सावित्री मंदिर -मायूस लौटी महिला श्रद्धालु

दीवार पर स्वास्तिक व सिन्दूर लगाकर मांगी अखंड सुहाग की मनोकामना

By: CP

Published: 14 Sep 2021, 02:37 AM IST

पुष्कर. पुष्कर की रत्नीगिरी पहाड़ी पर स्थित मंदिर में रात्रि जागरण व मेले पर प्रशासनिक पाबंदी ने प्रदेशभर से आई सुहागिनों खासकर राजपूत समाज की सुहागिनों को मायूसी झेलनी पड़ी। पहाड़ी पर मंदिर तक नहीं पाने के कारण सुहागिनों ने सड़क पर बनी दीवार पर ही स्वास्तिक व सिन्दूर से पूजन करके अपने परिवार व अखंड सुहाग की मनोकामना की। मौके पर खड़े पुलिसकर्मियों से मंदिर तक जाने की कई बार गुहार की जो पाबंदी के कारण अनसुनी कर दी गई। मौके पर मौजूद पुजारी को मां के मंदिर में चढ़ाने वाली सुहाग पिटारी की साडिय़ां, सिन्दूर, कड़ा व मेहन्दी अर्पित करके निराशमन से नमन करती हुई लौट गई।

भादव मास की सप्तमी तिथि सोमवार की रात सावित्री मंदिर में पहाड़ी पर रात्रि जागरण होता है। इसमें पूरे प्रदेश की हजारों सुहागिनें खासकर राजपूत समाज की सुहागिने पूरी रात पूजन कीर्तन करके अखंड सुहाग की कामना करती है। लेकिन इस बार उपखंड अधिकारी सुखराम पिंडेल ने कोरोना गाइड लाइन का हवाला देते हुए पहाड़ी पर स्थित सावित्री मंदिर में 13 सितम्बर की रात्रि को जागरण व 14 सितम्बर को मेले की अनुमति नहीं दी। संतोषी माता मंदिर के पास ही पुलिस का पहरा बैठा दिया गया तथा पहाड़ी तक जाने ही नहीं दिया। सोमवार को सैकड़ों सुहागिनों ने सड़क किनारे बनी पत्थर की दीवार पर कुंकुम  से स्वास्तिक बनाया तथा सिन्दूर, मेहन्दी, अक्षत, रोली के साथ पहाड़ी मंदिर की तरफ देखते हुए पूजन किया तथा अपने अखंड सुहाग की कामना की। मौके पर मौजूद पुजारी कैलाश मिश्र को सुहाग की साडिय़ां, कड़े, मेहन्दी, सिन्दूर व दक्षिणा देकर मां सावित्री के प्रति अपनी आराधना व्यक्त की। पहाड़ी पर मंदिर में नहीं जा पाने से निराश मायूस लौट गई।

ब्रह्मा मंदिर खुला, पत्नी सावित्री के कपाट बंद

ब्रह्मा मंदिर में हजारों श्रद्धालु रोजाना प्रवेश कर रहे हैं लेकिन कोई पाबंदी नहीं है जबकि सावित्री मंदिर का जागरण नहीं होने दिया तो चर्चा का विषय रहा।

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