी से दबाना शुरू किया, तो मूर्ति मिटटी में नहीं दबी, जितना दबाते गए वो उतनी ही बाहर निकलती गई और आठ फीट तक मिटटी का ढेर लगाने के बाद भी शिवलिंग दिखता ही रहा। इसके बाद उन्होंने गोलाकार चबूतरा नुमा बनाकर शिवलिंग की पूजा अर्चना शुरू कर दी।
मंदिर की अद्भुत नक्काशी और भव्य निर्माण

भूतल से करीब आठ फीट उंचाई पर शुरू किया गया है। भव्य और किलेनुमा तीन प्रवेश द्वार है और बीस सीढिय़ां चढ़ कर मंदिर में प्रवेश होता है। पचास गुणा साठ फीट लम्बे चौड़े चॉक में तीन विशाल बारहदरी बनी है। इन दीवारों में धौलपुर के लाल पत्थर का उपयोग किया गया है, चौक के बीच मे अष्टकोण की आकृति मे बने शिवालय मे पौराणिक शिवलिंग स्थापित है। शिवालय के आठ द्वार है। शिखर बंध मंदिर चौक से 42 फीट और भूतल से 50 फीट ऊंचा है। शिवलिंग भी चौक से आठ फीट नीचे भूतल तक है। गुफानुमा द्वार से भूतल तक शिवलिंग के निकट जाने का रास्ता भी है। भूतल से मंदिर चार मंजिला है, जो दूर से ही अपनी भव्यता का आभास कराता है।

सैंपऊ महादेव मंदिर को रामरामेश्वर भी कहा जाता है। बताते है कि मुनि विश्वामित्र के साथ भ्रमण पर आए भगवान श्री राम ने पूजा अर्चना के लिए इस शिवलिंग की स्थापना की थी। कालांतर में यह नीचे दब गया और ऊपर झाड़ व वनस्पतियां उग गई। श्याम रतन पुरी ने जब यहां खुदाई की तब यह शिवलिंग बाहर निकला।

मंदिर के मूल स्वरूप से छेड़छाड़, श्रद्धालुओं में रोष

प्रसिद्ध ऐतिहासिक महादेव मंदिर पर मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने को लेकर श्रद्धालुओं में रोष व्याप्त है। श्रद्धालुओं ने बताया के मंदिर के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ कर मंदिर की भव्यता को ग्रहण लगा दिया है। जिससे राजस्थान के अलावा अन्य राज्य से भी आने वाले श्रद्धालु मंदिर के ऊपर चढ़कर भी मंदिर की भव्यता को निहारते थे, लेकिन मंदिर की छतरी टीन शेड डलवाने से मंदिर की भव्यता को ग्रहण लग रहा है। मंदिर में आकर्षण का केंद्र बनी बारादरी पुजारियों द्वारा जालिया लगाकर ताले डाल देते हैं। जिससे मंदिर पर आने वाले श्रद्धालुओं को बैठने के लिए खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरामदे पर बैठने पर चार्ज के नाम पर अवैध वसूली की जाती है, लेकिन देवस्थान विभाग की अनदेखी के चलते मंदिर की भव्यता लगातार ग्रहण लग रहा है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं देने भी श्रद्धालुओं में रोष है।

भव्यता में रामेश्वर के बाद दूसरे नंबर परइतिहासकारों की मानें तो सैंपऊ महादेव मंदिर का शिवलिंग भारतवर्ष ही नहीं अपितु एशिया महाद्वीप में पहला स्थान रखता है। वही मंदिर की भव्यता और विशालता तमिलनाडु रामेश्वरम के बाद दूसरे स्थान पर है। मंदिर महंत रामभरोसी पुरी ने बताया कि तत्कालीन रियासत के महाराज कीरत सिंह ने शिवलिंग की खुदाई कर दूसरी जगह स्थापित करने की कोशिश की गई थी। लेकिन शिवलिंग का अंत नहीं पाया गया। लिहाजा उसी स्थान पर वैदिक विधि द्वारा स्थापना कराई गई।
मंदिर की मरम्मत के लिए बजट की मांग

श्रद्धालुओं द्वारा पूर्वी गेट के छज्जे और दीवार क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण और और पश्चिमी द्वार को मूल रूप में लाने के लिए श्रद्धालुओं ने सरकार से बजट स्वीकृत कराने की मांग की है। हालांकि इस मांग को लेकर स्थानीय प्रशासन और राजनेताओं सभी मांग करने के बाद भी बजट में मंदिर की अनदेखी के चलते लोगों में रोष है।

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