सॉरी प्रद्युम्न...चाहे जितना जोर लगा लो, ये नहीं चाहते खुद को बदलना

बस चालक, परिचालक, क्लीनर, चतुर्थ श्रेणी और सहायक कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन और मनोविज्ञानी परीक्षण कराना है।

By: raktim tiwari

Published: 10 Nov 2017, 08:46 AM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर।

गुरूग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में प्रद्युम्न हत्याकांड को दो महीने बीत चुके हैं। इस बीच सीबीएसई ने बच्चों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश दिए। स्कूलों ने पहचान पत्र से प्रवेश, टॉयलेट और गलियारों के निकट शिक्षकों-सहायक कार्मिकों की तैनाती, सीसीटीवी कैमरे जैसे इंतजाम किए हैं, लेकिन इनकी अक्षरश : पालना अब तक नहीं हुई है। कई कमियां अब तक बनी हुई हैं।

गुरूग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में प्रद्युम्न हत्याकांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। सीबीएसई ने सभी स्कूल को बस चालक, परिचालक, क्लीनर, चतुर्थ श्रेणी और सहायक कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन और मनोविज्ञानी परीक्षण कराना जरूरी किया। सरकारी अथवा निजी एजेंसी के माध्यम से अभिभावक-शिक्षक-विद्यार्थियों की कमेटी का गठन, स्कूल परिसर में अपरिचित, संदिग्ध व्यक्तियों के प्रवेश पर पाबंदी, उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरे और विद्यार्थियों को शारीरिक-यौन उत्पीडऩ की जानकारी देने जैसे निर्देश दिए। पत्रिका टीम ने इन निर्देशों के आधार पर स्कूल का जायजा लिया तो यह स्थिति सामने आई।

यह स्थिति मिली स्कूलों की
- मेयो कॉलेज में मुख्यद्वार पर सीसीटीवी कैमरा और ऑटोमेटिक लीवर-सुरक्षा गार्ड गुमटी

- मयूर स्कूल परिसर और मुख्यद्वार पर सीसीटीवी कैमरा, एन्ट्री रजिस्टर, गार्ड के पास वायरलेस और गुमटी में फोन
- सेंट एन्सलम्स स्कूल के मुख्यद्वार-परिसर में कैमरा, गार्ड-एन्ट्री रजिस्टर

- सेंट मेरीज स्कूल में सीसीटीवी कैमरा, गार्ड और एन्ट्री रजिस्टर
- ऑल सेंट्स स्कूल में महिला सहायिका, सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी कैमरा और एन्ट्री रजिस्टर

वेरीफिकेशन और परीक्षण में पीछे

बोर्ड के निर्देशानुसार स्कूलों को बस चालक, परिचालक, क्लीनर, चतुर्थ श्रेणी और सहायक कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन और मनोविज्ञानी परीक्षण कराना है। यह प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। सबसे बड़ी दिक्कत मनोविज्ञानी परीक्षण की है। नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ स्कूल प्राचार्य ने बताया कि स्टाफ ने इसके लिए नाराजगी जताई है। मानवाधिकार आयोग में भी शिकायतें दी गई हैं।

वैन-ऑटो में बैठते दूसरे
बच्चों को लाने-छोडऩे में लगी वैन-ऑटो ड्राइवर के लिए यातायात विभाग ने वर्दी और नेम प्लेट जरूरी की है। इसके बावजूद वैन में चालकों के मित्र-रिश्तेदार भी कई बार बैठते हैं। अनुपस्थित रहने पर चालक नियमानुसार स्कूल अथवा अभिभावकों को वैकल्पिक व्यवस्था, नए चालक की सूचना नहीं दे रहे हैं। यातायात विभाग भी दो महीने पहले अभियान चलाने के बाद बेफिक्र है। वाहनों की नियमित जांच नहीं हो रही है।

raktim tiwari Reporting
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